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रियल एस्टेट कंपनियां आवास परियोजनाएं विकसित करते समय वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाएं: अधिकारी

नयी दिल्ली, आठ सितंबर (भाषा) रियल एस्टेट कंपनियों को आवास परियोजनाएं विकसित करते समय वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाना चाहिए और इनमें हरित क्षेत्र, वर्षा जल संचयन, जल पुनर्चक्रण तथा सीवेज शोधन संयंत्र (एसटीपी) जैसी सुविधाओं का प्रावधान करना चाहिए। आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय की एक वरिष्ठ अधिकारी ने मंगलवार को यह बात कही।

उद्योग मंडल एसोचैम की ओर से आयोजित रियल एस्टेट सम्मेलन को संबोधित करते हुए मंत्रालय के तहत राजधानी विकास विभाग की सचिव डी. तारा ने रियल एस्टेट कंपनियों से दिल्ली मास्टर प्लान-2047 का लाभ उठाने को भी कहा।

उन्होंने बताया कि दिल्ली की भूमि पूलिंग नीति के तहत पहली परियोजना को मंजूरी मिल चुकी है और उम्मीद जताई कि अधिक से अधिक भूमि मालिक बुनियादी अवसंरचना विकास के मकसद से अपनी जमीन साझा करने के लिए आगे आएंगे।

मानसून के दौरान दिल्ली और गुरुग्राम में जलभराव पर चिंता जताते हुए तारा ने कहा कि रियल एस्टेट कंपनियां 100 करोड़ रुपये के अपार्टमेंट बना रही हैं, लेकिन सड़कें जलमग्न हो रही हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘सड़कें क्यों जलमग्न होती हैं? अगर हम अपने घरों का पानी और कचरा सड़कों पर डालेंगे तो सड़कें जलमग्न होंगी और गंदी भी होंगी।’’

सचिव ने सरकारी बुनियादी ढांचे में सुधार की जरूरत को स्वीकार किया, लेकिन रियल एस्टेट कंपनियों से अपने निर्माण कार्यों के वैज्ञानिक आधार पर भी ध्यान देने को कहा।

उन्होंने कहा, ‘‘आप केवल इमारतें और सड़कें बनाकर शहर में नहीं रह सकते। आपको पानी की जरूरत है और अगर हरित क्षेत्र नहीं होंगे तो पानी उपलब्ध नहीं रहेगा।’’

भाषा यासिर अजय

अजय