नयी दिल्ली, 10 सितंबर (भाषा) बैंक कर्मचारी संगठनों ने पांच दिन का कार्यदिवस लागू करने समेत अन्य लंबित मांगों को लेकर शुक्रवार को हड़ताल पर जाने का फैसला किया है। इससे सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में नकदी निकासी और जमा समेत अन्य सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।
हड़ताल के कारण देश के कई हिस्सों में बैंकिंग सेवाएं चार दिन तक प्रभावित रह सकती हैं। 11 सितंबर को शुक्रवार है और इसके बाद के दो दिन बैंकों में अवकाश हैं। कुछ राज्यों में 14 सितंबर को गणेश चतुर्थी के कारण अवकाश रहेगा।
इस बीच, सार्वजनिक क्षेत्र के ज्यादातर बैंकों ने अपने ग्राहकों को हड़ताल के कारण कामकाज पर संभावित असर की जानकारी दी है।
भारतीय स्टेट बैंक ने ग्राहकों को जारी सूचना में कहा, ‘‘हमने हड़ताल के दिन शाखाओं और कार्यालयों का सामान्य कामकाज सुनिश्चित करने के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं की हैं, लेकिन हड़ताल के कारण बैंक का कामकाज प्रभावित होने की आशंका है।’’
सात बैंक कर्मचारी और अधिकारी संगठनों के संयुक्त मंच यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (यूएफबीयू) ने 28 सितंबर से तीन दिन की राष्ट्रव्यापी हड़ताल की भी चेतावनी दी है। यह हड़ताल छमाही लेखाबंदी के समय होगी।
बैंकों में पांच दिन कार्यदिवस की व्यवस्था लागू करने का मुद्दा काफी समय से लंबित है। मुख्य श्रम आयुक्त के समक्ष हुई सुलह बैठकों में भी सरकार बैंकों में पांच दिन के कामकाज की व्यवस्था लागू करने को लेकर कोई प्रतिबद्धता नहीं दे सकी।
बैंक अधिकारियों का शीर्ष संगठन ऑल इंडिया बैंक ऑफिसर्स कनफेडरेशन के महासचिव रूपम रॉय ने कहा कि सरकार और बैंक प्रबंधन के रुख के कारण कर्मचारी संगठनों को आंदोलन के लिए मजबूर होना पड़ा है।
नेशनल कनफेडरेशन ऑफ बैंक एम्प्लॉइज के महासचिव एल चंद्रशेखर ने कहा, ‘‘केंद्र और राज्य सरकारों के कार्यालयों, भारतीय रिजर्व बैंक, भारतीय जीवन बीमा निगम, सामान्य बीमा निगम, नाबार्ड और कई अन्य संस्थानों में पहले से ही पांच दिन का कार्यदिवस लागू है। शेयर बाजार, मुद्रा बाजार और विदेशी मुद्रा बाजार भी पांच दिन काम करते हैं।’’
बैंक कर्मचारियों की अन्य लंबित मांगों में पेंशन का अद्यतन और उसमें सुधार, सभी पेंशनधारकों के लिए महंगाई भत्ते की एक समान गणना व्यवस्था तथा राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) के तहत आने वाले कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना में जाने का विकल्प देना शामिल हैं।
भाषा रमण अजय
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