तिरुवनंतपुरम, 10 सितंबर (भाषा) केरलम के मुख्यमंत्री वी डी सतीशन ने बृहस्पतिवार को राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) की एक कार्यशाला में राज्य की महिला विधायकों के साथ किए गए कथित व्यवहार की निंदा करते हुये कहा कि हिंदी थोपना और गैर-हिंदी भाषी राज्यों से आए प्रतिनिधियों को डराना-धमकाना बेहद निंदनीय है।
केरलम की महिला विधायकों के एक समूह ने दो दिन पहले फरीदाबाद में एनसीडब्ल्यू की ओर से आयोजित कार्यशाला को उसके खत्म होने से पहले ही छोड़ दिया था। उन्होंने विरोध जताते हुए कहा था कि कार्यक्रम में ज्यादातर हिंदी में बात की जा रही थी, जिसे समझने में उन्हें कठिनाई हो रही थी।
सतीशन ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि भारत की ताकत विविधता में एकता में निहित है, जहां अलग-अलग भाषाएं, संस्कृतियां और पहचान देश के ताने-बाने को समृद्ध करती हैं।
उन्होंने लिखा, “हमारे संस्थापकों ने एक ऐसे भारत की कल्पना की थी, जिसकी ताकत एकरूपता से नहीं, बल्कि विविधता में एकता से आएगी। एक ऐसा संघ, जहां अलग-अलग भाषाएं, संस्कृतियां और पहचान देश के ताने-बाने को कमजोर करने के बजाय उसे समृद्ध करेंगी।”
सतीशन ने कहा, “भारत विविध भाषाई परंपराओं का एक संघ है, न कि कोई एकरूप इकाई। हमारे राष्ट्रीय मंचों की पहचान आपसी सम्मान, तालमेल और संवैधानिक समानता से होनी चाहिए, न कि भाषा थोपने से।”
उन्होंने कहा, “हमारी विविधता भारतीय एकता के लिए चुनौती नहीं है। यह इसकी वास्तविक नींव है।
एनसीडब्ल्यू ने फरीदाबाद में महिला विधायकों के लिए दो दिवसीय दक्षता विकास कार्यशाला का आयोजन किया था।
केरलम विधानसभा की उपाध्यक्ष शानिमोल उस्मान, प्रदेश सरकार में मंत्री बिंदु कृष्णा और केए तुलसी, विधायक केके रेमा, फातिमा तहलिया, उमा थॉमस, विद्या बालकृष्णन और उषा विजयन राज्य प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा थीं।
विधायकों ने आरोप लगाया कि एनसीडब्ल्यू की अध्यक्ष विजया रहाटकर उनके विरोध के बावजूद चुप रहीं। उन्होंने दावा किया कि उत्तर भारत की कुछ महिला विधायकों ने चिल्लाकर कहा कि हिंदी राष्ट्रीय भाषा है और चर्चा सिर्फ हिंदी में ही होगी।
केरलम की महिला विधायकों ने कहा कि आयोजन स्थल पर बाद में ‘जय श्रीराम’ और ‘भारत माता की जय’ जैसे नारे लगाए गए।
भाषा पारुल रंजन
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