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‘नाराज फूफा जी’ को अब काम मिल गया: माल ढुलाई गलियारे के उद्घाटन के बाद मोदी ने कहा

(फोटो के साथ)

वडोदरा, आठ सितंबर (भाषा) प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उनकी सरकार के विकास कार्यों पर सवाल उठाने वालों पर मंगलवार को निशाना साधते हुए उन्हें एक बार फिर ‘‘नाराज फूफा’’ बताया।

गुजरात के वडोदरा में ‘नमो फॉर विकसित भारत’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम पर भी तंज कसते हुए कहा कि युवा सच्चाई के साथ खड़े रहेंगे और ‘‘झूठ की गूंज’’ से गुमराह नहीं होंगे।

इस कार्यक्रम में उन्होंने 35,000 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन एवं शिलान्यास किया।

मोदी ने कहा कि भारत ‘चिप से लेकर शिप(जहाज)’ बनाने के साथ विनिर्माण के क्षेत्र में एक नया अध्याय लिख रहा है। उन्होंने कहा कि देश में कलपुर्जों, तैयार उत्पादों और आत्मनिर्भरता के लिए जरूरी पूरी आपूर्ति शृंखला को विकसित किया जा रहा है।

इन परियोजनाओं में 2,800 किलोमीटर लंबा समर्पित माल ढुलाई गलियारा भी शामिल है। उन्होंने इसे ‘21वीं सदी की ऐतिहासिक उपलब्धि’ बताते हुए कहा कि यह पिछले 12 वर्षों में देश की कार्य संस्कृति में आए बदलाव का प्रमाण है।

मोदी ने कहा कि हाल ही में डबल-स्टैक कंटेनर मालगाड़ी ने मुंबई के जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह से वडोदरा तक एक ही यात्रा में 250 से अधिक ट्रक के बराबर माल पहुंचाया।

मोदी ने गलियारा परियोजना की उपयोगिता पर सवाल उठाने वालों पर तंज कसते हुए कहा, ‘‘अब ये जो नाराज फूफा जी हैं, वो चिल्लाएंगे कि ट्रक वालों का क्या होगा और उनके खरीदे हुए ट्रकों का क्या होगा?’’

उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी का नाम लिए बिना कहा, ‘‘इन नाराज फूफा जी को अब काम मिल गया।’’

प्रधानमंत्री ने हाल में दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान आलोचकों पर निशाना साधने के लिए इस शब्द का इस्तेमाल किया था।

मोदी ने कहा, ‘‘2014 के बाद भारत ने 50,000 आधुनिक रेल कोच बनवाए लेकिन पिछली (कांग्रेस) सरकार 10 साल में 50,000 शौचालय भी नहीं बनवा सकी।’’

प्रधानमंत्री ने समर्पित माल ढुलाई गलियारे (पश्चिम) के तीन प्रमुख खंडों का उद्घाटन किया। यह गलियारा नवी मुंबई के जवाहरलाल नेहरू बंदरगाह को उत्तर प्रदेश के दादरी से जोड़ता है और इन खंडों के उद्घाटन के साथ परियोजना पूरी हो गई।

मोदी ने कहा, ‘‘समर्पित माल ढुलाई गलियारे तेजी से विकसित हो रहे भारत की जीवनरेखा हैं। इस आधुनिक माल ढुलाई नेटवर्क के कारण भारत में बदलाव की रफ्तार तेज हो रही है।’’

उन्होंने कहा कि पहले यात्री और मालगाड़ियों को एक ही पटरी पर चलना पड़ता था जिससे यात्री और माल परिवहन दोनों की रफ्तार धीमी हो जाती थी लेकिन समर्पित माल ढुलाई गलियारे ने इस स्थिति को बदल दिया है।

मोदी ने कहा, ‘‘आपके आशीर्वाद से जब मैं 2014 में दिल्ली पहुंचा तो हमने इस परियोजना के काम में तेजी लानी शुरू कर दी। आज 2,800 किलोमीटर लंबे समर्पित माल ढुलाई गलियारे का काम पूरा हो गया है।’’

उन्होंने कहा कि आज पूर्वी और पश्चिमी माल ढुलाई गलियारे देश के व्यापार और कारोबार की मुख्य रीढ़ बन रहे हैं। उन्होंने कहा कि दोनों गलियारों पर रोजाना 430 से अधिक मालगाड़ियां चलती हैं।

उन्होंने कहा, ‘‘इस समर्पित माल ढुलाई गलियारे का विचार 2004 में सामने आया था। इस काम के लिए 2006 में एक विशेष कंपनी बनाई गई लेकिन 2014 तक फाइल एक जगह से दूसरी जगह घूमती रहीं।’’

मोदी ने कहा, ‘‘इन फाइल की किस्मत में भी दुर्भाग्य से कोई समर्पित गलियारा नहीं था। फाइल कहीं अटक जाती थीं, कहीं पड़ी रहती थीं और इधर-उधर भटकती रहती थीं।’’

राहुल गांधी के ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा, ‘‘आपको हर जगह ऐसे लोग मिलेंगे जो ‘झूठ की गूंज’ के जरिये आपको गुमराह करने की कोशिश करेंगे, लेकिन आज का युवा सच्चाई के साथ खड़ा रहेगा।’’

‘छात्रों की गूंज’ कांग्रेस द्वारा शुरू किया गया छात्रों से संवाद का एक अभियान है, जिसके तहत देश के विभिन्न शहरों में कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। कांग्रेस इस अभियान के जरिये परीक्षा प्रश्नपत्र लीक, महंगी शिक्षा, सरकारी भर्तियों में अनियमितताओं और बेरोजगारी जैसे मुद्दों को लेकर सत्तारूढ़ भाजपा को घेरने की कोशिश कर रही है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि युवा देख सकते हैं कि सरकार सौर, पवन, जलविद्युत और परमाणु ऊर्जा समेत विभिन्न क्षेत्रों में कितनी गंभीरता से काम कर रही है।

मोदी ने युवाओं से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल करने का भी आग्रह किया। उन्होंने कहा, ‘‘देश के युवाओं को एआई के क्षेत्र में विशेषज्ञ बनना होगा और हम चाहते हैं कि हमारे युवा इस क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन करें।’’

मोदी ने न्यू साणंद, न्यू मकरपुरा, न्यू उंबरगांव और नवी मुंबई के न्यू जेएनपीटी से मालगाड़ी सेवाओं को हरी झंडी दिखाई। उन्होंने टांडा रोड और वडोदरा के बीच एक यात्री ट्रेन सेवा को भी हरी झंडी दिखाई।

उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में भारत रेलवे कोच, मेट्रो कोच और इंजन के एक प्रमुख विनिर्माता के रूप में उभरा है। उन्होंने कहा कि 2014 से भारत में करीब 50,000 आधुनिक रेल डिब्बे बनाए गए हैं, जबकि रेलवे के बेड़े में 2.5 लाख वैगन जोड़े गए हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि मालगाड़ी को पहले 100 किलोमीटर की दूरी तय करने में 6.5 घंटे लगते थे, लेकिन अब यह दूरी आधे से भी कम समय में तय की जा सकती है। वहीं, ट्रक से 30 घंटे में पूरी होने वाली यात्रा अब डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर पर 10-12 घंटे में पूरी की जा सकती है।

उन्होंने कहा कि इन गलियारों से ईंधन की खपत कम हुई है, माल ढुलाई की लागत घटी है, समय की बचत हुई है और पर्यावरण को भी लाभ पहुंचा है।

मोदी ने कहा कि माल ढुलाई गलियारों के कारण पूर्वी और पश्चिमी भारत के किसान भी फूल, सब्जियां और फल प्रमुख बाजारों तक पहले की तुलना में अधिक तेजी से पहुंचा पा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि रेल संपर्क उन हिस्सों तक भी पहुंच रहा है, जहां दशकों से रेल सुविधा नहीं थी। प्रधानमंत्री ने कहा कि इन परियोजनाओं के जरिए गुजरात, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के आदिवासी क्षेत्रों को भी रेल नेटवर्क से जोड़ा जा रहा है।

मोदी ने कहा कि पिछली सरकार के दौरान बजट में केवल एक या दो ट्रेन की घोषणा होती थी और उन्हें शुरू होने में काफी समय लग जाता था, लेकिन अब एक के बाद एक नयी ट्रेन शुरू की जा रही हैं।

उन्होंने कहा कि सड़कों, रेलवे, मेट्रो, हवाई अड्डों, गैस पाइपलाइन और गरीबों के लिए आवास से जुड़ी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं ने न केवल लोगों का जीवन आसान बनाया है, बल्कि लाखों रोजगार के अवसर भी पैदा किए हैं।

मोदी ने कहा कि इस साल रेलवे का बजट 2.75 लाख करोड़ रुपये रहा, जो 12 साल पहले की तुलना में कई गुना अधिक है। उन्होंने कहा कि रेलवे के आधुनिकीकरण से हजारों नए रोजगार के अवसर पैदा हो रहे हैं।

उन्होंने कहा कि भारत ने 200 गीगावाट से अधिक क्षमता वाली सौर पीवी मॉड्यूल विनिर्माण क्षमता विकसित कर ली है, जिससे पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना के विस्तार में मदद मिल रही है।

उन्होंने कहा कि अब तक 55 लाख परिवारों ने, जिनमें गुजरात के 11 लाख परिवार शामिल हैं, अपनी छतों पर सौर पैनल लगवाए हैं, जिससे रोजगार के अवसर भी पैदा हुए हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भविष्य इलेक्ट्रिक इकोसिस्टम और डेटा सेंटर तथा एआई जैसे उद्योगों पर निर्भर करेगा, जिनके लिए बड़ी मात्रा में पानी और बिजली की आवश्यकता होती है। उन्होंने कहा कि भारत एआई के क्षेत्र में वैश्विक महाशक्ति बनने के लिए जरूरी ‘इकोसिस्टम’ तैयार कर रहा है और यूरेनियम तथा महत्वपूर्ण खनिजों को लेकर अंतरराष्ट्रीय समझौते भी कर रहा है।

भाषा आशीष पवनेश

पवनेश