कोलकाता, 10 सिंतबर (भाषा) पश्चिम बंगाल विधानसभा ने बृहस्पतिवार को पूर्व उपाध्यक्ष एवं तृणमूल कांग्रेस नेता डॉ. आशीष बनर्जी के निधन पर शोक व्यक्त किया। विभिन्न राजनीतिक दलों के विधानसभा सदस्यों ने भी डॉ. बनर्जी के व्यक्तिगत जीवन, विधायी कार्यों और शैक्षणिक योगदान को याद किया।
डॉ. बनर्जी का शव 16 अगस्त को बीरभूम जिले के रामपुरहाट में उनके आवास के पास पार्टी के एक कार्यालय में फांसी के फंदे पर लटका हुआ पाया गया था और परिसर से एक कथित ‘सुसाइड नोट’ भी बरामद हुआ था।
राज्य के मंत्री तापस रॉय ने डॉ. बनर्जी के साथ अपने लंबे जुड़ाव को याद करते हुए कहा कि 74-वर्षीय नेता ‘‘बेहद विनम्र, शिष्ट, मृदुभाषी और एक भद्र पुरुष थे’’।
राज्य के उद्योग मंत्री रॉय ने कहा, ‘‘जब वह (डॉ. बनर्जी) उपाध्यक्ष थे, तब मैंने कई मुद्दों पर उनसे बातचीत की थी। किसी व्यक्ति को सिर्फ़ इसलिए अपराधी नहीं ठहराया जाना चाहिए, क्योंकि वह किसी खास कमेटी में रहा हो या किसी खास सरकार के तहत कोई ज़िम्मेदारी निभाई हो।’’
रॉय पहले तृणमूल कांग्रेस में थे और बाद में उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) का दामन थाम लिया।
कथित ‘सुसाइड नोट’ के अनुसार, पूर्व उपाध्यक्ष ने कहा कि वह अक्सर तृणमूल के भीतर हो रही ‘गलत हरकतों’से असहमत रहते थे, लेकिन उनके ख़िलाफ़ आवाज़ नहीं उठा पाए।
सुसाइड नोट में कथित तौर पर कहा गया है कि उन्हें बदनाम करने और अपमानित करने की कोशिशें की गईं तथा उन्होंने अपने परिवार के सदस्यों को राजनीति में न आने की सलाह दी।
पश्चिम बंगाल विधानसभा के अध्यक्ष रतींद्र बोस ने भी बनर्जी के निधन पर शोक व्यक्त किया और सदस्यों से अपनी संवेदनाएं प्रकट करने का आग्रह किया।
विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष ऋतब्रत बनर्जी ने पूर्व उपाध्यक्ष से हुई अपनी अंतिम बातचीत को याद किया। उन्होंने कहा, ‘‘उन्होंने (डॉ. बनर्जी ने) अपनी मौत से एक दिन पहले मुझे फोन किया था। शुरुआती दो मिनट हमने राजनीति पर बात की, लेकिन बाकी बातचीत किताबों और दूसरे विषयों पर हुई।’’
आईएसएफ विधायक नौशाद सिद्दीकी ने डॉ. बनर्जी को याद करते हुए कहा कि पूर्व उपाध्यक्ष चर्चा में रहना पसंद नहीं करते थे।
उन्होंने रामपुरहाट के एक कॉलेज में बांग्ला विभाग के प्रमुख के तौर पर डॉ. बनर्जी के योगदान को याद किया, जहां उन्होंने कई छात्रों को पढ़ाया था।
अपने पूर्व सहयोगी की मौत के बारे में तृणमूल विधायक शोभनदेब चट्टोपाध्याय ने कहा, ‘‘मुझे मीडिया से पता चला है कि कथित तौर पर डॉ. आशीष बनर्जी को उनकी मौत से एक दिन पहले धमकी दी गई थी, लेकिन मैं व्यक्तिगत रूप से उस दावे या कथित धमकी की प्रकृति की पुष्टि नहीं कर सकता।’’
चट्टोपाध्याय ने कहा कि उन्हें डॉ. बनर्जी के किसी भी अनैतिक या आपराधिक आचरण के बारे में जानकारी नहीं थी।
तृणमूल विधायक ने कहा, ‘‘उनकी मौत को लेकर उठे सवालों की निष्पक्ष जांच की ज़रूरत है।’’
राज्य के मंत्री एवं भाजपा विधायक शंकर घोष ने कहा कि पूर्व उपाध्यक्ष की अचानक मौत अप्रत्याशित थी। घोष ने याद किया कि उन्हें डॉ. बनर्जी के साथ काम करने का मौका मिला था, जब वह (डॉ. बनर्जी) विधानसभा की विशेषाधिकार समिति की अध्यक्षता कर रहे थे।
भाषा सुरेश नरेश
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