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जन सुराज पार्टी ने विधान परिषद चुनाव से पहले मतदाता सूची में हेराफेरी का आरोप लगाया

पटना, आठ सितंबर (भाषा) बिहार विधान परिषद की आठ सीट पर चुनाव से पहले जन सुराज पार्टी ने मंगलवार को आरोप लगाया कि सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के इशारे पर राज्य की मतदाता सूची में हेराफेरी की जा रही है।

यह आरोप पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता कुमार सौरभ ने एक संवाददाता सम्मेलन में लगाया। इस मौके पर पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष मनोज भारती भी मौजूद थे।

सौरभ ने कहा कि पार्टी इस मामले में भारत निर्वाचन आयोग को एक ज्ञापन सौंपेगी।

उन्होंने कहा, “कल हमारे प्रदेश अध्यक्ष के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल मुख्य निर्वाचन अधिकारी को ज्ञापन सौंपेगा। अगर सरकार मतदाता सूची में हेराफेरी करके चुनाव जीतना चाहती है तो फिर चुनाव कराने की औपचारिकता ही समाप्त कर दे।”

सौरभ ने दावा किया कि जिन आठ निर्वाचन क्षेत्रों के विधान परिषद सदस्यों (एमएलसी) का कार्यकाल नवंबर में समाप्त हो रहा है, वहां की मतदाता सूची में सरकार के निर्देश पर नाम जोड़े जा रहे हैं।

जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि हाल में बांकीपुर विधानसभा उपचुनाव में अपनी पहली चुनावी सफलता हासिल करने वाली उनकी पार्टी इन सभी आठ सीट पर चुनाव लड़ेगी।

सौरभ ने कहा, “नाम गुप्त तरीके से जोड़े जा रहे हैं, जबकि अधिकारी दावा कर रहे हैं कि आगामी चुनावों को देखते हुए मतदाता सूची पिछले हफ्ते ही ‘फ्रीज’ कर दी गई थी।”

उन्होंने आरोप लगाया कि मतदाता सूची में नामों के दोहराव समेत कई अन्य विसंगतियां भी हैं, जिन्हें निर्वाचन आयोग को अपने विशेष सॉफ्टवेयर की मदद से दूर करना चाहिए।

सौरभ ने कहा, “निर्वाचन आयोग को सार्वजनिक रूप से बताना चाहिए कि उसने खामियों को दूर करने के लिए क्या सुधारात्मक कदम उठाए हैं।”

प्रदेश अध्यक्ष भारती ने कहा, “विधान परिषद चुनावों के लिए अलग मतदाता सूची रखने का कोई औचित्य नहीं है। अगर किसी क्षेत्र में स्नातकों या शिक्षकों की पहचान करनी हो, तो मतदाता सूची में एक अतिरिक्त कॉलम जोड़ा जा सकता है। वहीं जिन सीट पर पंचायत और शहरी निकायों के निर्वाचित प्रतिनिधि मतदान करते हैं, वहां किसी अतिरिक्त प्रक्रिया की जरूरत नहीं है।”

विधान परिषद में कुछ सदस्य विधानसभा के निर्वाचित सदस्यों की ओर से चुने जाते हैं, जबकि कुछ सीट पर स्नातक, शिक्षक तथा पंचायत एवं नगर निकायों के निर्वाचित प्रतिनिधि मतदान करते हैं।

इसके अलावा, 75 सदस्यीय बिहार विधान परिषद में कुछ सदस्यों को राज्य सरकार की अनुशंसा पर राज्यपाल द्वारा मनोनीत किया जाता है।

भाषा

कैलाश पारुल

पारुल