इंदौर, 10 सितंबर (भाषा) मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ ने उज्जैन में 'सिंहस्थ कुंभ 2028' की तैयारियों के तहत सड़क चौड़ी करने के लिए ऐतिहासिक 'शाही मस्जिद' के बाधक हिस्सों को हटाने के नगर निगम के नोटिस को सही ठहराते हुए इसके खिलाफ पेश दो याचिकाएं खारिज कर दी हैं।
न्यायमूर्ति संदीप एन. भट्ट की एकल पीठ ने नौ सितंबर को दिए आदेश में कहा कि सड़क चौड़ी करने के लिए शहरी निकाय की कार्रवाई को मनमाना, अन्यायपूर्ण या असंवैधानिक नहीं माना जा सकता।
दोनों याचिकाएं शाही मस्जिद से जुड़े अलग-अलग समूहों ने दायर की थीं। इस धार्मिक स्थल के करीब 100 साल पुराने होने का दावा किया जाता है।
उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ताओं के इस दावे को खारिज कर दिया कि उनके साथ भेदभाव किया जा रहा है।
एकल पीठ ने अपने फैसले में सख्त टिप्पणी की कि ऐसा प्रतीत होता है कि याचिकाकर्ता धार्मिक स्थल को विशेष छूट देने के बहाने कोई न कोई विवाद खड़ा करके सड़क चौड़ीकरण की प्रक्रिया में सहयोग नहीं कर रहे हैं।
अदालत ने कहा कि 2028 के सिंहस्थ कुंभ मेले में आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा का ध्यान रखना जरूरी है, इसलिए आम जनता के हितों को देखते हुए उज्जैन में सड़क चौड़ी करने के लिए नगर निगम का कदम पूरी तरह कानून के मुताबिक है।
उज्जैन के कंठाल चौराहे से गोपाल मंदिर मार्ग पर 15 मीटर सड़क चौड़ीकरण की प्रक्रिया जारी है। इसके तहत जारी नोटिस के खिलाफ याचिकाकर्ताओं ने दलील दी थी कि इससे मस्जिद का नमाज हॉल (जमात खाना), वजूखाना और 120 फुट ऊंची मीनार का हिस्सा प्रभावित होगा जो संविधान के अनुच्छेद 14, 25 और 26 का उल्लंघन है।
उधर, नगर निगम और राज्य सरकार के वकीलों ने इस दलील को खारिज किया। उन्होंने कहा कि 'उज्जैन मास्टर प्लान 2035' के तहत महाकालेश्वर मंदिर और क्षिप्रा नदी को जोड़ने वाले मार्ग पर बिना किसी भेदभाव के 10 मंदिरों व एक मस्जिद सहित 80 संरचनाओं को हटाया गया है।
वकीलों ने अदालत को बताया कि सड़क चौड़ी होने से शाही मस्जिद का 10 प्रतिशत से भी कम हिस्सा प्रभावित हो रहा है।
उन्होंने कहा कि प्रशासन ने इस नुकसान के मुआवजे के तौर पर याचिकाकर्ताओं को एफएआर यानी बची हुई जमीन पर अतिरिक्त निर्माण की मंजूरी और टीडीआर यानी प्रभावित हिस्से के बदले शहर में किसी दूसरी जगह निर्माण के अधिकार के तौर पर दो विकल्प दिए हैं।
उच्च न्यायालय ने सभी संबद्ध पक्षों की दलीलों पर गौर के बाद नगर निगम द्वारा सड़क चौड़ी करने के लिए उठाए गए कदम को कानूनन वैध करार दिया और दोनों याचिकाओं को आधारहीन पाते हुए निरस्त कर दिया।
भाषा
हर्ष रवि कांत