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उपकरों, शुल्कों के जरिये जुटाई गई राशि का निर्धारित कोषों में नहीं जाना चिंताजनक: पीएसी

नयी दिल्ली, 10 सितंबर (भाषा) संसद की लोक लेखा समिति (पीएसी) ने नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट की पृष्ठभूमि में विभिन्न उपकरों के जरिये जुटाई गई राशि के इस्तेमाल को लेकर चिंता जताई है।

कैग की रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार ने वित्त वर्ष 2024-25 में विभिन्न उपकरों और शुल्कों से जुटाए गए 9,222 करोड़ रुपये चार निर्धारित कोषों में स्थानांतरित नहीं किए।

कांग्रेस महासचिव के. सी. वेणुगोपाल की अध्यक्षता वाली समिति की बैठक में कुछ सदस्यों ने इस मुद्दे पर केंद्रीय वित्त मंत्रालय की ओर से दिए गए स्पष्टीकरण पर भी आपत्ति जताई और कहा कि उपकर एवं शुल्क के रूप में जुटाई गई राशि का इस्तेमाल केवल उन्हीं उद्देश्यों के लिए किया जाना चाहिए, जिनके लिए उन्हें लगाया गया है।

वित्त वर्ष 2024-25 की लेखा परीक्षा के अनुसार, विभिन्न उपकरों और शुल्कों से जुटाए गए कुल 9,222 करोड़ रुपये सरकार के चार निर्धारित आरक्षित कोषों में स्थानांतरित नहीं किए गए।

ये निष्कर्ष इस साल प्रकाशित कैग की एक रिपोर्ट का हिस्सा हैं।

बीते मंगलवार को हुई पीएसी की बैठक के विवरण से अवगत सूत्रों ने बताया कि वेणुगोपाल ने कहा कि इस मुद्दे को संसदीय समिति ने अगस्त 2023 में संसद में पेश अपनी रिपोर्ट में पहले ही उठाया था।

रिपोर्ट में उपकर संग्रह की राशि और अवधि का वैज्ञानिक आकलन करने, निर्धारित उद्देश्यों की पूर्ति का मूल्यांकन करने के लिए समय-समय पर समीक्षा करने और उपकर से प्राप्त राशि को नियमित रूप से आरक्षित कोषों में जमा करने की सिफारिश की गई थी।

सूत्रों ने कांग्रेस नेता के हवाले से कहा कि पीएसी के निर्देशों की अनदेखी करना संसद का अपमान है।

सांसदों ने यह भी कहा कि उपकर या शुल्क के रूप में जुटाई गई राशि का इस्तेमाल हमेशा उसी उद्देश्य के लिए होना चाहिए, जिसके लिए उसे वसूला गया है, न कि सरकार के बजटीय घाटे को पूरा करने के लिए इसका उपयोग होना चाहिए।

वेणुगोपाल ने कहा कि यह राशि करदाताओं, मध्यम वर्ग और गरीबों समेत समाज के विभिन्न वर्गों से जुटाई गई है। सूत्रों ने यह जानकारी दी।

आरक्षित कोषों का गठन विशिष्ट उद्देश्यों के लिए वैधानिक प्रावधानों या कार्यकारी आदेशों के तहत किया जाता है। इन्हें भारत की संचित निधि से बजटीय सहायता, अनुदान, अंशदान तथा उपकर और शुल्क से प्राप्त राशि के जरिये वित्त पोषित किया जाता है।

वित्त वर्ष 2024-25 में केंद्र सरकार ने उपकर, अधिभार और शुल्क के जरिए 3,89,220 करोड़ रुपये जुटाए, जो उसके सकल कर राजस्व का 10.25 प्रतिशत था।

कैग ने पाया कि उस वर्ष सबसे बड़ा अंतर प्रधानमंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा निधि (पीएमएसएसएन) से संबंधित था। इसमें 21,085 करोड़ रुपये के संग्रह के मुकाबले केवल 14,439 करोड़ रुपये स्थानांतरित किए गए, जिससे 6,646 करोड़ रुपये की कमी रह गई।

लेखा परीक्षक ने तेल उद्योग विकास कोष (ओआईडीएफ) को लेकर भी आपत्ति जताई। रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 1974-75 से तेल उद्योग उपकर के जरिये कुल 3,12,782 करोड़ रुपये जुटाए गए, लेकिन 1991-92 तक तेल उद्योग विकास बोर्ड को केवल 902 करोड़ रुपये ही स्थानांतरित किए गए और उसके बाद 2023-24 तक कोई राशि स्थानांतरित नहीं की गई।

ओआईडीएफ को पहली बार 2024-25 में परिचालित किया गया। हालांकि, लेखा परीक्षकों ने इसमें भी 201 करोड़ रुपये कम स्थानांतरित किए जाने की बात कही। 31 मार्च 2025 तक 2,94,150 करोड़ रुपये भारत की संचित निधि में ही पड़े थे।

लेखा परीक्षक में यह भी कहा गया कि कुल 844.93 करोड़ रुपये की जमा शेष राशि वाले 10 आरक्षित कोष और 21 जमा खाते लगातार तीन या उससे अधिक वित्त वर्षों से निष्क्रिय पड़े थे।

वित्त मंत्रालय ने लेखा परीक्षक के कुछ निष्कर्षों पर असहमति जताते हुए कहा कि स्वास्थ्य एवं शिक्षा उपकर के हस्तांतरण के आकलन में माध्यमिक एवं उच्चतर शिक्षा कोष (एमयूएसके) को शामिल नहीं किया गया है।

मंत्रालय ने कहा कि वित्त वर्ष 2024-25 में 84,339 करोड़ रुपये के संग्रह के मुकाबले तीन निर्धारित कोषों में कुल 86,020 करोड़ रुपये स्थानांतरित किए गए। इस तरह 1,681 करोड़ रुपये अधिक स्थानांतरित किए गए।

मंत्रालय का कहना था कि एमयूएसके में अधिक राशि के आवंटन से पीएमएसएसएन में हुई कमी की भरपाई हो गई।

भाषा हक नरेश

नरेश