नयी दिल्ली, 10 सितंबर (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय ने बृहस्पतिवार को पर्यावरण-अनुकूल उपभोक्ता उत्पाद ब्रांड बीको को हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड (एचयूएल) के ‘सर्फ एक्सेल’ और ‘विम’ उत्पादों को निशाना बनाकर चलाए गए ‘हैशटैग वॉर ऑन व्हाट्स हिडन’ अभियान के तहत जारी विज्ञापनों को हटाने और वापस लेने का निर्देश दिया।
न्यायमूर्ति अनूप जे भंभानी ने कहा कि बीको के विज्ञापनों से औसत उपभोक्ता को मिलने वाला स्पष्ट समग्र संदेश यह है कि कुछ रासायनिक अवयवों की मौजूदगी के कारण एचयूएल के उत्पादों के इस्तेमाल से त्वचा में जलन, खुजली या यहां तक कि एक्जिमा हो सकता है।
उन्होंने कहा कि प्रथम दृष्टया यह तुलनात्मक विज्ञापन की स्वीकार्य सीमा से परे है।
अदालत ने बीको ब्रांड के तहत उत्पाद बेचने वाली क्विक लिविंग (आई) प्राइवेट लिमिटेड के अभियान के खिलाफ एचयूएल की ओर से दायर मुकदमे पर यह अंतरिम आदेश पारित किया।
अदालत ने अपने आदेश में कहा, ‘‘विवादित अभियान में किए गए इन दावों को एक साथ और समग्र रूप से देखने पर यह केवल तुलनात्मक विज्ञापन नहीं है, जिसमें प्रतिवादी के उत्पादों को वादी के उत्पादों से बेहतर बताया गया हो, बल्कि इसमें सत्यापित वैज्ञानिक आधार के रूप में पेश किए गए दावों के जरिये वादी के उत्पादों को बदनाम किया गया है।’’
अदालत ने निर्देश दिया कि प्रतिवादी वर्तमान कार्यवाही का विषय बने उन सभी विज्ञापनों को, जिनमें फैसले में उल्लिखित आपत्तिजनक बयान हैं, किसी भी रूप, प्रारूप या माध्यम में तत्काल हटाए और वापस ले। उसे आज से एक सप्ताह के भीतर अनुपालन संबंधी हलफनामा भी दाखिल करना होगा।
एचयूएल ने अदालत में दलील दी कि बीको का विज्ञापन अभियान झूठा और भ्रामक है।
बीको ने अपने अभियान का बचाव करते हुए कहा कि किसी कारोबारी को अपने प्रतिद्वंद्वी के सामान से अपने उत्पाद की तुलना करने की अनुमति है। इसके लिए वह प्रतिद्वंद्वी के ट्रेडमार्क और पैकेजिंग का उतना इस्तेमाल कर सकता है, जितना तुलना किए जा रहे उत्पाद की पहचान के लिए जरूरी हो।
एचयूएल ने उच्च न्यायालय के फैसले पर कहा कि वह यह सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है कि उसके सभी उत्पाद लागू नियामकीय आवश्यकताओं और कड़े वैश्विक सुरक्षा मानकों के अनुरूप तैयार, निर्मित और सुरक्षा की दृष्टि से आकलित किए जाएं।
भाषा
योगेश अजय
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