नयी दिल्ली, 10 सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बृहस्पतिवार को मुंबई विश्वविद्यालय के उस फैसले को चुनौती देने वाली याचिका खारिज कर दी जिसमें उससे संबद्ध कई विधि महाविद्यालयों में छात्रों की प्रवेश क्षमता 50 प्रतिशत तक कम करने का निर्णय लिया गया था।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों की पीठ ने मुंबई उच्च न्यायालय के उस आदेश को बरकरार रखा जिसमें ‘लॉयर्स फाउंडेशन’ द्वारा दायर याचिका को खारिज कर दिया गया था।
हालांकि, शीर्ष अदालत ने याचिकाकर्ता पर उच्च न्यायालय द्वारा लगाए गए एक लाख रुपये के जुर्माने को रद्द कर दिया, क्योंकि उन्होंने अदालत को भरोसा दिलाया कि वे भविष्य में ऐसी ‘बेकार’ याचिकाएं दायर नहीं करेंगे।
पीठ ने कहा, ‘‘याचिकाकर्ता के इस आश्वासन को देखते हुए कि वे ऐसी बेकार याचिकाएं दायर नहीं करेंगे, हम नरमी बरत रहे हैं और एक लाख रुपये तक जुर्माने वाले मुंबई उच्च न्यायालय के आदेश में बदलाव कर रहे हैं।’’
याचिका में उच्च न्यायालय के समक्ष विश्वविद्यालय के उस फैसले पर सवाल उठाया गया था जिसके तहत 2026-27 शैक्षणिक वर्ष के लिए लगभग 45 विधि संस्थानों में तीन-वर्षीय और पांच-वर्षीय एलएलबी पाठ्यक्रम में छात्रों की प्रवेश क्षमता 50 प्रतिशत कम कर दी गई थी।
इसमें तर्क दिया गया था कि विश्वविद्यालय ने कॉलेजों द्वारा प्रस्ताव सौंपे जाने के बावजूद यह फैसला लिया था।
भाषा वैभव नरेश
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