नयी दिल्ली, 10 सितंबर (भाषा) जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने बृहस्पतिवार को कहा कि नीट प्रश्नपत्र लीक मामले को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (कॉजपा) के आंदोलन के दौरान किया गया उनका 26 दिन का अनशन शरीर पर पड़े प्रभाव के बावजूद ‘‘बहुत छोटा बलिदान’’ था।
अनशन का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि वह अब ठीक हो रहे हैं और अगली संभावित चुनौती के लिए ‘‘तैयार हो रहे हैं’’।
वांगचुक की यह टिप्पणी लद्दाख से संबंधित गृह मंत्रालय की उप-समिति के साथ हुई बैठक के एक दिन बाद आई।
उन्होंने कहा कि बैठक में केंद्र शासित प्रदेश के लिए निर्वाचित निकाय की मांग के मुद्दे पर कुछ भी नया सामने नहीं आया।
वांगचुक ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘मैं उस (अनशन) से संतुष्ट हूं, क्योंकि उम्मीद लगी है कि इससे इतने सारे लोगों का जीवन नीट जैसी परीक्षाओं और शिक्षा व्यवस्था में सुधार के कारण आसान हो जाएगा। इसलिए यह बहुत छोटा बलिदान है। मैं ठीक हो रहा हूं और अगली चुनौती के लिए तैयार हो रहा हूं।’’
वांगचुक ने कहा कि वह अब भी अनशन से शरीर पर पड़े प्रभाव से पूरी तरह उबर नहीं पाए हैं और उनके शरीर में कुछ नयी स्वास्थ्य समस्याएं पैदा हो गई हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं ठीक हो रहा हूं, लेकिन पूरी तरह स्वस्थ नहीं हुआ हूं। मैं वे काम नहीं कर पा रहा हूं जो पहले किया करता था। कुछ नयी समस्याएं पैदा हो गई हैं, जैसे नयी चीजों से एलर्जी होना और घुटनों से जुड़ी कुछ परेशानियां।’’
भाषा शफीक देवेंद्र
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