चंडीगढ़, आठ सितंबर (भाषा) पंजाब स्थित संगरूर के 47 वर्षीय एक व्यक्ति की कथित आत्महत्या के बाद विवाद पैदा हो गया है। उनके परिजनों का आरोप है कि छह सितंबर को एक कार्यक्रम में वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा से उनके इलाके में 'चिट्टा' (मादक पदार्थ) की ‘‘बेरोक-टोक’’ आपूर्ति के बारे में सवाल पूछने पर माफी मांगने के लिए कहा गया और जातिसूचक शब्द कहे गए।
परिजनों के मुताबिक, दिरबा गांव के रहने वाले गुलजार सिंह की सोमवार रात कथित तौर पर जहर खाने से मौत हो गई। उनका एक वीडियो है, जिसमें उन्होंने वित्त मंत्री से सवाल पूछने की बात कही थी, जिसके बाद विपक्षी पार्टियों ने चीमा और मुख्यमंत्री भगवंत मान के इस्तीफे की मांग की है।
गुलजार के भतीजे करणवीर सिंह ने बताया कि जब उन्होंने चीमा के सामने यह मुद्दा उठाया, तो गांव के कुछ स्थानीय लोगों ने उन्हें कार्यक्रम स्थल से बाहर ले जाकर माफी मांगने के लिए मजबूर किया, जिसके बाद उन्होंने जहर खा लिया। करणवीर ने कहा, ‘‘हमें न्याय चाहिए।’’
पंजाब पुलिस ने आत्महत्या की घटना के सिलसिले में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक रैंक के अधिकारी की अगुवाई में एक विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया है।
प्राथमिकी के मुताबिक, गुलजार के परिवार की शिकायत पर पांच ग्रामीणों -- बलजीत सिंह, सुखदेव सिंह, विक्की सिंह, गोना सिंह और बलजिंदर कौर -- के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 108 (आत्महत्या के लिए उकसाना) और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
गुलजार के बेटे लखविंदर सिंह ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि जब पुलिस पूछताछ के लिए उनके घर आई थी, तो आरोपियों ने उनके पिता का अपमान किया और उन पर जातिसूचक टिप्पणियां कीं।
सोशल मीडिया पर गुलजार के आखिरी पलों का एक कथित वीडियो का तेजी से प्रसार होने के बाद, विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर भगवंत मान के नेतृत्व वाली आम आदमी पार्टी सरकार को घेरा।
शिरोमणि अकाली दल के नेता बिक्रम सिंह मजीठिया ने आरोप लगाया कि गुलजार को आत्महत्या करने के लिए मजबूर किया गया।
उन्होंने कहा, ‘‘दिरबा के गुलजार सिंह ने हरपाल चीमा से मादक पदार्थ की समस्या के बारे में एक सवाल पूछा था, और आरोप है कि उन्हें आत्महत्या करने के लिए मजबूर कर दिया गया।’’
उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘उन्होंने एक जनसभा में हरपाल चीमा से उनके बेटे की मादक पदार्थ की लत के बारे में सवाल किया था और पूछा था कि इस समस्या को खत्म करने के लिए क्या किया जा रहा है। इसके बाद, उन्हें कथित तौर पर ऐसी हालत में पहुंचा दिया गया कि उन्हें सेल्फोस (कीटनाशक) खाने के लिए मजबूर होना पड़ा।’’
कांग्रेस की पंजाब इकाई के प्रमुख अमरिंदर सिंह राजा वडिंग ने कहा कि वह इस घटना से बहुत दुखी हैं।
वडिंग ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘एक पिता, जो अपने बेटे को नशे की लत से जूझते और अपने परिवार को बर्बाद होते देख रहा था, उसने आवाज उठाई और हरपाल चीमा से सवाल किया। उसे इतना अधिक परेशान और उस पर इतना दबाव डाला गया कि आखिरकार उसने आत्महत्या की कोशिश की।’’
कथित वीडियो में गुलजार सिंह को चीमा से उनके इलाके में मादक पदार्थ की उपलब्धता के बारे में सवाल करते हुए सुना जा सकता है।
गुलजार को यह कहते हुए सुना गया, ‘‘मेरी मौत के लिए सरपंच जिम्मेदार होंगे। मैंने 'चिट्टा' के बारे में सवाल किया था। मेरा बेटा इसका सेवन करता है। सब कुछ बिकता है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘चिट्टा बंद नहीं हुआ है।’’
गुलजार को पहले संगरूर के सिविल अस्पताल ले जाया गया और बाद में पटियाला के राजेंद्र अस्पताल ले जाया गया। इसके बाद उन्हें वापस संगरूर लाकर वहां के एक अस्पताल में भर्ती कराया गया, और फिर लुधियाना के एक निजी अस्पताल में ले जाया गया, जहां सोमवार रात उनकी मौत हो गई।
प्राथमिकी के मुताबिक, बलजीत ने 7 सितंबर को गुलजार को पंचायत में माफी मांगने के लिए बुलाया था। अपमान बर्दाश्त न कर पाने के कारण, उन्होंने जहरीली चीज खा ली।
मंगलवार शाम संगरूर में गुलजार का अंतिम संस्कार किया गया।
लखविंदर ने कहा कि उनके भाई को सरकारी नौकरी दी जाएगी और संगरूर में पत्रकारों को बताया कि परिवार इस मामले में पुलिस की कार्रवाई से संतुष्ट है।
शिअद प्रमुख सुखबीर सिंह बादल और कांग्रेस नेता सुखपाल सिंह खैरा एवं विजय इंदर सिंगला समेत विपक्ष की कई पार्टियों के नेताओं ने संगरूर का दौरा किया।
भाषा राखी प्रशांत
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