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भारत-एसएसीयू प्रस्तावित तरजीही व्यापार समझौते से द्विपक्षीय निवेश बढ़ेगा: दक्षिण अफ्रीकी उच्चायुक्त

नयी दिल्ली, 10 सितंबर (भाषा) भारत में दक्षिण अफ्रीका के उच्चायुक्त अनिल सूकलाल ने कहा कि भारत और दक्षिणी अफ्रीकी सीमा शुल्क संघ (एसएसीयू) के बीच प्रस्तावित तरजीही व्यापार समझौते (पीटीए) से दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार एवं निवेश बढ़ाने में मदद मिलेगी।

सूकलाल ने कहा कि भारत के साथ दक्षिण अफ्रीका का संबंध अब व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी, कौशल और विकास सहयोग सहित कई क्षेत्रों में व्यापक साझेदारी में बदल गया है।

उन्होंने कहा कि प्रस्तावित पीटीए में दोनों देशों के बीच व्यापार एवं निवेश को उल्लेखनीय रूप से बढ़ाने की ‘‘अपार संभावनाएं’’ हैं। इससे कारोबारियों के लिए नए अवसर पैदा होंगे और दोनों अर्थव्यवस्थाओं को आगे बढ़ने में मदद मिलेगी।

भारत और एसएसीयू ने 12 अगस्त को पीटीए के लिए बातचीत शुरू करने के वास्ते संदर्भ शर्तों (टीओआर) पर हस्ताक्षर किए थे। टीओआर में व्यापार समझौते पर बातचीत के व्यापक मानदंड तय किए जाते हैं।

दक्षिणी अफ्रीकी सीमा शुल्क संघ (एसएसीयू) के पांच सदस्य बोत्सवाना, इस्वातिनी (पूर्व में स्वाजीलैंड), लेसोथो, नामीबिया और दक्षिण अफ्रीका हैं।

मुक्त व्यापार समझौते के विपरीत पीटीए में कुछ निर्धारित उत्पादों की सूची पर शुल्क में रियायत दी जाती है। पीटीए में आम तौर पर सेवाओं के व्यापार को शामिल नहीं किया जाता है।

भारत-दक्षिण अफ्रीका व्यापार मंच के अनुसार, प्रस्तावित समझौते से खनिज, विनिर्माण, कृषि, उर्वरक, खाद्य सुरक्षा, सेवाओं तथा कुशल एवं विकास सहयोग जैसे क्षेत्रों में बाजार तक बेहतर पहुंच और नए अवसर मिलने की उम्मीद है।

उन्होंने कहा कि भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच द्विपक्षीय व्यापार फिलहाल 18.01 अरब अमेरिकी डॉलर का है। दोनों देश मुख्य रूप से खरीदार-विक्रेता संबंध से आगे बढ़कर आर्थिक संबंधों को और मजबूत करना चाहते हैं।

ब्रिक्स बिजनेस काउंसिल के सदस्य सांसद विक्रमजीत सिंह साहनी ने कहा कि प्रस्तावित पीटीए से दोनों देशों के बीच व्यापार और निवेश को बड़ा बढ़ावा मिल सकता है।

साहनी ने कहा, ‘‘यह समझौता भारत और दक्षिण अफ्रीका के बीच आर्थिक साझेदारी को अगले स्तर तक ले जाने में बदलावकारी कदम साबित हो सकता है।’’

उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी और नेल्सन मंडेला की साझा विरासत पर आधारित दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों को अब और मजबूत आर्थिक साझेदारी में बदलना चाहिए।

आयोजकों के अनुसार, प्रस्तावित पीटीए से विनिर्माण, प्रौद्योगिकी, कृषि और सेवाओं में सहयोग बढ़ाने के साथ संयुक्त निवेश और आपूर्ति श्रृंखलाओं के बेहतर एकीकरण के अवसर पैदा हो सकते हैं।

भारत-दक्षिण अफ्रीका व्यापार मंच का आयोजन भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) और दक्षिण अफ्रीका के व्यापार, उद्योग एवं प्रतिस्पर्धा विभाग ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से इतर किया था।

ब्रिक्स उभरती अर्थव्यवस्थाओं का एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय समूह है। यह विकासशील देशों की आवाज को मजबूत करने और एक निष्पक्ष वैश्विक व्यवस्था को आकार देने के लिए काम करता है।

इस साल का शिखर सम्मेलन 12 और 13 सितंबर को नयी दिल्ली में होगा।

भाषा निहारिका

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