( रोरी मैक्कार्थी, डरहम यूनिवर्सिटी )
डरहम (ब्रिटेन), 10 सितंबर (द कन्वरसेशन) इजराइल दशकों से कब्जे वाले वेस्ट बैंक में अपनी बस्तियों का निर्माण करता आ रहा है। लेकिन ब्रिटेन का बस्तियों से जुड़े सामान के आयात पर नया प्रतिबंध पिछले चार वर्षों में निर्माण गतिविधियों में हुई वृद्धि की प्रतिक्रिया है। वर्ष 2024 में अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (आईसीजे) की परामर्श वाली राय में इन बस्तियों को अवैध करार दिया गया था और इन्हें रोकने की बात कही गई थी।
सबसे अधिक ध्यान हाल में यरूशलम के बाहरी इलाके में नई बस्ती परियोजना ‘ई1’ के निर्माण की दिशा में उठाए गए कदमों पर है। इसकी योजना 1999 में बनाई गई थी, लेकिन पिछले करीब एक साल में इसमें काफी प्रगति हुई है। ई1 परियोजना वेस्ट बैंक के भौगोलिक स्वरूप में बड़ा बदलाव ला सकती है।
मौजूदा योजना के तहत इस बस्ती में हजारों आवासीय इकाइयों के अलावा व्यावसायिक प्रतिष्ठान और क्षेत्रीय सेवाओं की व्यवस्था भी शामिल है। इस परियोजना से बड़ी इजराइली बस्ती माले अदुमीम को पूर्वी यरूशलम से जोड़ने वाला एक नया शहरी क्षेत्र तैयार होगा।
अंतरराष्ट्रीय समुदाय लंबे समय से ई1 परियोजना को तीन प्रमुख कारणों से संवेदनशील मानता रहा है।
पहला कारण यह है कि इससे पूर्वी यरूशलम वेस्ट बैंक के बाकी हिस्सों से अलग-थलग पड़ जाएगा, जिसमें रामल्ला और बेथलहम जैसे प्रमुख फलस्तीनी शहर शामिल हैं। यह इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि भविष्य में किसी दो-राष्ट्र समाधान के तहत पूर्वी यरूशलम को फलस्तीनी राज्य की प्रस्तावित राजधानी माना जाता है।
दूसरा कारण है कि ई1 वेस्ट बैंक के सबसे संकरे हिस्से से होकर गुजरती है, जिससे क्षेत्र के उत्तर और दक्षिण हिस्सों के बीच संपर्क बाधित हो सकता है। इस तरह वेस्ट बैंक का विभाजन भविष्य के फलस्तीनी राज्य की स्थापना के प्रयासों को कमजोर कर सकता है।
तीसरा कारण यह है कि ई1 के निर्माण से फलस्तीनियों का विस्थापन होगा। इसमें खान अल-अहमर समुदाय के लोग भी शामिल हैं, जिन्हें इजराइली अधिकारियों ने नई बस्ती के निर्माण से पहले मई 2026 में हटाने का आदेश दिया था।
इजराइली सरकार के मंत्रियों ने स्पष्ट रूप से कहा है कि ई1 परियोजना भविष्य के फलस्तीनी राष्ट्र की संभावना को खत्म कर देगी। सितंबर 2025 में ई1 पर प्रगति की घोषणा करते हुए प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा था, ‘‘हम अपने उस वादे को पूरा करेंगे कि कोई फलस्तीनी राष्ट्र नहीं होगा।’’
इजराइल के वित्त मंत्री बेजेलेल स्मोट्रिच ने भी कहा था कि ई1 परियोजना ‘‘फलस्तीनी राष्ट्र के विचार को दफना देगी।’’
कई वर्षों तक लंबित रहने के बाद हाल के समय में ई1 परियोजना में तेजी आई है। अगस्त 2025 में इस स्थल पर 3,400 से अधिक आवासीय इकाइयों के निर्माण को अंतिम मंजूरी दी गई थी। इसके बाद अगस्त 2026 में ई1 के दक्षिणी हिस्से में 1,200 आवासीय इकाइयों के निर्माण के लिए पहली निविदा जारी की गई। निविदा जमा करने की अंतिम तारीख 19 अक्टूबर है, जो 27 अक्टूबर को होने वाले इजराइली चुनाव से ठीक पहले की है।
ब्रिटेन का आयात प्रतिबंध उन कंपनियों को रोकने के उद्देश्य से उठाया गया कदम माना जा रहा है, जो ई1 के निर्माण में शामिल हो सकती हैं। कनाडा, फ्रांस, आयरलैंड और स्पेन समेत कई अन्य देशों ने भी इसी तरह के कदमों का समर्थन किया है।
----- बढ़ती अंतरराष्ट्रीय चिंता -----
बस्तियों से जुड़े सामान पर प्रतिबंध इजराइल की गतिविधियों को लेकर बढ़ती अंतरराष्ट्रीय चिंता को दर्शाता है। वर्ष 1967 के छह दिवसीय युद्ध में कब्जे में लिए गए क्षेत्रों में अब 7 लाख से अधिक इजराइली नागरिक रह रहे हैं, जबकि अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत कब्जे वाले क्षेत्रों में बस्तियां अवैध मानी जाती हैं।
इजराइली मानवाधिकार समूह ‘पीस नाउ’ के अनुसार, 2022 के बाद से 102 से अधिक नई बस्तियों को मंजूरी दी गई है, जिनमें से ज्यादातर वेस्ट बैंक के अंदरूनी हिस्सों में हैं।
इजराइली सेना अक्सर नई चौकियों को समर्थन देती है और इजराइली सरकार बस्तियों की स्थापना के लिए पर्याप्त आर्थिक सहायता उपलब्ध कराती है।
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, जनवरी 2023 से वेस्ट बैंक में हमलों और आवाजाही पर प्रतिबंधों के कारण 6,400 से अधिक फलस्तीनी विस्थापित हुए हैं। इनमें से कम से कम 2,500 लोग अकेले 2026 में विस्थापित हुए।
इसके अलावा, 2024 के अंत से उत्तरी वेस्ट बैंक में इजराइली सैन्य अभियानों के दौरान शरणार्थी शिविरों से 30,000 से अधिक फलस्तीनी विस्थापित हुए हैं।
वेस्ट बैंक पर इजराइल का बढ़ता नियंत्रण उसकी उस व्यापक नीति का हिस्सा है, जिसके तहत वह अपनी सीमाओं के विस्तार की कोशिश कर रहा है। यह संघर्ष को केवल नियंत्रित करने की पुरानी रणनीति से बदलाव को दर्शाता है।
ये नए कदम अक्टूबर 2023 के हमास हमलों के बाद उठाए गए हैं, जिनमें 1,200 से अधिक इजराइली मारे गए थे और 250 लोगों को बंधक बनाया गया था। इसके बाद गाजा में शुरू हुए इजराइली सैन्य अभियान में 70,000 से अधिक फलस्तीनी मारे गए और गाजा पट्टी को भारी नुकसान पहुंचा।
युद्ध शुरू होने के बाद इजराइल ने हिज्बुल्ला के खिलाफ बफर जोन बनाते हुए दक्षिणी लेबनान में कुछ इलाकों पर कब्जा किया है। इसके अलावा 2024 के अंत में बशर अल-असद सरकार के पतन के बाद उसने सीरिया में भी अपनी मौजूदगी बढ़ाई है। गाजा में इजराइल अब कम से कम 60 प्रतिशत क्षेत्र पर नियंत्रण कर चुका है और वहां तीन नई सैन्य बस्तियां बनाने पर विचार कर रहा है।
इजराइल के दक्षिणपंथी राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्विर ने हाल में फिर यह संभावना जताई कि इजराइल गाजा के 20 लाख फलस्तीनियों को बाहर निकालने की कोशिश कर सकता है। गाजा की सीमा से लगे मिस्र और वेस्ट बैंक की सीमा से लगे जॉर्डन ने फलस्तीनियों के बड़े पैमाने पर निर्वासन के खतरे पर गंभीर चिंता जताई है।
ब्रिटेन सरकार की बस्ती विस्तार के खिलाफ कार्रवाई और अन्य देशों द्वारा उठाए गए समान कदम इस विस्तारवादी नीति को रोकने के नए प्रयास के संकेत माने जा रहे हैं।
द कन्वरसेशन मनीषा वैभव
वैभव