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भारत, रूस नई द्विपक्षीय निवेश संधि के लिए वार्ता में तेजी ला रहे हैं : गोयल

नयी दिल्ली, 10 सितंबर (भाषा) वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बृहस्पतिवार को कहा कि भारत और रूस नई द्विपक्षीय निवेश संधि (बीआईटी) पर बातचीत तेज कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य दोनों देशों के निवेशकों को कानूनी निश्चितता प्रदान करना है।

गोयल ने यहां भारत-रूस व्यापार संवाद को संबोधित करते हुए कहा कि दोनों देश भारत और रूस की अगुवाई वाले यूरेशियन आर्थिक संघ (ईएईयू) के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर बातचीत जल्द पूरी करने के लिए भी प्रतिबद्ध हैं।

यूरेशियन आर्थिक संघ (ईएईयू) में पांच देश आर्मेनिया, बेलारूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान और रूस शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि यह समझौता सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों (एमएसएमई) समेत विभिन्न उद्योगों के लिए नए बाजार खोलेगा।

गोयल ने कहा, ‘‘हम (भारत-रूस) नई द्विपक्षीय निवेश संधि पर बातचीत तेज कर रहे हैं, ताकि दोनों देशों के निवेशकों को उन परियोजनाओं और कारोबार के लिए कानूनी निश्चितता मिल सके, जिसकी वे निवेश संबंधी निर्णय लेते समय तलाश करते हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हम स्थानीय मुद्राओं में भुगतान की व्यवस्था को मजबूत करना जारी रख रहे हैं, क्योंकि जमीनी स्तर पर व्यापार को धीमा करने वाली समस्या अक्सर शुल्क नहीं बल्कि भुगतान से जुड़ी अड़चनें होती हैं।’’

गोयल ने भारत-रूस आर्थिक और औद्योगिक साझेदारी में तेजी लाने का आह्वान करते हुए दोनों देशों के कारोबारियों से 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर और दोनों तरफ से निवेश को 50 अरब डॉलर तक पहुंचाने के लक्ष्य की दिशा में काम करने को कहा।

फिलहाल दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार 60 अरब डॉलर का है।

उन्होंने कहा कि मौजूदा करीब 60 अरब डॉलर के स्तर से द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर 100 अरब डॉलर करने के लिए अगले चार वर्षों में करीब 40 अरब डॉलर जोड़ने होंगे और सालाना दोहरे अंक की दर से लगातार वृद्धि बनाए रखनी होगी।

गोयल ने कहा कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए केवल सरकारों को ही नहीं, बल्कि दोनों देशों के कारोबारियों को भी समान रूप से महत्वपूर्ण प्रयास करने होंगे।

द्विपक्षीय व्यापार में विविधता लाने की संभावनाओं का उल्लेख करते हुए गोयल ने कहा कि रूस को भारत के मांस और मांस से बने खाद्य उत्पादों का निर्यात 3.6 करोड़ डॉलर से बढ़कर 9.7 करोड़ डॉलर हो गया है, यानी इसमें करीब 170 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

मछली और समुद्री उत्पादों का निर्यात 12.3 करोड़ डॉलर से बढ़कर 15.9 करोड़ डॉलर हो गया, जो करीब 30 प्रतिशत की वृद्धि है। वहीं, सब्जियों का निर्यात 3.8 करोड़ डॉलर से बढ़कर 5.4 करोड़ डॉलर हो गया, जिसमें 40 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

इसी तरह, कॉफी, चाय और मसालों का निर्यात 13 प्रतिशत बढ़कर 11.6 करोड़ डॉलर हो गया, जबकि 'मिलिंग उद्योग' के उत्पादों का निर्यात करीब दोगुना हो गया।

उन्होंने कहा कि ये आंकड़े रूसी बाजार में भारतीय किसानों, खाद्य प्रसंस्करण कंपनियों, सूक्ष्म, लघु एवं मझोले उद्यमों के निर्यातकों के उत्पादों की बढ़ती मांग को दर्शाते हैं।

हालांकि, उन्होंने कहा कि अब तक इस संभावनाओं के एक छोटे हिस्से का ही उपयोग किया गया है।

दोनों अर्थव्यवस्थाओं की पूरकता का उल्लेख करते हुए गोयल ने कहा कि ऐसे कई उत्पाद हैं जिनका रूस बड़ा आयातक है और जिनका भारत वैश्विक स्तर पर प्रमुख निर्यातकों में शामिल है।

उन्होंने कहा कि औषधि, वाहन कलपुर्जे, ट्रैक्टर और खाद्य उत्पाद ऐसे क्षेत्र हैं जिनमें संभावनाएं तलाशने की जरूरत है।

गोयल ने कहा कि दोनों देशों के बीच गैर-ऊर्जा व्यापार अब भी अपनी संभावनाओं से काफी कम है और यही वह गुंजाइश है जिसके जरिये द्विपक्षीय व्यापार को 60 अरब डॉलर से बढ़ाकर 100 अरब डॉलर किया जा सकता है।

गोयल ने कारोबारियों से दिल्ली से रवाना होने से पहले कम से कम एक सौदे को अंतिम रूप देने, एक नए मित्र और साझेदार की पहचान करने तथा कम से कम एक ठोस परियोजना को आगे बढ़ाने को कहा।

भाषा

योगेश अजय

अजय