भुवनेश्वर, 10 सितंबर (भाषा) ओडिशा के बालासोर जिले से हाल में बचाए गए और यहां नंदनकानन प्राणी उद्यान में निगरानी में रखे गए पांच ओरंगुटान कई तरह की भावनाएं दिखा रहे हैं। इनमें चंचल व्यवहार, थोड़े समय के लिए मूड में बदलाव और घबराहट में एक-दूसरे से चिपके रहना शामिल है।
चिड़ियाघर प्रशासन इसके मद्देनजर इन्हें तनावमुक्त रखने के लिए कई उपाय कर रहा है।
‘ओरंगुटान’ वानर प्रजाति का एक बड़ा जीव है।
चिड़ियाघर के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि बृहस्पतिवार को इन जीवों को धूप सेंकने के लिए उनके बाड़े से बाहर निकाला गया।
इन जीवों को वन विभाग के कर्मियों ने मंगलवार को बचाया था।
अधिकारी ने बताया कि छह महीने से एक साल की उम्र के इन ओरंगुटान का व्यवहार मानव बच्चों जैसा दिखाई दे रहा है। पांचों ओरंगुटान में से तीन नर हैं और दो मादा हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘कभी-कभी वे शांत और सहज दिखाई देते हैं, लेकिन अगले ही पल एक-दूसरे से चिपक जाते हैं। संभवतः मां से अलग होने के कारण उनमें पैदा हुई चिंता की वजह से वे ऐसा कर रहे हैं।’’
उन्होंने बताया कि ये जीव पृथक इकाई में खिलौनों से भी खेल रहे हैं।
क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक प्रकाश चंद्र गोगिनेनी ने कहा कि मनुष्यों और ओरंगुटान में आनुवंशिक समानता काफी अधिक होती है।
उन्होंने कहा, ‘‘मानव बच्चे और ओरंगुटान के बच्चे में कोई अंतर नजर नहीं आता। कुछ शोध पत्रिकाओं के अनुसार, मनुष्यों और ओरंगुटान के आनुवंशिक गुणों में लगभग 96.4 प्रतिशत समानता होती है।’’
उन्होंने कहा कि सुमात्रा ओरंगुटान सोसाइटी के एक हालिया अध्ययन में भी उनके मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक व्यवहार में समानताएं देखी गई हैं।
नंदनकानन प्राणी उद्यान के उप निदेशक प्रदीप मिरासे ने कहा कि इन जीवों के व्यवहार में मनुष्यों से समानता उनके रखरखाव और नए वातावरण में ढलने में मदद करेगी।
नंदनकानन प्राणी उद्यान के निदेशक सनथ कुमार एन ने कहा कि इन जीवों को पशु चिकित्सा देखभाल उपलब्ध कराई जा रही है और उनकी शारीरिक तथा मानसिक स्थिति पर करीबी नजर रखी जा रही है।
उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘हम उन्हें उपलब्ध बेहतर पशु चिकित्सा उपचार मुहैया करा रहे हैं और साथ ही उनकी मानसिक स्थिति पर भी नजर रख रहे हैं, क्योंकि बचाए जाने के समय ओरंगुटान डरे हुए थे। वन्यजीव स्वास्थ्य केंद्र (सीडब्ल्यूएच) के परामर्श के अनुसार उनका इलाज किया जा रहा है।’’
ओडिशा के वन एवं पर्यावरण मंत्री गणेश राम सिंह खुंटिया ने कहा कि सरकार इन जीवों के स्वास्थ्य को प्राथमिकता दे रही है।
उन्होंने कहा, ‘‘ओरंगुटान के बच्चों का स्वास्थ्य सरकार की प्राथमिकता है। नंदनकानन चिड़ियाघर के अधिकारी भी मैसुरु चिड़ियाघर के अधिकारियों के लगातार संपर्क में हैं, जहां ओरंगुटान रखे गए हैं।’’
पांचों ओरंगुटान को आठ सितंबर को बालासोर जिले के एक जंगल से बचाया गया था।
अधिकारियों ने बताया कि राज्य पुलिस और वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो (डब्ल्यूसीसीबी) संयुक्त रूप से जांच कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि आशंका जताई जा रही है कि राज्य में इन जीवों के अचानक मिलने के पीछे किसी अंतरराष्ट्रीय तस्करी गिरोह का हाथ हो सकता है।
भाषा
देवेंद्र माधव
माधव