भुवनेश्वर, सात सितंबर (भाषा) ओडिशा में विपक्षी बीजू जनता दल (बीजद) ने सोमवार को आरोप लगाया कि जारी विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान अल्पसंख्यक समुदायों से जुड़े लोगों के नाम जानबूझकर मतदाता सूची से हटाए जा रहे हैं और ऐसी ‘‘अनियमितताओं’’ में शामिल अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की।
बीजद के वरिष्ठ उपाध्यक्ष देवी प्रसाद मिश्रा ने बताया कि पार्टी ने ओडिशा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) को सौंपे ज्ञापन में अपने आरोपों के समर्थन में ‘‘सबूत’’ भी प्रस्तुत किए हैं। उन्होंने दावा किया कि भद्रक जिले के धामनगर अधिसूचित क्षेत्र परिषद (एनएसी) से अनियमितताओं के मामले सामने आए हैं।
मिश्रा ने एसआईआर की सत्यापन प्रक्रिया के दौरान ‘फॉर्म-7’ आवेदनों के (मुख्य रूप से इस्तेमाल मतदाता सूची से नाम हटाने के लिए) कथित दुरुपयोग का आरोप लगाया।
निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के अनुसार, दावे और आपत्तियां दाखिल करने की अंतिम तारीख 19 अगस्त थी और इन पर अंतिम निर्णय 17 सितंबर तक किया जाना है।
ओडिशा की अंतिम मतदाता सूची 21 सितंबर को प्रकाशित होने वाली है।
मिश्रा ने कहा कि बीजद ने पहले भी राज्य के विभिन्न हिस्सों में ‘फॉर्म-7’ के कथित दुरुपयोग के संबंध में सीईओ का ध्यान आकर्षित किया था।
उन्होंने दावा किया कि इसी सिलसिले में एसआईआर की सत्यापन प्रक्रिया में लगे बूथ स्तरीय अधिकारियों (बीएलओ) द्वारा धामनगर थाने में दर्ज कराई गई शिकायत सामने आई है।
पुलिस शिकायत के अनुसार, धामनगर एनएसी के कार्यकारी अधिकारी-सह-सहायक निर्वाचन अधिकारी ने कथित तौर पर ‘फॉर्म-7’ आवेदनों से जुड़े मामलों में बीएलओ पर दबाव बनाया था।
ज्ञापन में कहा गया, ‘‘निर्धारित चुनावी प्रक्रिया और सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किए बिना मतदाताओं के नाम हटाने के कथित प्रयास किए गए हैं। यह भी आरोप लगाया गया है कि ऐसे निर्देशों का पालन करने से इनकार करने वाले बीएलओ को कारण बताओ नोटिस और अन्य कार्रवाई की धमकी दी गई।’’
मिश्रा ने कहा कि बीजद ने जिला प्रशासन के उपयुक्त अधिकारी से पारदर्शी और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। बीजद ने कहा कि जिन मामलों में संबंधित मतदाताओं ने अपने नाम हटाए जाने पर आपत्ति दर्ज कराई है या किसी प्रक्रियागत अनियमितता की पहचान हुई है, उनमें दोबारा सत्यापन कराया जाना चाहिए।
भाषा अमित प्रशांत
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