लखनऊ, 10 सितंबर (भाषा) बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख मायावती द्वारा बृहस्पतिवार को पार्टी से 'पूरी तरह मुक्त' किये गये उनके भतीजे आकाश आनंद का राजनीतिक सफर बेहद अप्रत्याशित घटनाक्रमों और उतार—चढ़ावों से भरा रहा है।
दिसंबर 2023 में मायावती द्वारा अपना राजनीतिक उत्तराधिकारी घोषित किये गये आकाश को पार्टी प्रमुख ने बृहस्पतिवार को दल से परोक्ष रूप से निष्कासित करते हुए उन्हें 'पूरी तरह मुक्त' कर दिया।
2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में पहली बार अपनी बुआ मायावती के साथ चुनावी रैलियों में नजर आये आकाश का अब तक का सियासी सफर बेहद उतार—चढ़ाव भरा रहा और इस दौरान वह कभी अर्श तो कभी फर्श पर नजर आये।
नोएडा और गुरुग्राम से शुरुआती शिक्षा लेने के बाद इंग्लैंड की यूनिवर्सिटी आफ प्लेमाउथ से एमबीए की पढ़ाई करने वाले आकाश ने भारत लौटकर शुरू में अपने पारिवारिक कारोबार को संभाला और कॉरपोरेट क्षेत्र की कुछ कम्पनियों में भी काम किया।
राजनीति में आने के बाद आकाश ने बसपा के युवा चेहरे के तौर पर तेजी से पहचान बनायी और सोशल मीडिया पर खासे सक्रिय रहने के कारण युवाओं से उनका जुड़ाव भी तेजी से बढ़ा।
मायावती के भाई और पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष आनंद कुमार के बेटे आकाश ने पार्टी में सियासी पायदान भी तेजी से चढ़े और पार्टी मुखिया ने जून 2019 में उन्हें बसपा का राष्ट्रीय समन्वयक नियुक्त कर दिया। आकाश के राजनीतिक सफर का चरमोत्कर्ष तब आया जब बसपा की सर्वेसर्वा मायावती ने वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले दिसंबर 2023 में सभी को चौंकाते हुए उन्हें अपना उत्तराधिकारी घोषित कर दिया।
हालांकि आकाश के नाम दर्ज यह उपलब्धि ज्यादा दिनों तक नहीं टिकी और 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान सीतापुर में दिये गये एक भाषण को लेकर उठे विवाद के बाद मायावती ने उसी साल मई में आकाश को 'अपरिपक्व' बताते हुए उन्हें उत्तराधिकारी के पद के साथ—साथ राष्ट्रीय समन्वयक के ओहदे से भी हटा दिया।
हालांकि तीन ही महीने बाद अगस्त 2024 में मायावती ने आकाश की पार्टी में जिम्मेदारियों को बहाल कर दिया मगर उसके बाद भी पार्टी के संगठनात्मक फैसलों के तहत उनके पद और जिम्मेदारियों में बदलाव और उतार—चढ़ाव का दौर जारी रहा।
कभी मायावती के उत्तराधिकारी रहे आकाश के कॅरियर में सबसे बड़ा उतार उस वक्त आया जब उन्हें तीन मार्च 2025 को अनुशासनहीनता के आरोपों में पार्टी से ही निष्कासित कर दिया गया।
डिजिटल मीडिया और सोशल मीडिया पर बसपा को आधुनिक रूप से पेश करने और डॉक्टर भीमराव आंबेडकर तथा कांशीराम के विचारों के अध्ययन, युवाओं के सशक्तिकरण तथा सामाजिक समता से जुड़े मुद्दों में खास दिलचस्पी रखने वाले आकाश की किस्मत का सितारा एक बार फिर बुलंद हुआ और अपने निष्कासन के दो महीने बाद ही मायावती ने उन्हें मई 2025 में एक बार फिर बसपा का राष्ट्रीय समन्वयक नियुक्त कर दिया।
आकाश के लिये सबसे मुश्किल दौर तब आया जब मायावती की नजर उनके ससुर और बसपा के पूर्व राज्यसभा सदस्य अशोक सिद्धार्थ पर टेढ़ी हुई और उन्होंने उन्हें पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में गत दो अगस्त को निष्कासित कर दिया। उसके बाद मायावती ने गत तीन सितंबर को पार्टी की एक बैठक में आकाश को भी राष्ट्रीय समन्वयक के पद सहित पार्टी की सभी अहम जिम्मेदारियों से मुक्त कर दिया।
मायावती ने बुधवार को 'एक्स' पर एक संदेश में सिद्धार्थ पर आकाश को बरगलाने का आरोप लगाते हुए कहा कि अगर उन्हें अपने दामाद के राजनीतिक भविष्य की चिंता है तो वह सियासत से पूरी तरह संन्यास ले लें, तभी आकाश को उनकी जिम्मेदारियां देने पर विचार किया जाएगा।
हालांकि सिद्धार्थ ने बृहस्पतिवार की सुबह राजनीति से पूरी तरह संन्यास लेने का ऐलान कर दिया। मगर इसके कुछ ही देर बाद बसपा प्रमुख मायावती ने सिद्धार्थ से जुड़ी अपनी बुधवार की पोस्ट को आकाश की तरफ से ‘रीपोस्ट’ नहीं किए जाने पर सवाल उठाए और 'एक्स' पर एक पोस्ट में कहा कि ऐसा नहीं करने से यह लगता है कि सिद्धार्थ और आकाश दोनों को पार्टी और उसके आंदोलन में कम और अपने निजी तथा पारिवारिक स्वार्थ का मोह ज्यादा है।
मायावती ने कहा कि ऐसे में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि आकाश 'डबल माइंड' होकर बसपा और बहुजन आंदोलन का भला कैसे कर सकते हैं?
उन्होंने कहा, ''अगर आकाश आनन्द पार्टी में अब स्वतंत्र रहना चाहते हैं तो वे स्वतंत्र हैं। अर्थात ऐसे में अब इनको पार्टी से पूरे तौर से मुक्त कर दिया गया है।''
हालांकि मायावती ने आकाश को मुक्त करने को निष्कासन की संज्ञा नहीं दी लेकिन माना जा रहा है कि यह निष्कासन की कार्रवाई ही है।
भाषा सलीम मनीषा नरेश
नरेश