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माकपा विजयन और उनके परिवार के खिलाफ ईडी जांच पर रुख स्पष्ट करे : प्रेमचंद्रन

कोल्लम, आठ सितंबर (भाषा) रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी (आरएसपी)के सांसद एन.के. प्रेमचंद्रन ने मंगलवार को दावा किया कि प्रवर्तन निदेशालय को केरलम के पूर्व मुख्यमंत्री पिनराई विजयन, उनकी बेटी वीणा टी और दामाद पी.ए. मोहम्मद रियास से जुड़े भ्रष्टाचार के स्पष्ट सबूत मिले हैं। उन्होंने इसी के साथ विजयन की मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) से इस पूरे मामले पर अपना रुख स्पष्ट करने की मांग की।

प्रेमचंद्रन ने आरोप लगाया कि विजयन के खिलाफ जांच देश में वाम राजनीति के इतिहास में एक अभूतपूर्व घटना है, जिसमें एक वामपंथी नेता भ्रष्टाचार मामले की जांच का सामना कर रहा है।

आरएसपी सांसद ने कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा उजागर किया गया कथित भ्रष्टाचार तो महज ‘बानगी’ है। उन्होंने माकपा से इस मामले में अपना रुख स्पष्ट करने की मांग की।

प्रेमचंद्रन ने कहा, ‘‘यह तो महज बानगी है। अभी तो बहुत कुछ सामने आना बाकी है। माकपा इस मामले में वीणा और विजयन का बचाव करती रही है और अब उसे इस मुद्दे पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए।’’

उन्होंने कहा कि ईडी ने केरलम पुलिस से उन तीनों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने को कहा था और यह मांग पुख्ता साक्ष्यों के आधार पर की गई थी, जिसमें कोचीन मिनरल्स एंड रूटाइल लिमिटेड (सीएमआरएल) के मुख्य वित्त अधिकारी के बयान भी शामिल हैं, जो कंपनी और उन तीनों के बीच हुए वित्तीय लेन-देन से जुड़े थे।

आरएसपी सांसद मीडिया में आई उन खबरों का जिक्र कर रहे थे जिसके मुताबिक ईडी ने केरलम के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी)रवाडा ए चंद्रशेखर को एक पत्र भेजकर सीएमआरएल रिश्वत मामले में विजयन, वीणा और रियास के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है।

सूत्रों ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया कि संघीय एजेंसी ने इस मामले में अपनी जांच के नतीजों का हवाला देते हुए,धनशोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए)की धारा 66(2) के तहत एक पत्र भेजा है।

यह प्रावधान ईडी को अधिकार देता है कि वह अपनी आपराधिक जांच के नतीजों को किसी भी कानून प्रवर्तन एजेंसी के साथ साझा करे, ताकि नई प्राथमिकी या शिकायत दर्ज की जा सके।

ईडी पुलिस द्वारा दर्ज प्राथमिकी के आधार पर पीएमएलए के तहत मामला दर्ज कर सकती है।

ईडी ने आरोप लगाया है कि सीएमआरएल ने ‘‘आईटी परामर्श सेवा’’ के नाम पर वीणा की कंपनी ‘एक्सलॉजिक सॉल्यूशंस’ (जो अब बंद हो चुकी है) को 2.78 करोड़ रुपये का फर्जी तरीके से भुगतान किया।

भाषा धीरज पवनेश

पवनेश