नयी दिल्ली, सात सितंबर (भाषा) दिल्ली के सत्य निकेतन में इमारत ढहने की घटना के बाद असुरक्षित घोषित किए गए आसपास के भवनों को खाली कराने की कार्रवाई के बीच तीन छात्राओं को आधी रात पीजी छोड़ना पड़ा। पुलिस ने उन्हें रात करीब 12.30 बजे इमारत खाली करने को कहा।
मैत्रेयी कॉलेज की तीन छात्राएं पीजी की चौथी मंजिल पर एक कमरे में रहती थीं। उनके लिए कोई वैकल्पिक आवास की व्यवस्था नहीं थी, जिसके बाद उन्होंने पास में रहने वाली एक दोस्त के फ्लैट रात बिताई। उनका सामान अब भी पीजी में है।
छात्रा गीतांजलि ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, “हमें रात 12:30 बजे जगह खाली करने के लिए कहा गया। उस समय घबराहट फैल गई क्योंकि हमारे पास कोई और रास्ता नहीं था। बहुत देर हो चुकी थी और हमारे पास जाने के लिए कोई जगह नहीं थी।”
एमसीडी ने इमारत संख्या 13 को ‘‘जर्जर और खतरनाक’’ पाए जाने के बाद मालिक को तीन दिन में इसे गिराने का निर्देश दिया है। इससे पहले रविवार को क्षेत्र में पांच मंजिला इमारत गिरने से सात लोगों की मौत हो गई थी।
पुलिस के पहुंचने से पहले ही निचली मंजिलों पर रहने वाली छात्राएं अपने कमरे खाली कर चुकी थीं।
गीतांजलि और उनकी दो सहपाठी चौथी मंजिल के एक कमरे में रह रही थीं। उस मंजिल के तीन अन्य कमरे पीजी के मालिक ने अपने पास रखे थे। पुलिस जब वहां पहुंची तो वह भी वहां मौजूद थे।
गीतांजलि ने बताया कि सुरक्षा के लिए उन्हें तत्काल कमरा खाली करने को कहा गया। उन्हें यह भी बताया गया कि संभव है कि एक और इमारत को गिराना पड़े।
गीतांजलि ने जाते समय अपनी एक दोस्त को फोन कर उसके फ्लैट में रहने की अनुमति मांगी। हालांकि, उनके कपड़ा और अन्य सामान अब भी पीजी में है।
छात्राओं की परेशानी रात बिताने के इंतजाम तक सीमित नहीं रही। उन्हें अगले दिन कॉलेज जाने की भी चिंता थी, जबकि उनकी किताबें, कपड़े और जरूरी सामान असुरक्षित घोषित इमारत में ही रह गए।
एक अन्य छात्रा ने कहा, ‘‘अगर हम प्रथम वर्ष की छात्राएं होतीं और यहां हमारे दोस्त या सहपाठी नहीं होते, तो रात 12.30 बजे हम कहां जाते? हमारे पास कोई वास्तविक विकल्प नहीं था।’’
अन्य पीजी से निकाले गए छात्रों को अस्थायी रूप से आत्माराम सनातन धर्म कॉलेज और श्री वेंकटेश्वर कॉलेज समेत आसपास के कॉलेजों में ठहराया गया और भोजन उपलब्ध कराया गया।
भाषा
राखी प्रशांत
प्रशांत