बेंगलुरु, 10 सितंबर (भाषा) कर्नाटक की कांग्रेस सरकार ने आदेश दिया है कि राज्य में राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री या राज्यपाल की मौजूदगी वाले कार्यक्रमों को छोड़कर अन्य सभी सरकारी कार्यक्रमों में राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के केवल शुरुआती दो अंतरे गाए जाएं।
यह आदेश कर्नाटक में सरकारी कार्यक्रमों और समारोहों में ‘वंदे मातरम’ के गायन या वादन को लेकर राज्य मंत्रिमंडल के फैसले के बाद आया है।
जनवरी में केंद्रीय गृह मंत्रालय ने निर्देश दिया था कि जब किसी कार्यक्रम में ‘वंदे मातरम’ और राष्ट्रगान ‘जन गण मन’, दोनों का गायन किया जाए, तो राष्ट्रगान से पहले ‘वंदे मातरम’ के सभी छह अंतरे गाए जाएं।
हालांकि, कांग्रेस कार्य समिति ने 19 अगस्त को ‘वंदे मातरम’ को लेकर 1937 के अपने प्रस्ताव का पालन करने का फैसला किया, जिसके तहत पार्टी के कार्यक्रमों में राष्ट्रीय गीत के केवल शुरुआती दो अंतरे गाए जाएंगे।
यह फैसला तब लिया गया, जब भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने कांग्रेस नेताओं पर पार्टी कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम’ का पूरा संस्करण न गाकर उसका अपमान करने का आरोप लगाया।
कर्नाटक सरकार के आदेश की प्रस्तावना में कहा गया है कि भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन के दौरान ‘वंदे मातरम’ ने राष्ट्रवाद, एकता और देशभक्ति की भावना को बढ़ावा देने में अहम भूमिका निभाई थी।
इसमें कहा गया है कि केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राष्ट्रीय गीत के आधिकारिक संस्करण और विभिन्न सरकारी एवं सार्वजनिक कार्यक्रमों में इसके गायन या वादन के लिए प्रोटोकॉल को लेकर दिशा-निर्देश जारी किए थे।
आदेश में कहा गया है कि इन दिशा-निर्देशों में राष्ट्रीय गीत के वादन और सामूहिक गायन के अवसरों को निर्धारित किया गया है।
राज्य सरकार ने कहा कि संबंधित दिशा-निर्देशों का मकसद कर्नाटक में सरकारी कार्यक्रमों और समारोहों में अवसर की प्रकृति के अनुसार ‘वंदे मातरम’ के गायन या वादन के समय एकरूपता, गरिमा और सही प्रोटोकॉल बनाए रखना है।
आदेश में कहा गया है, “प्रस्तावना में बताई गई बातों को ध्यान में रखते हुए यह आदेश दिया जाता है कि राज्य सरकार की ओर से आयोजित कार्यक्रमों में ‘वंदे मातरम’ के शुरुआती दो अंतरे ही गाए जाएं। हालांकि, राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और राज्यपाल की मौजूदगी वाले कार्यक्रमों में यह नियम लागू नहीं होगा।”
भाषा पारुल माधव
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