कोलकाता, 10 सितंबर (भाषा) पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने बृहस्पतिवार को दुर्गा पूजा समितियों से कहा कि अगर मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के पुस्तक स्टॉल में त्योहार का वर्णन ‘दुर्गा पूजा’ के बजाय ‘शारदोत्सव’ के रूप में किया जाता है, तो उन्हें पंडालों के बाहर स्टॉल लगाने की अनुमति न दी जाए। मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि ऐसा करने से त्योहार के धार्मिक स्वरूप को कमतर किया जा रहा है।
राज्य विधानसभा में अधिकारी ने वामपंथ के कुछ वर्गों पर ‘सनातन धर्म’ और भगवा रंग को चुनिंदा तरीके से निशाना बनाने का आरोप लगाया और पूजा समितियों से ऐसे पुस्तक स्टॉल के संचालन पर रोक लगाने का आग्रह किया।
उन्होंने कहा, ‘‘कुछ प्रोफेसर, जो खुद को वामपंथी कहते हैं, ‘सनातनियों’ के खिलाफ हमला कर रहे हैं। वे चुनिंदा तरीके से भगवा रंग को निशाना बना रहे हैं। मैं सभी दुर्गा पूजा समितियों से कहना चाहूंगा कि अगर वामपंथी अपने लगाए गए पुस्तक स्टॉल पर ‘दुर्गा पूजा’ की जगह ‘शारदोत्सव’ (शरद ऋतु का उत्सव) लिखते हैं, तो ऐसे पुस्तक स्टॉल लगाने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।’’
माकपा और उससे जुड़े संगठन हर साल दुर्गा पूजा पंडालों के पास पुस्तक स्टॉल लगाते हैं, जहां वे वामपंथी साहित्य, पार्टी के प्रकाशन समेत अन्य पुस्तकें बेचते हैं। वे त्योहार के माध्यम से लोगों तक पहुंच बनाने का भी प्रयास करते हैं।
वर्ष 1954 में माकपा से जुड़े ऐसे पहले पुस्तक स्टॉल की स्थापना पार्क सर्कस में वरिष्ठ वामपंथी नेता मुजफ्फर अहमद की पहल पर की गई थी।
यह परंपरा विशेष रूप से महत्वपूर्ण हो गई क्योंकि पार्टी कार्यकर्ताओं और स्थानीय नेताओं को आमतौर पर धार्मिक आयोजनों में सीधे भाग लेने से हतोत्साहित किया जाता था।
वाम मोर्चे की 2011 में हार के बाद ऐसे लाल कपड़े वाले बुक स्टॉल कम हो गए, हालांकि कुछ चुनिंदा जगहों पर अब भी इनका आयोजन किया जाता है।
अधिकारी ने कहा कि उनकी आपत्ति त्योहार के दौरान पुस्तकें बेचने को लेकर नहीं है, बल्कि ‘शारदोत्सव’ शब्द के इस्तेमाल के जरिये दुर्गा पूजा के धार्मिक स्वरूप को नकारने या कमतर दिखाने की कोशिश से है।
उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि भविष्य में ‘सनातन धर्म’ या भगवा रंग के विरोध पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
अधिकारी ने कहा, ‘‘यह सही समय है कि इस धरती पर वामपंथियों द्वारा बोए गए उन बीजों को उखाड़ फेंका जाए, जिसने नक्सलवाद जैसे विचारों को जन्म दिया।’’
माकपा के राज्य सचिव मोहम्मद सलीम ने अधिकारी के बयान को ‘फासीवादी हमला’ करार दिया और कहा कि संवैधानिक पद के कथित दुरुपयोग के जरिये ‘धार्मिक भावनाएं भड़काने’ की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘ये फासीवादी हमले हैं, जिनका उद्देश्य उन बजरंगियों को उकसाना है जो रात में पार्टी कार्यालयों में आग लगाते हैं और संस्थानों के परिसरों में तोड़फोड़ करते हैं।’’
‘शारदोत्सव’ शब्द के इस्तेमाल का बचाव करते हुए सलीम ने कहा कि पूरे एशिया में शरद ऋतु के उत्सव मनाए जाते हैं और ऐतिहासिक रूप से उनका संबंध कृषि प्रधान समाजों से रहा है।
उन्होंने कहा, ‘‘इसी वजह से रवींद्रनाथ ठाकुर ने बंगाल में ‘पौष मेला’, ‘वर्षा वरण’ और ‘वसंत उत्सव’ जैसे आयोजनों की शुरुआत की थी।’’
सलीम ने कहा कि माकपा ऐसे किसी भी प्रतिबंध को लागू करने के प्रयास का विरोध करेगी, लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि पार्टी अपने पुस्तक स्टॉल आयोजकों के लिए कोई केंद्रीय निर्देश जारी नहीं करेगी।
भाषा संतोष रंजन
रंजन