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चंडीगढ़ अदालत ने मजीठिया और अन्य लोगों को मुख्यमंत्री मान की पत्नी पर रिश्वत के आरोप लगाने से रोका

चंडीगढ़, नौ सितंबर (भाषा) चंडीगढ़ की एक अदालत ने पूर्व न्यायमूर्ति रणजीत सिंह, शिअद नेता बिक्रम सिंह मजीठिया और कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा को पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान की पत्नी डॉ. गुरप्रीत कौर के खिलाफ रिश्वत मांगने के आरोपों से जुड़ी किसी भी ‘‘असत्यापित मानहानिकारक सामग्री’’ को प्रकाशित या प्रसारित करने से अस्थायी रूप से रोक दिया है।

अदालत ने हालांकि इस चरण में उन पोस्ट, वीडियो और तस्वीरों को हटाने का आदेश देने से इनकार कर दिया, जिनका वादी ने उल्लेख किया था।

अदालत ने कहा कि पहले प्रतिवादियों को नोटिस जारी करना जरूरी है और उन्हें सुने बिना ऐसी राहत देना मुकदमे में मांगी गई मुख्य राहत देने के समान होगा।

दीवानी मामलों के न्यायाधीश (जूनियर डिवीजन) डॉ. प्रिकिशित ने गुरप्रीत कौर की ओर से दायर याचिका पर मंगलवार को यह आदेश पारित किया।

अदालत ने मुकदमे और रोक संबंधी आवेदन पर प्रतिवादियों को 30 सितंबर के लिए नोटिस जारी किया है।

कौर ने सोशल मीडिया पर उनके खिलाफ कथित मानहानिकारक, झूठे और असत्यापित बयान जारी करने पर रोक लगाने तथा ऐसी सामग्री हटाने का निर्देश देने का अनुरोध किया था।

कौर के अनुसार, सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति रणजीत सिंह ने 20 अगस्त को आरोप लगाया था कि कौर ने दुष्कर्म के एक आरोपी से पांच करोड़ रुपये की मांग की थी। उन्होंने कहा कि मजीठिया ने एक सितंबर को चंडीगढ़ में संवाददाता सम्मेलन के जरिए उनके खिलाफ अभियान चलाया, जिसकी रिकॉर्डिंग बाद में सोशल मीडिया पर साझा की गई।

अदालत ने कहा कि कौर प्रथम दृष्टया अपना मामला साबित करने में सफल रही हैं ।

अदालत ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और व्यक्ति की प्रतिष्ठा के अधिकार के बीच संतुलन जरूरी है।

अदालत ने आदेश दिया कि आगे के आदेश तक तीनों प्रतिवादी रिश्वत मांगने के आरोप से संबंधित असत्यापित मानहानिकारक सामग्री सोशल मीडिया या किसी अन्य माध्यम से प्रकाशित, प्रसारित या साझा नहीं कर सकेंगे।

भाषा राखी प्रशांत

प्रशांत