नयी दिल्ली, 10 सितंबर (भाषा) मणिपुरी संगीतकार चोंगथाम विक्रम सिंह की मौत छाती और पेट पर लगी गंभीर चोटों के कारण हुए अत्यधिक आंतरिक रक्तस्राव से हुई थी। बृहस्पतिवार को जारी पोस्टमार्टम रिपोर्ट में यह खुलासा हुआ।
दक्षिण-पूर्वी दिल्ली किलोकरी गांव में रविवार को अपने घर के बाहर हो रहे शोर-शराबे का विरोध करने पर कुछ लोगों ने 54 वर्षीय सिंह पर कथित तौर पर हमला कर दिया था, जिसके बाद उन्हें ये जानलेवा चोटें आईं।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि जमीन पर गिरने के बाद कथित हमलावरों ने सिंह के सीने और पेट पर लातों से वार किया। उन्होंने कहा कि पोस्टमार्टम की रिपोर्ट से हमले के दौरान लगी चोटों के स्वरूप की पुष्टि हुई है।
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के फॉरेंसिक मेडिसिन विभाग के प्रमुख डॉ. सुधीर गुप्ता ने कहा कि सिंह की मौत पेट और छाती पर हुए गंभीर हमले के कारण हुई, जिससे अत्यधिक रक्तस्राव हुआ।
गुप्ता ने कहा, ‘‘व्यक्ति की मौत पेट और छाती पर हुए गंभीर हमले के कारण हुई, जिसके परिणामस्वरूप अत्यधिक रक्तस्राव हुआ और फिर उनकी मृत्यु हो गई।'
एम्स की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बाईं ओर की पहली से 11वीं पसलियों और दाईं ओर की छठी से नौवीं पसलियों में फ्रैक्चर पाया गया, जिसके आसपास रक्तस्राव और खून के थक्के जमे हुए थे। इसके अलावा तिल्ली (स्प्लीन) में घाव भी पाया गया था।
पुलिस के अनुसार, हमले के बाद सिंह को उसी रात करीब 12:25 बजे होली फैमिली अस्पताल ले जाया गया था। शुरुआत में उन पर इलाज का असर सकारात्मक रहा, लेकिन बाद में अत्यधिक रक्तस्राव होने के कारण सुबह करीब 6:32 बजे उनकी मृत्यु हो गई।
पुलिस ने सात पुरुषों को गिरफ्तार किया है और एक नाबालिग को हिरासत में लिया है। आरोपियों की पहचान भरत कुमार (19), प्रमोद (26), रमजान खान (22), दीपांशु (21), मोहन विश्वकर्मा (32), विजय (36) और मन्नू (26) के रूप में हुई है।
आरोपियों ने पूछताछ के दौरान पुलिस को बताया कि सिंह द्वारा घर के बाहर शोर और हंगामे का विरोध करने पर वे उन्हें 'सबक सिखाना' चाहते थे, लेकिन उन्हें उम्मीद नहीं थी कि हमला जानलेवा साबित होगा।
पुलिस एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सिंह ने कुछ मौकों पर पास के एक ढाबा मालिक से वहां जुटने वाले लोगों द्वारा किए जाने वाले शोर की शिकायत की थी। हालांकि, पुलिस को इस शोर-शराबे के संबंध में सिंह की ओर से कोई औपचारिक शिकायत प्राप्त नहीं हुई थी।
पुलिस ने बताया कि ढाबा आधी रात तक खुला रहता था और वहां आस-पास के इलाकों के ग्राहकों के साथ-साथ पास में ही रहने वाले छात्र भी आते थे।।
यह घटना रात करीब 11:30 बजे हुई जब सिंह अपने घर के बाहर हंगामा सुनकर नीचे गए। सिंह के 20 वर्षीय बेटे याइफाबा ने अपनी शिकायत में कहा कि जब उसने अपने पिता के चिल्लाने की आवाज सुनी, तो उसने दरवाजा खोला और देखा कि कुछ लोग उन्हें लात-घूंसों से मार रहे थे।
सिंह इसके बाद ऊपर लौटे लेकिन उन्होंने सांस लेने में तकलीफ की शिकायत की, जिसके बाद उनका बेटा उन्हें अस्पताल ले गया।
पुलिस मामले के सभी पहलुओं की जांच कर रही है, जिसमें यह भी शामिल है कि क्या इसमें कोई नस्लीय कोण था।
पुलिस सूत्र ने बताया कि अब तक की जांच में कहासुनी के दौरान सिंह के खिलाफ किसी भी नस्लीय टिप्पणी के इस्तेमाल की बात सामने नहीं आई है।
सिंह के बेटे की शिकायत पर सनलाइट कॉलोनी थाने में दर्ज प्राथमिकी में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 103(2) का उल्लेख है, जो इस प्रावधान के तहत आने वाली परिस्थितियों में की गई हत्या (भीड़ द्वारा की गई हत्या) से संबंधित है।
भाषा सुमित राजकुमार
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