नयी दिल्ली, 10 सितंबर (भाषा) दिल्ली उच्च न्यायालय के न्यायाधीश वी. कामेश्वर राव ने बृहस्पतिवार को कहा कि नैतिक और निडर बार के बिना स्वतंत्र न्यायपालिका काम नहीं कर सकती।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने न्यायमूर्ति वी. कामेश्वर राव को पटना उच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश नियुक्त किए जाने पर विदाई दी।
इस अवसर पर आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए न्यायमूर्ति राव ने कहा कि पीठ (न्यायाधीश) और बार (अधिवक्ता वर्ग) एक-दूसरे के विरोधी संस्थान नहीं हैं, बल्कि न्याय प्रशासन में साझेदार हैं। उन्होंने कहा कि संविधान के सभी सिद्धांत अदालतों तक इसलिए पहुंचे क्योंकि किसी न किसी अधिवक्ता ने उनके पक्ष में खड़े होकर दलील देने का साहस किया।
दिल्ली उच्च न्यायालय की ओर से आयोजित विदाई समारोह में कई न्यायाधीश और न्यायमूर्ति राव के परिवार के सदस्यों के अलावा कई वरिष्ठ अधिवक्ता शामिल हुए।
अपने संबोधन में न्यायमूर्ति राव ने कहा कि वकील असाधारण काम करते हैं, जहां उनका शांत समर्पण और मेहनत ‘‘किसी की जिंदगी बदल देती है’’, जिसे पहचान मिलनी चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘‘एक अधिवक्ता और न्यायाधीश के रूप में मेरे जीवन के पिछले 34 वर्षों ने इस विश्वास को और मजबूत किया है कि बेंच और बार विरोधी संस्थान नहीं हैं, बल्कि न्याय प्रशासन में साझेदार हैं। स्वतंत्र न्यायपालिका नैतिक और निडर बार के बिना काम नहीं कर सकती।’’
दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश डी. के. उपाध्याय ने कहा कि न्यायमूर्ति राव की न्याय के उद्देश्य के प्रति प्रतिबद्धता अतुलनीय रही है और उन्होंने संस्थान की प्रशासनिक जिम्मेदारियों को भी प्रभावी ढंग से निभाया।
भाषा शफीक नरेश
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