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जम्मू कश्मीर सरकार सरकारी कार्यक्रम में वंदे मातरम् के पूर्ण गायन के लिए कानून से बंधी है : उमर

(फाइल फोटो के साथ)

श्रीनगर, 10 सितंबर (भाषा) जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने ‘वंदे मातरम्’ के मुद्दे पर अपनी सहयोगी पार्टी कांग्रेस को बृहस्पतिवार को जवाब देते हुए कहा कि सरकारी कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत के सभी अंतरों के लिए खड़ा होना एक कानूनी जरूरत है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

अब्दुल्ला यहां जम्मू-कश्मीर के पहले अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के उद्घाटन के दौरान राष्ट्र गीत का पूरा संस्करण गाये जाने पर कांग्रेस द्वारा नेशनल कांफ्रेंस की आलोचना किये जाने का जवाब दे रहे थे।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मुद्दे को बेवजह राजनीतिक रंग दिया गया।

उन्होंने पत्रकारों से कहा, ‘‘उसे (कांग्रेस को) संसद में इसे रोकना चाहिए था। लेकिन, अब कानून बन चुका है। ऐसे में, किसी कार्यक्रम में जहां दो राज्यपाल, एक उपराज्यपाल और हमारे उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश मौजूद हों, वहां राष्ट्रगीत तो बजाया ही जाएगा।’’

अब्दुल्ला ने कहा कि कानूनी तौर पर, जहां भी राष्ट्रगीत बजाया जाता है, वहां ‘वंदे मातरम्’ के सभी अंतरे गाना अनिवार्य किया गया है।

उन्होंने कहा, ‘‘यह सिर्फ़ जम्मू-कश्मीर के लिए नहीं है; यह पूरे देश पर लागू होता है। कांग्रेस-शासित राज्यों में भी सरकारी कार्यक्रमों में ऐसा ही होगा।’’

अब्दुल्ला ने कहा कि जो लोग पूरा राष्ट्रगीत गाते समय खड़े नहीं होते, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है। उन्होंने सवाल किया कि क्या कांग्रेस चाहती है कि इसी बहाने कश्मीरियों को जेल भेजा जाए।

उन्होंने कहा, ‘‘अब यह एक कानूनी जिम्मेदारी है। आज भी समापन समारोह में केंद्रीय मंत्री मौजूद रहेंगे। वहां राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत दोनों बजाए जायेंगे।’’

मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी पार्टी ने पूरे गीत को नहीं अपनाया है और अगर भविष्य में कांग्रेस सरकार इसे रद्द करती है, तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं होगी।

उन्होंने कहा,‘‘जब कांग्रेस सत्ता में आएगी - और मैं प्रार्थना करता हूं कि कांग्रेस जल्द से जल्द सत्ता में आए - तो वह संसद में इसे रद्द कर सकती है। उसे ऐसा करने दें, हमें कोई आपत्ति नहीं है। असल में, एक पार्टी के तौर पर हमने कभी 'वंदे मातरम्' को नहीं अपनाया है और भविष्य में भी नहीं अपनायेंगे। लेकिन हमारी जो भी कानूनी और वैधानिक जिम्मेदारियां हैं, हमें उन्हें पूरा करना होगा।’’

अब्दुल्ला ने इस विवाद को ‘‘राई का पहाड़ बनाने’’ की कोशिश करार दिया।

उन्होंने अपनी पार्टी के मुख्य प्रवक्ता और ज़दीबल के विधायक तनवीर सादिक़ के कश्मीर के लोगों के बारे में कथित अपमानजनक बयानों का भी ज़िक्र किया और कहा कि यह एक बेवजह का विवाद है।

अब्दुल्ला ने कहा, ‘‘अब, तनवीर ने ऐसा क्या कहा जो ऐतिहासिक रूप से गलत था? वाल्टर लॉरेंस ने अपनी किताब में इसके बारे में लिखा है। कई अन्य इतिहासकारों ने जम्मू-कश्मीर और खासकर कश्मीरियों की घोर गरीबी का ज़िक्र किया है—कि कैसे उस समय हम 'जैलदारों', 'चकदारों' और जमींदारों के बीच पिस रहे थे। लोगों के पास पैसे नहीं थे।’’

अपनी पार्टी के साथियों का बचाव करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सादिक़ पार्टी के ऐसे पहले व्यक्ति नहीं हैं जिन्होंने यह बात कही हो।

उन्होंने कहा, ‘‘नेशनल कांफ्रेंस के शायद ही किसी वरिष्ठ नेता ने - हमारे अध्यक्ष से लेकर महासचिव और दूसरों तक - इस संदर्भ में बात न की हो: कि एक समय ऐसा था जब कश्मीरी इतने गरीब थे कि उन्हें शहर जाने के लिए मस्जिद से पतलून उधार लेनी पड़ती थी।’’

उन्होंने कहा, ‘‘यह तनवीर की निजी राय नहीं है। यह एक ऐतिहासिक तथ्य है। और उनका मकसद बस यह दिखाना था कि हम किस स्तर की गरीबी से निकलकर आज इस मुकाम पर पहुंचे हैं, जहां हम अपने बच्चों को पढ़ा-लिखा रहे हैं और उन्हें डॉक्टर और इंजीनियर बनते देख रहे हैं।’’

अब्दुल्ला ने कहा कि भाजपा और पीडीपी मिलकर एक तयशुदा खेल खेलते हैं, जिसमें वे किसी एक मुद्दे को चुनते हैं और उसे आगे बढ़ाते हैं।

भाषा

राजकुमार रंजन

रंजन