नयी दिल्ली, 10 सितंबर (भाषा) पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने प्राकृतिक संसाधनों से जुड़े आंकड़ों को मजबूत करने, बेहतर निर्णय लेने और विशेष रूप से प्रकृति-आधारित समाधानों के माध्यम से भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं में तेजी लाने के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग करने की आवश्यकता पर बृहस्पतिवार को बल दिया। उन्होंने कहा कि 2035 तक 3.5–4.0 अरब टन सीओ2-समतुल्य कार्बन सिंक बनाने के भारत के लक्ष्य को हासिल करने के लिए मजबूत संस्थागत क्षमताओं, प्रभावी नीतियों और लोगों तथा समुदायों की सक्रिय भागीदारी के साथ-साथ तकनीकी नवाचार की भी जरूरत होगी।
यादव ने ये टिप्पणियां ‘वन और वृक्ष संसाधनों के आकलन में नवीनतम प्रौद्योगिकियों का लाभ’ विषय पर आयोजित एक राष्ट्रीय कार्यशाला के उद्घाटन के दौरान कीं।
कार्यशाला में राज्यों के वन विभागों, वैज्ञानिक संस्थानों, वैज्ञानिकों, प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों और अन्य हितधारकों को वन और वृक्ष संसाधनों के मूल्यांकन, निगरानी और प्रबंधन को मजबूत करने के लिए प्रौद्योगिकी-आधारित दृष्टिकोण की पड़ताल करने के लिए एक साथ लाया गया।
यादव ने वन संरक्षण पर समन्वित कार्रवाई को सक्षम करने के लिए संस्थानों में मापदंडों के मानकीकरण का आह्वान करते हुए इस बात पर जोर दिया कि प्रतिपूरक वनीकरण का उद्देश्य वृक्षारोपण को संरक्षित करने और हरित आवरण की गुणवत्ता में सुधार के साथ स्पष्ट रूप से तालमेल बिठाया जाना चाहिए।
उन्होंने बार-बार आग लगने की घटनाओं के आधार पर जंगल में आग लगने वाले क्षेत्रों को वर्गीकृत करने और लक्षित रोकथाम रणनीतियों के लिए ‘हॉटस्पॉट’ की पहचान करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
उन्होंने कहा कि जैव विविधता के संरक्षण और पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने के लिए आर्द्रभूमि महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने आर्द्रभूमि, वनाच्छादित भूमि और घास के मैदानों का समुचित संतुलन बनाए रखने का आह्वान किया।
भाषा देवेंद्र पवनेश
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