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सीट बेल्ट कानून का पालन सुनिश्चित करना विधि प्रवर्तन एजेंसियों की जिम्मेदारी: न्यायालय

नयी दिल्ली, नौ सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को कहा कि गाड़ी चलाते समय सीट बेल्ट लगाने को अनिवार्य बनाने वाले पर्याप्त कानून मौजूद हैं और इनका पालन सुनिश्चित करना विधि प्रवर्तन एजेंसियों की जिम्मेदारी है।

प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने यह टिप्पणी की, जो गाड़ियों में सीट बेल्ट पहनना अनिवार्य करने के निर्देश दिए जाने संबंधी याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

याचिकाकर्ता के वकील ने पीठ से कहा कि अगर सीट बेल्ट पहनने के नियम का पालन किया जाए, तो सड़क हादसों में होने वाली कई मौतों और चोटों को रोका जा सकता है।

उन्होंने कहा कि कानून के बावजूद, फैंसी सीट कवर या अन्य बदलावों की वजह से कई गाड़ियों में सीट बेल्ट काम नहीं करती।

पीठ ने कहा, ‘‘सीट बेल्ट को लेकर कानून बहुत साफ़ है। सवाल इसके लागू होने का है। हम यह कैसे सुनिश्चित कर सकते हैं कि देश का हर नागरिक और हर चालक इसका पालन करे?’’

न्यायालय ने याचिकाकर्ता से कहा कि वह इस मामले पर अपने सुझाव सक्षम प्राधिकार को भेजे।

इसने कहा, ‘‘नियमों का पालन सुनिश्चित करना कानून प्रवर्तन एजेंसियों का काम है।’’

याचिकाकर्ता के वकील ने तर्क दिया कि लोगों की लापरवाही और कानून का कमजोर क्रियान्वयन देश भर में सड़क दुर्घटनाओं में गंभीर चोटों और यहां तक ​​कि मौतों का कारण बनता है।

पीठ ने कहा कि गाड़ी चलाते समय सीट बेल्ट लगाने सहित सड़क सुरक्षा उपायों से जुड़े पर्याप्त कानून मौजूद हैं।

इसने कहा कि लोगों द्वारा कानून का पालन न करना या कानून लागू करने वाली एजेंसियों का नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ़ उचित कार्रवाई न कर पाना, असल में कानून-व्यवस्था बनाए रखने का मामला है।

पीठ ने याचिका का निपटारा करते हुए याचिकाकर्ता को याचिका की प्रति संबंधित प्राधिकार को भेजने की अनुमति दे दी, ताकि अधिकारी उसके द्वारा दिए गए सुझावों पर विचार कर सकें।

भाषा नेत्रपाल पवनेश

पवनेश