नयी दिल्ली, 10 सितंबर (भाषा) केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बृहस्पतिवार को कृषि विभाग से कहा कि वह पाकिस्तान की तरफ से टिड्डी दल के हमलों से निपटने के लिए ‘स्थायी तैयारी’ को बरकरार रखे।
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन संस्थान (एनआईडीएम) के शासी निकाय की तीसरी बैठक की अध्यक्षता करते हुए शाह ने कहा कि ऐसे हमलों से निपटने के लिए अन्य देशों में अपनाई जा रही बेहतर कार्यप्रणालियों को भारत में लागू किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘कृषि विभाग को पाकिस्तान की ओर से आने वाले टिड्डी दल के हमलों से निपटने के लिए स्थायी तैयारी पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।’’
गृह मंत्रालय, राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए), राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी), कृषि मंत्रालय, दिल्ली विश्वविद्यालय और अन्य केंद्र एवं राज्य सरकार के संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी वाली बैठक को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में देश में आपदा प्रबंधन के दृष्टिकोण और तरीकों में व्यापक बदलाव आया है।
उन्होंने कहा कि पहले की राहत एवं पुनर्वास पर जोर देने वाली व्यवस्था से आगे बढ़कर अब ‘शून्य जनहानि’ के दृष्टिकोण को अपनाया गया है।
आपदा को सहने में सक्षम गांवों और शहरों के निर्माण को मोदी सरकार की प्राथमिकता बताते हुए उन्होंने कहा कि नए दृष्टिकोण के तीन प्रमुख आधार हैं— जोखिम में कमी, पूर्व चेतावनी प्रणाली और ‘शून्य जनहानि’।
शाह ने कहा, ‘‘हमने कई आपदाओं से सफलतापूर्वक शून्य जनहानि के साथ निपटा है, जो एक बड़ी उपलब्धि है।’’
उन्होंने ‘संपूर्ण सरकारी दृष्टिकोण’ अपनाने का आह्वान किया, जिसमें आपदा आने पर सभी सरकारी विभाग सक्रिय रूप से प्रतिक्रिया दें।
उन्होंने कहा, ‘‘जब भी कोई आपदा आती है, सभी सरकारी विभाग सक्रिय रूप से प्रतिक्रिया देते हैं। अब नए शोध की ताकत के साथ हमें इस प्रक्रिया को और तेजी से आगे बढ़ाना चाहिए और निरंतर निगरानी सुनिश्चित करनी चाहिए।’’
शाह ने कहा कि अब इसी दृष्टिकोण का इस्तेमाल शोध, लगातार निगरानी और समन्वित कार्रवाई के जरिये आपदा प्रबंधन को मजबूत करने के लिए किया जाना चाहिए।
गृह मंत्री ने कहा कि पर्यावरण को होने वाले नुकसान को कम करने की कोशिशें आपदाओं को रोकने में मदद कर सकती हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ‘मिशन लइाफ’, ‘प्रो-प्लैनेट पीपल’ और ‘अंतरराष्ट्रीय सौर ऊर्जा’ जैसी पहल आपदाओं को रोकने में योगदान दे रही हैं।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने फैसला किया है कि आपदा फंड का बंटवारा भी एक वैज्ञानिक प्रक्रिया के जरिए किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘राज्य आपदा प्रतिक्रिया निधि के तहत आवंटन लगभग चार गुना बढ़ गया है, जबकि राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया निधि के तहत आवंटन लगभग तीन गुना बढ़ा है। पिछले 11 सालों में इस क्षेत्र में लगभग 2.5 लाख करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं, जो एक बड़ी उपलब्धि है।’’
भाषा संतोष नरेश
नरेश