कोलकाता, 10 सितंबर (भाषा) पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बृहस्पतिवार को यादवपुर विश्वविद्यालय के वामपंथी रुझान वाले शिक्षकों और छात्रों पर अभूतपूर्व हमला बोलते हुए कहा कि परिसर में ‘राष्ट्र विरोधी ताकतों’ का समर्थन करने वाले लोगों का ‘सख्त इलाज’ किये जाने की जरूरत है।
अधिकारी पश्चिम बंगाल विश्वविद्यालय और कॉलेज (प्रशासन एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 का बचाव कर रहे थे, जिसे राज्य विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान पेश किया गया और सदस्यों ने 171 - 15 मतों से इसे पारित कर दिया।
यह विधेयक सरकार को राज्य सरकार के कुल आठ विश्वविद्यालयों में शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों का तबादला करने का अधिकार देता है जिसके तहत एक राज्य विश्वविद्यालय से दूसरे राज्य विश्वविद्यालय में तबादला किया जा सकेगा।
अधिकारी ने सरकारी सेवा की शर्तों और प्रस्तावित तबादला व्यवस्था से ‘‘नाखुश’’ लोगों पर तीखा तंज कसते हुए उनसे नौकरी छोड़ने को कहा।
उन्होंने कहा, ‘‘जिन लोगों को सरकारी नौकरियों की इन शर्तों से काफी परेशानी है, वे नौकरी छोड़ने के लिए स्वतंत्र हैं। कंधे पर झोला लटकाइए, पूर्णकालिक कार्यकर्ता बन जाइए और गणशक्ति (माकपा का मुखपत्र) बेचिए। कभी-कभार हाथ में टिन का डिब्बा लेकर न्यू मार्केट इलाके में घूमते हुए चंदा भी इकट्ठा कर सकते हैं।’’
उन्होंने जोर देकर कहा, ‘‘जो लोग नियुक्ति देते हैं, उन्हें नियुक्ति की शर्तें तय करने का अधिकार भी होता है। नियुक्त किए गए लोगों को ऐसा कोई अधिकार नहीं है।’’
तबादले के प्रावधान के पीछे के तर्क के बारे में अधिकारी ने कहा कि शिक्षकों और कर्मचारियों को नए या कमजोर विश्वविद्यालयों में तैनात किया जा सकता है, ताकि इन संस्थानों को मजबूत किया जा सके।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बंगाल ऐसी तबादला नीति लागू करने वाला पहला राज्य नहीं है। उन्होंने कहा कि कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में पहले से ही ऐसा प्रावधान मौजूद है।
किशनजी और फलस्तीन से जुड़े नारों तथा लिखावट का विशेष रूप से जिक्र करते हुए अधिकारी ने कहा, ‘‘यादवपुर में कला संकाय की दीवारों पर ‘किशनजी, लाल सलाम’ जैसे नारे लिखे दिखाई देते हैं। उस व्यक्ति ने 1,000 से अधिक निर्दोष लोगों और अर्धसैनिक बलों के जवानों की हत्या की थी। ‘फ्री फलस्तीन’ भी लिखा जा रहा है। हम प्रफुल्ल चाकी, खुदीराम, मातंगिनी हाजरा और श्यामा प्रसाद मुखर्जी की धरती पर ऐसी चीजों को होने की अनुमति नहीं देंगे।’’
अधिकारी ने कहा कि यादवपुर विश्वविद्यालय (जेयू) को केंद्र और राज्य सरकार से 1,300 करोड़ रुपये का अनुदान मिलेगा, लेकिन अगर वहां ‘भारत तेरे टुकड़े होंगे’ का नारा लिखा जाएगा तो ‘हम उनके टुकड़े-टुकड़े कर देंगे’।’’
पश्चिम बंगाल विश्वविद्यालय एवं कॉलेज (प्रशासन और विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 को राज्य मंत्रिमंडल ने आठ सितंबर को मंजूरी दी थी।
अधिकारियों ने बताया कि इसमें 2017 के मौजूदा कानून की धारा 14ए में एक नया प्रावधान जोड़ने का प्रस्ताव था, जिसके तहत जरूरत पड़ने पर शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों का एक विश्वविद्यालय से दूसरे विश्वविद्यालय में तबादला किया जा सके।
अधिकारियों ने कहा कि इस प्रावधान के तहत कुलाधिपति को राज्य सरकार से परामर्श के बाद एक विश्वविद्यालय के कर्मचारी को दूसरे विश्वविद्यालय में स्थानांतरित करने का अधिकार होगा, जब ऐसा कदम प्रशासनिक उद्देश्यों के लिए आवश्यक माना जाए।
यह विधेयक उच्च शिक्षा मंत्री जगन्नाथ चट्टोपाध्याय ने विधानसभा के विशेष सत्र के दौरान पेश किया।
यह पूछे जाने पर कि मौजूदा कानून में संशोधन की जरूरत क्यों पड़ी, अधिकारी ने पहले कहा था, ‘‘यह जरूरी है। ऐसी वास्तविक हकीकतें हैं जिसके कारण इस विधेयक की आवश्यकता पड़ी है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ कई अनुभवी प्रोफेसरों को नए विश्वविद्यालयों में भेजा जाएगा। वे इन विश्वविद्यालयों को यह तय करने में मार्गदर्शन देंगे कि बुनियादी ढांचा कैसा होना चाहिए, कक्षाएं किस तरह संचालित की जाएं और संस्थानों को उत्कृष्टता के केंद्र में कैसे बदला जाए।’’
मुख्यमंत्री ने कहा था कि इन ‘अनुभवी शिक्षकों’ को झाड़ग्राम और कूचबिहार जैसे स्थानों पर स्थापित नए विश्वविद्यालयों में स्थानांतरित किया जाएगा। इससे विश्वविद्यालयों के बीच मानव संसाधनों का आदान-प्रदान सुनिश्चित होगा।
भाषा संतोष नरेश
नरेश