जालना, 10 सितंबर (भाषा) मराठा आरक्षण आंदोलन के कार्यकर्ता मनोज जरांगे पाटिल की भूख हड़ताल बृहस्पतिवार को 13वें दिन भी जारी रही। इस बीच, अंतरवाली सराटी गांव में स्कूली छात्राओं को हो रही परेशानी का हवाला देते हुए जालना की जिलाधिकारी ने उनसे इसे समाप्त करने का आग्रह किया है।
इससे पहले दिन में जरांगे ने कहा था कि उनका प्रस्तावित मुंबई मार्च निश्चित रूप से होगा और 12 सितंबर को समर्थकों के मौजूदा धरना स्थल पर एकत्र होने के बाद मुंबई कूच की तारीख घोषित की जाएगी।
यहां एक पत्रकार सम्मेलन को संबोधित करते हुए जिलाधिकारी आशिमा मित्तल ने कहा कि जरांगे की भूख हड़ताल समाप्त कराना प्रशासन का कर्तव्य है, विशेषकर इसलिए क्योंकि आंदोलन और गांव में भीड़ जुटने से सामान्य जीवन प्रभावित हो रहा है।
उन्होंने कहा, 'विरोध स्थल पर बड़ी संख्या में भीड़ जुटने के कारण अंतरवाली सराटी में छात्राओं ने स्कूल जाना बंद कर दिया है।' उन्होंने कहा कि प्रशासन इस स्थिति को लेकर चिंतित है।
गांव के अपने हालिया दौरे का जिक्र करते हुए मित्तल ने कहा कि महिलाओं के एक समूह ने शराब की कथित अवैध बिक्री और ग्रामीणों पर इसके प्रतिकूल प्रभाव की शिकायत की थी।
उन्होंने कहा, 'हमने गांव में शराब की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया है और यह पाबंदी आंदोलन समाप्त होने तक लागू रहेगी।'
जिलाधिकारी ने जरांगे से 12 सितंबर से पहले अपना अनशन समाप्त करने का आग्रह किया, क्योंकि उस दिन अंतरवाली सराटी में उनके कई और समर्थकों के जुटने की उम्मीद है।
मित्तल ने कहा कि राज्य सरकार मराठा समुदाय द्वारा उठाए गए अधिकांश मुद्दों को हल करने के लिए काम कर रही है।
जरांगे मराठा समुदाय को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी के तहत आरक्षण देने की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा वह हैदराबाद और सातारा गजट अभिलेखों को लागू करने तथा पात्र मराठा समुदाय के सदस्यों को कुनबी (ओबीसी) जाति प्रमाणपत्र जारी करने की मांग भी कर रहे हैं।
इससे पहले दिन में जरांगे ने पत्रकारों से बातचीत में कहा था, ‘‘मैं निश्चित रूप से मुंबई जा रहा हूं। 12 सितंबर को जब हम इकट्ठा होंगे, उसके बाद तारीख घोषित करेंगे।’’
उनके स्वास्थ्य को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच जरांगे ने कहा कि वह यह देखेंगे कि कुनबी प्रमाणपत्र जारी करने के लिए शिविर किस तरह आयोजित किए जा रहे हैं और क्या ये शिविर मौजूदा आंदोलन के कारण लगाए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘हमें परिस्थिति के अनुसार काम करना होगा। देखते हैं कि कुनबी प्रमाणपत्र के लिए शिविर किस तरह आयोजित किए जाते हैं।’’
बुधवार को जरांगे ने राज्य के मंत्री और मराठा आरक्षण उप-समिति के अध्यक्ष राधाकृष्ण विखे पाटिल पर केवल मीठी बातें करने और आश्वासन देकर समुदाय को धोखा देने का आरोप लगाया था। उन्होंने चेतावनी दी थी कि अगर 12 सितंबर तक उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं, तो आंदोलन मुंबई पहुंचेगा।
उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और शिवसेना मंत्री संजय शिरसाट पर निशाना साधते हुए जरांगे ने कहा कि शिरसाट की वजह से शिंदे के साथ उनके संबंध खराब हुए हैं।
उन्होंने आरोप लगाया,‘‘मैं तीन साल तक एकनाथ शिंदे के बारे में सम्मानपूर्वक बोलता रहा। लेकिन अब वह समुदाय के पक्ष में नहीं, बल्कि एक पार्टी के पक्ष में बोल रहे हैं।’’
जरांगे ने कहा कि वह मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्रियों की ओर से की गई गलतियों के खिलाफ आवाज उठाते रहेंगे।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं किसी राजनीतिक पार्टी के लिए नहीं, बल्कि समुदाय के लिए बोलूंगा।’’
इस बीच, शिवसंग्राम पार्टी की अध्यक्ष ज्योति विनायकराव मेटे ने मनोज जरांगे के मुंबई मार्च करने के फैसले पर सवाल उठाए हैं।
बीड में एक पत्रकार सम्मेलन को संबोधित करते हुए उन्होंने सवाल किया कि जब राज्य सरकार ने जरांगे की 12 मांगों को पहले ही स्वीकार कर लिया है, तो वे मुंबई मार्च करने पर अड़े क्यों हैं।
मेटे ने कहा कि जरांगे को अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता देनी चाहिए और अपनी भूख हड़ताल को सकारात्मक मोड़ पर समाप्त करना चाहिए।
उन्होंने कहा, 'जब सरकार बातचीत के रास्ते खुले रख रही है और 12 मांगें मान चुकी है, तो आंदोलनकारियों को अपना अडिग रवैया छोड़कर बातचीत का रास्ता चुनना चाहिए।'
मेटे ने कहा कि मराठा समुदाय के लिए आरक्षण की मांग पूरी तरह से जायज है और इसके लिए आंदोलन जरूर किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी इस मुद्दे का पूरी तरह समर्थन करती है।
भाषा सुमित नरेश
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