नयी दिल्ली, आठ सितंबर (भाषा) केंद्र सरकार ने मंगलवार को उच्चतम न्यायालय को बताया कि वह तीन सदस्यों वाली एक समिति बना रही है जो यह सुनिश्चित करने के लिए कानूनी ढांचा सुझाएगी कि दवा कंपनियां डॉक्टरों को लुभाने के लिए अनैतिक तरीकों का इस्तेमाल न करें।
सरकार ने दो महीने का समय मांगा, जिसके दौरान समिति अपनी रिपोर्ट सौंपेगी और उसे मंज़ूरी के लिए अदालत के सामने पेश किया जाएगा।
न्यायमूर्ति विक्रमनाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने ‘फेडरेशन ऑफ़ मेडिकल एंड सेल्स रिप्रेजेंटेटिव्स एसोसिएशंस ऑफ़ इंडिया’ और अन्य की याचिकाओं पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया।
इन याचिकाओं में मांग की गई थी कि जब तक कोई प्रभावी कानून नहीं बन जाता, तब तक उच्चतम न्यायालय दवा कंपनियों की अनैतिक विपणन गतिविधियों को नियंत्रित और विनियमित करने के लिए दिशानिर्देश तय करे।
केंद्र इस बात पर सहमत हुआ कि यह सुनिश्चित करने के लिए तंत्र को मजबूत करने की आवश्यकता है कि दवा कंपनियां किसी भी अनैतिक कार्य में शामिल न हों।
केंद्र की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि इस मामले में कई पहलू शामिल हैं, जिनसे अलग-अलग मंत्रालयों के तहत आने वाले कई विभाग जुड़े हैं।
मेहता ने कहा कि समिति दो महीने में अपनी रिपोर्ट सौंपेगी और सुझाव देगी कि इन फार्मा कंपनियों को नियमित करने के लिए किस तरह का कानूनी ढांचा लागू किया जा सकता है।
फेडरेशन की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता संजय पारिख ने कहा कि इस मामले में कुछ भी नया नहीं है और सरकार ने बस पुराने दिशा-निर्देशों को ‘कॉपी-पेस्ट’ कर उनका शीर्षक बदल दिया है।
पीठ ने कहा कि वह ऐसे आदेश जारी करेगी जिनसे समिति को मजबूती मिलेगी।
भाषा नेत्रपाल माधव
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