देहरादून, सात सितंबर (भाषा) उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने सोमवार को नैनीताल जिले के ज्योलीकोट क्षेत्र में पीलिया, डायरिया और अन्य संदिग्ध जलजनित बीमारियों के प्रकोप को लेकर दायर एक जनहित याचिका पर सुनवाई की तथा प्रभावित क्षेत्रों में दूषित पेयजल की समस्या से निपटने के लिए संबंधित अधिकारियों को मंगलवार को व्यक्तिगत रूप से पेश होकर कार्ययोजना प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
अधिवक्ता रवि बिष्ट द्वारा दायर याचिका में बेलुवाखान, ज्योलीकोट, गेठिया, सरियाताल, दुर्गापुर, गंजा, वीरभट्टी, छीना और आसपास के गांवों में जलजनित बीमारियों के फैलने का मुद्दा उठाया गया है।
याचिका के अनुसार, क्षेत्र में पीलिया के बड़ी संख्या में मामले सामने आए हैं। 16 वर्षीय छात्र और 26 वर्षीय महिला की हाल में हुई मौत से भी क्षेत्र में दहशत का माहौल है। याचिका में कहा गया है कि तीन सितंबर तक ज्योलीकोट क्षेत्र में 50 से अधिक लोगों के पीलिया से पीड़ित होने की बात सामने आई थी, जबकि इसके बाद करीब 25 मरीजों के बीडी पांडे अस्पताल में भर्ती होने की जानकारी मिली।
याचिका में इन बीमारियों से मौत की वास्तविक संख्या और उनके चिकित्सीय कारणों की स्वतंत्र जांच का अनुरोध किया गया है।
याचिका में कृष्णापुर-दुर्गापुर क्षेत्र में सीवर लाइन में संभावित रिसाव और पेयजल स्रोतों के दूषित होने की आशंका भी जताई गई है। होटल, होमस्टे और अन्य प्रतिष्ठानों से निकलने वाले बिना उपचारित सीवेज या गंदे पानी के जलस्रोतों में मिलने की संभावना की भी जांच का अनुरोध किया गया है।
न्यायमूर्ति मनोज तिवारी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने नैनीताल के जिलाधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी, उत्तराखंड जल संस्थान के प्रभारी महाप्रबंधक और उत्तराखंड पेयजल निगम के मुख्य अभियंता, कुमाऊं सर्कल को मंगलवार को अदालत में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर समस्या से निपटने के लिए कार्ययोजना पेश करने को कहा है।
उच्च न्यायालय ने जल संस्थान के अधिशासी अभियंता को प्रभावित गांवों के लोगों को स्वच्छ और साफ पेयजल उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए हैं।
भाषा सं दीप्ति सुरभि
सुरभि