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स्टालिन ने मुख्यमंत्री विजय के जबड़े के इशारे पर दी प्रतिक्रिया, ‘मीसा’ के समय की पीड़ा याद की

चेन्नई, 10 सितंबर (भाषा) द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) अध्यक्ष एम. के. स्टालिन ने तमिलनाडु विधानसभा में कड़े कानून ‘मीसा’ से जुड़ी टिप्पणियों के दौरान मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय द्वारा किए गए ‘‘जबड़े के इशारे’’ पर बृहस्पतिवार को अपनी चुप्पी तोड़ी और आपातकाल के दौरान जेल में अपने साथ हुई गंभीर शारीरिक ज्यादती को याद किया।

विजय द्वारा सरकारिया आयोग की रिपोर्ट का हवाला देते हुए दशकों पुराने भ्रष्टाचार के आरोप उठाए जाने पर स्टालिन ने उनकी आलोचना की और इन आरोपों को ‘‘राजनीति से प्रेरित झूठ’’ करार दिया। उन्होंने कहा कि ये आरोप उन लोगों द्वारा फैलाए गए, जो पूर्व मुख्यमंत्री एम. करुणानिधि के प्रति लंबे समय से नाराजगी रखते थे।

मीसा (आंतरिक सुरक्षा रखरखाव अधिनियम) के दौर के अपने इतिहास का उल्लेख करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री स्टालिन ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में स्वीकार किया कि मीसा के इतिहास को लेकर विजय की बात सही थी। उन्होंने आपातकाल के दौरान हुए दमन का जिक्र करते हुए बताया कि 31 जनवरी 1976 को करुणानिधि द्वारा मीसा कानून का विरोध किए जाने के बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था।

स्टालिन ने जेल में अपने साथ हुए कठोर व्यवहार का विस्तार से उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि उनके साथ मारपीट की गई, जिसके कारण उनके सहयोगी चिट्टी बाबू की मौत हो गई और उन्हें खुद भी चोटें आईं।

स्टालिन ने वीडियो में कहा, ‘‘मुझे एहसास है कि हाल ही में संपन्न विधानसभा सत्र के दौरान हुई कुछ घटनाओं से तमिल लोगों और हमारे भाइयों में गुस्सा और असंतोष पैदा हुआ है। चूंकि मेरा जेल का इतिहास इस विवाद का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, इसलिए मैं इसे स्पष्ट करना चाहता हूं। विजय भाई, आपने जो कहा वह सच है, यह झूठ नहीं है। आपातकाल के दौरान हमारे नेता कलैग्नार (करुणानिधि) ने इसके विरोध में मरीना बीच पर एक विशाल सभा की थी और मीसा की कड़ी आलोचना की थी।’’

इसके बाद तत्कालीन केंद्र सरकार ने 31 जनवरी 1976 को द्रमुक सरकार को बर्खास्त कर दिया। इसके तुरंत बाद पुलिस मीसा के तहत उन्हें गिरफ्तार करने के लिए उनके गोपालपुरम स्थित आवास पर पहुंच गई।

स्टालिन ने कहा, ‘‘उस दिन मैं घर पर नहीं था, क्योंकि मैं प्रचार अभियान के लिए गया हुआ था। हमारे नेता ने पुलिस से कहा, ‘मेरा बेटा प्रचार के लिए गया है। वह कल लौट आएगा। उसके आने के बाद मैं खुद आपको बुलाऊंगा, आप आकर उसे गिरफ्तार कर लेना।’ अगले दिन जब मैं लौटा तो उन्होंने खुद पुलिस को बुलाकर मुझे गिरफ्तार करने के लिए कहा था।’’

उल्लेखनीय है कि सात सितंबर को विधानसभा में तीखी बहस के दौरान मुख्यमंत्री विजय ने मीसा और स्टालिन की हिरासत का जिक्र करते हुए अपने जबड़े को हाथ से पकड़ने जैसा इशारा किया था।

इसके बाद विपक्षी दल द्रमुक ने तुरंत विरोध जताया, जिससे सदन में हंगामा शुरू हो गया।

द्रमुक वर्षों से यह कहती रही है कि आपातकाल के दौरान 1976 में मीसा के तहत गिरफ्तारी के बाद स्टालिन को चेन्नई केंद्रीय कारागार के अंदर पुलिस की बर्बर यातना का सामना करना पड़ा था, जिससे उनकी जबड़े की हड्डी टूट गई थी।

विवाद को शांत करने के लिए विजय ने जल्द ही स्पष्टीकरण जारी किया। आठ सितंबर को उन्होंने कहा कि उनकी भाव-भंगिमा अनैच्छिक, आकस्मिक और स्वत: अभिव्यक्ति थी।

मुख्यमंत्री ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा, ‘‘मेरी भाव-भंगिमा एक स्वत: अभिव्यक्ति थी। मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि यह किसी भी तरह से जानबूझकर नहीं किया गया था। इसलिए मैं विनम्रतापूर्वक अनुरोध करता हूं कि इसे किसी की व्यक्तिगत भावनाओं को ठेस पहुंचाने के इरादे से किए गए कृत्य के रूप में न देखा जाए।’’

राजनीतिक विवाद के जवाब में जारी करीब 10 मिनट के वीडियो संदेश में स्टालिन ने कहा कि उनका टूटा हुआ जबड़ा इतिहास का एक अमिट ‘‘बहादुरी का निशान’’ है।

स्टालिन ने उस मुश्किल वक्त को याद करते हुए कहा, ‘‘मैंने जेल में बहुत अत्याचार सहे। हमें ऐसी जगह बंद करके रखा गया था, जहां कुष्ठ रोग के मरीजों को रखा जाता था। एक छोटे से कमरे में 10 लोगों को ठूंस दिया जाता था। उसी कमरे में हम सभी को पेशाब करना पड़ता था। वहां बहुत दुर्गंध थी और हमें वहीं सोना पड़ता था। हमें रात में सोने की अनुमति नहीं थी। पुलिस हमें डंडों से पीटती थी और जूतों से कुचलती थी।’’

स्टालिन ने कहा, ‘‘मेरे प्रिय भाई और सांसद चिट्टी बाबू, जो मेरे साथ थे, उनकी पिटाई के कारण जेल में ही मौत हो गई। उनकी मार से मेरे जबड़े की हड्डी टूट गई थी। आपने भी इसे दिखाने के लिए अपने जबड़े पर हाथ रखा था और वह सही था। आज भी उस मारपीट के निशान मेरे शरीर पर हैं।’’

उन्होंने द्रमुक के संस्थापक और पूर्व मुख्यमंत्री अरिग्नार अन्ना का नाम लेते हुए कहा कि ‘‘दमन के खिलाफ लड़ना और उसके परिणामों को झेलना द्रमुक की विरासत में उसी दौर से शामिल है।’’

स्टालिन ने सरकारिया आयोग से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोपों को भी स्पष्ट रूप से खारिज किया।

स्टालिन ने विधायी बहस के दौरान इन मामलों को राजनीतिक रंग दिए जाने पर सवाल उठाया और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों से सदन की मर्यादा बनाए रखने का आह्वान किया।

इस बीच, वीसीके के संस्थापक और अध्यक्ष टी. तिरुमावलवन ने तमिलनाडु विधानसभा में स्टालिन की ओर मुख्यमंत्री की ‘‘भाव-भंगिमा’’ को लेकर बृहस्पतिवार को उनकी आलोचना की। उन्होंने राज्य के कानून मंत्री निर्मल कुमार से मीसा के दौर से संबंधित अपनी टिप्पणियां वापस लेने की भी मांग की।

भाषा

गोला मनीषा

मनीषा