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टीवीके ने स्टालिन के वीडियो संबोधन की आलोचना की, मीसा हिरासत का सबूत मांगा

चेन्नई, 10 सितंबर (भाषा) तमिलनाडु में सत्तारूढ़ तमिलगा वेत्री कषगम (टीवीके) ने बृहस्पतिवार को द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) प्रमुख एम. के. स्टालिन के वीडियो संबोधन पर पलटवार करते हुए उनसे अपने साथ हुए अत्याचारों के दावों के समर्थन में सबूत देने की मांग की।

स्टालिन ने बृहस्पतिवार को करीब 10 मिनट का एक वीडियो संबोधन जारी किया, जिसमें उन्होंने कड़े कानून ‘मीसा’ के तहत अपनी हिरासत और जेल में बिताए समय का विस्तार से जिक्र किया।

टीवीके ने इसे शासन से जुड़े प्रमुख मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए किया गया ‘‘सुनियोजित प्रयास’’ करार दिया और कहा कि स्टालिन ने अपने दावों के समर्थन में कोई प्रमाण पेश नहीं किया।

पार्टी की आईटी शाखा ने यह भी सवाल उठाया कि क्या ‘‘जेल में यातना झेलने वाले संघर्षशील नेता’’ की उनकी छवि ‘‘टूट गई है।’’

आपातकाल (1975-77) के दौरान आंतरिक सुरक्षा कानून (मीसा) के तहत स्टालिन की हिरासत को लेकर बढ़ते राजनीतिक तनाव के बीच टीवीके ने उनसे उनकी हिरासत के सबूत पेश करने की मांग की। पार्टी ने उनके वीडियो संबोधन को ‘‘गिरती राजनीतिक छवि’’ को बचाने की कोशिश बताया और कहा कि इसके समर्थन में कोई आधिकारिक दस्तावेज नहीं दिया गया।

यह विवाद हाल ही में तमिलनाडु विधानसभा में हुए एक घटनाक्रम के बाद शुरू हुआ। मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने मीसा का जिक्र करते हुए अपने भाषण के दौरान हाथ से जबड़े की ओर इशारा किया था, जिसकी उनके सहयोगियों और राजनीतिक विरोधियों दोनों ने कड़ी आलोचना की थी। बाद में विजय ने स्पष्ट किया था कि यह इशारा अनजाने में हुआ था।

हालांकि, द्रमुक सदस्यों ने इस इशारे पर कड़ी आपत्ति जताई और आरोप लगाया कि विजय ने 1976 में मीसा के तहत हिरासत के दौरान पुलिस की कथित यातना से स्टालिन की जबड़े की हड्डी टूटने का मजाक उड़ाया।

इसके जवाब में स्टालिन ने बृहस्पतिवार को करीब 10 मिनट का एक वीडियो संदेश जारी किया, जिसमें उन्होंने जेल में अपने संघर्ष का विस्तार से जिक्र किया। उन्होंने टीवीके सरकार द्वारा कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की आलोचना की और सदन की मर्यादा बनाए रखने की अपील की।

टीवीके की आईटी शाखा ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया चैनल पर प्रतिक्रिया देते हुए स्टालिन के वीडियो संबोधन की तकनीकी प्रस्तुति और उसमें किए गए ऐतिहासिक दावों, दोनों पर सवाल उठाए और कहा कि इसमें प्राथमिक दस्तावेजी साक्ष्यों का अभाव है।

उसने अपने आधिकारिक ‘एक्स’ खाते पर कहा, ‘‘हालांकि यह वीडियो काफी लंबा है, लेकिन इसमें किए जा रहे, आपातकाल के दौरान राजनीतिक हिरासत से जुड़े ऐतिहासिक दावों की पुष्टि के लिए कोई आधिकारिक ‘हिरासत प्रति’ न तो पेश की गई है और न ही दिखाई गई है।’’

टीवीके की आईटी शाखा ने आरोप लगाया कि वीडियो जारी करने का समय मौजूदा नीतिगत बहसों और सवालों से जनता का ध्यान भटकाने के उद्देश्य से चुना गया।

उसने सवाल किया, ‘‘क्या वर्षों से बन रही यह बेचैनी इस वजह से बढ़ती जा रही है कि ‘जेल में यातना झेलने वाले संघर्षशील नेता’ की झूठी छवि टूट गई है?’’

भाषा गोला मनीषा

मनीषा