भुवनेश्वर, आठ सितंबर (भाषा) पुरी के 12वीं सदी के जगन्नाथ मंदिर ने तीन विशिष्ट नामों और पहचानों के लिए बौद्धिक संपदा संरक्षण हासिल किया है। एसजेटीए के एक बयान में मंगलवार को यह जानकारी दी।
श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) के मुख्य प्रशासक अरविंद पाढ़ी ने बयान में कहा कि ट्रेड मार्क रजिस्ट्री ने प्रकाशन के लिए पुरी मंदिर से जुड़े जिन नामों को मान्यता दी है, उनमें ‘श्री मंदिर’ (श्रेणी 19 और 45 में), ‘रत्न भंडार’ (श्रेणी 14 और 45 में) और ‘श्री नाहर’ (श्रेणी 19 में) शामिल हैं।
मंदिर प्रशासन ने पहले जगन्नाथ मंदिर और उसकी संस्कृति से जुड़े 29 नामों और सामग्रियों के संरक्षण के लिए आवेदन किया था। इनमें से एसजेटीए अब तक 11 को मान्यता दिलाने में सफल रहा है, जिनमें से तीन को मंगलवार को मान्यता मिली।
पाढ़ी ने कहा कि दूसरे चरण में ‘जगन्नाथ धाम’, ‘श्री क्षेत्र’, ‘महाप्रसाद’, ‘नीलचक्र’ और ‘कोइली वैकुंठ’ समेत पांच और आवेदनों को प्रकाशन के लिए स्वीकार कर लिया गया है।
उन्होंने कहा, ‘‘हम जगन्नाथ मंदिर से जुड़ी विशिष्ट आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और संस्थागत विरासत की रक्षा करना चाहते हैं और श्री मंदिर से करीबी रूप से जुड़े नामों और पहचानों के अनधिकृत या अनुचित व्यावसायिक इस्तेमाल को रोकना चाहते हैं।’’
पाढ़ी ने कहा कि एसजेटीए बाकी ट्रेडमार्क आवेदनों पर भी काम जारी रखेगा और जगन्नाथ मंदिर से जुड़ी पवित्र एवं विशिष्ट विरासत के लिए उचित बौद्धिक संपदा संरक्षण सुनिश्चित करने के सभी आवश्यक कदम उठाएगा।
इससे पहले, ‘गजपति महाराजा’ दिव्यसिंह देब की अध्यक्षता वाली श्री जगन्नाथ मंदिर प्रबंध समिति (एसजेटीएमसी) ने कहा था कि कुछ व्यक्ति और संगठन भगवान जगन्नाथ से जुड़े पवित्र नामों और प्रतीकों का व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए इस्तेमाल कर रहे हैं।
इस तरह के दुरुपयोग को रोकने के लिए एसजेटीएमसी ने जगन्नाथ परंपरा से निकटता से जुड़े शब्दों और प्रतीकों के लिए ट्रेडमार्क संरक्षण लेने का फैसला किया और मुख्य प्रशासक को पंजीकरण प्रक्रिया शुरू करने के लिए अधिकृत किया।
भाषा आशीष अविनाश
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