अंबिकापुर (छत्तीसगढ़), सात सितंबर (भाषा) छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले में एक सरकारी आवासीय स्कूल की 100 से अधिक छात्राओं ने सोमवार को स्कूल में मूलभूत सुविधाओं और पढ़ाई से जुड़ी समस्याओं की शिकायत करने के लिए जिला मुख्यालय तक करीब 20 किलोमीटर पैदल मार्च किया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
बाद में अंबिकापुर जिला मुख्यालय से लगभग 10 किलोमीटर दूर छात्राओं के लिए एक बस की व्यवस्था की गई, जिससे वे अपने गंतव्य तक पहुंचीं और सरगुजा के कलेक्टर अजीत वसंत से मुलाकात करके अपनी समस्याएं बताईं।
अधिकारियों के अनुसार, बटौली विकासखंड के शिवपुर गांव स्थित एकलव्य मॉडल आवासीय स्कूल की कक्षा 10वीं से 12वीं की छात्राओं ने अंबिकापुर की ओर पैदल चलना शुरू किया।
अंबिकापुर स्कूल से लगभग 30 किलोमीटर दूर है।
छात्राओं का आरोप है कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद स्कूल की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया।
जब प्रशासन को छात्राओं के मार्च की जानकारी मिली तो अधिकारियों को रास्ते में भेजा गया और उन्हें वापस लौटने के लिए समझाने का प्रयास किया गया।
हालांकि, छात्राएं कलेक्टर से मिलने की मांग पर अड़ी रहीं और मार्च जारी रखा। इसके बाद अधिकारियों ने छात्राओं को जिला कलेक्ट्रेट तक ले जाने के लिए बस की व्यवस्था की।
कलेक्टर अजीत वसंत ने छात्राओं से मुलाकात के बाद पत्रकारों से कहा, “छात्राओं ने मुख्य रूप से तीन समस्याएं बताईं। उन्होंने बताया कि स्कूल में पिछले एक महीने से बिजली की आपूर्ति बाधित है, वहां दो डीजल जनरेटर सेट हैं, लेकिन उनका इस्तेमाल केवल आपात स्थिति में किया जाता है और उनसे केवल तीन से चार घंटे ही बिजली मिलती है।”
उन्होंने बताया कि छात्राओं ने भौतिकी और रसायन विज्ञान के शिक्षकों के ठीक से नहीं पढ़ाने की शिकायत की। इसके अलावा उन्होंने भोजन की गुणवत्ता और स्कूल में साफ-सफाई की कमी को लेकर भी चिंता जताई।
वसंत ने कहा कि बिजली की समस्या दूर करने के लिए छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी लिमिटेड (सीएसपीडीसीएल) को निर्देश दिए गए हैं।
उन्होंने कहा, “एकलव्य स्कूलों में शिक्षकों की नियुक्ति सरकार करती है। वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर अतिथि शिक्षकों की भी नियुक्ति की गई है, लेकिन छात्राओं ने कहा कि वे ठीक से पढ़ा नहीं रहे हैं। इस समस्या के समाधान के लिए भी निर्देश दिए गए हैं।”
कलेक्टर ने कहा कि स्कूल में साफ-सफाई और अन्य मूलभूत समस्याओं को दूर करने के निर्देश दिए गए हैं।
वसंत ने कहा कि छात्राओं ने अपनी समस्याओं के बारे में स्कूल के प्राचार्य को जानकारी दी थी, लेकिन स्थानीय प्रशासन को शिकायतों की कोई सूचना नहीं मिली थी।
उन्होंने कहा, “अगर हमें किसी माध्यम से जानकारी मिलती तो समस्याओं का समाधान किया जा सकता था।”
कलेक्टर ने आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त को स्कूल में जरूरी सुविधाएं सुनिश्चित करने और छात्रों को किसी परेशानी का सामना न करना पड़े, इसके लिए कदम उठाने के निर्देश दिए।
भाषा सं संजीव जोहेब
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