नयी दिल्ली, सात सितंबर (भाषा) केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने सोमवार को कहा कि बिहार के गृह विभाग की ओर से हाल ही में जारी एक अधिसूचना ने एजेंसी को ‘‘व्यापक शक्तियां’’ दी हैं, और भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) एवं सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम जैसे नये कानूनों के लागू होने के बाद इनकी जरूरत थी।
अधिकारियों के अनुसार, मीडिया के एक हिस्से में तीन सितंबर की उस अधिसूचना को जिस तरह से दिखाया गया -- जिसमें राज्य सरकार की पूर्व सहमति को ‘‘अनिवार्य’’ बताया गया था -- उससे ‘‘जरूरी समझ की कमी’’ झलकती है।
अधिकारियों ने कहा, ‘‘यह अधिसूचना सीबीआई को 1996 के (बिहार सरकार द्वारा जारी) अधिसूचना की तुलना में व्यापक शक्तियां देती है’’, क्योंकि पुरानी अधिसूचना में ‘‘2023 के नये आपराधिक कानून यानी बीएनएस, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम (बीएसए) शामिल नहीं थे।’’
उन्होंने कहा कि नयी अधिसूचना ‘‘बीएनएस 2023 को शामिल करने के लिए जरूरी थी, जो 2024 में लागू हुआ’’ और यह ‘‘सीबीआई को सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के तहत भी शक्तियां देती है।’’
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि ‘‘1996 की अधिसूचना के अनुसार भी, राज्य सरकार के कर्मचारियों द्वारा किए गए अपराधों की जांच के लिए सीबीआई को बिहार सरकार से अनुमति की जरूरत थी और अब भी अनुमति की जरूरत होगी। इसलिए, इस मामले में कोई बदलाव नहीं हुआ है।’’
मीडिया के एक हिस्से में ऐसी खबरें आई थीं कि पहले से सहमति लेना ‘‘अनिवार्य’’ करके, सम्राट चौधरी सरकार — जो राज्य में भाजपा के नेतृत्व वाली पहली सरकार है — अजीबोगरीब टकराव वाला रुख अपना रही है।
राज्य पुलिस मुख्यालय ने भी पिछले हफ्ते यह कहकर इस विवाद को खत्म करने की कोशिश की थी कि ऐसी सभी खबरें ‘‘बेबुनियाद और गुमराह करने वाली’’ हैं।
इसके अलावा, सीबीआई अधिकारियों ने यह भी बताया कि बिहार सरकार की अधिसूचना पश्चिम बंगाल और मध्यप्रदेश सरकारों द्वारा जारी की गई इसी तरह की अधिसूचना के ‘‘अनुरूप’’ है।
दिलचस्प बात यह है कि इन दोनों राज्यों में भी भाजपा की ही सरकारें हैं।
अधिकारियों ने कहा, ‘‘इसलिए, भ्रष्टाचार-रोधी मामलों की जांच करने वाली सीबीआई की शक्तियों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। यह अधिसूचना सीबीआई को उन अपराधों के मामलों की जांच करने के लिए सभी जरूरी शक्तियां देती है, जो दिल्ली विशेष पुलिस प्रतिष्ठान (डीएसपीई) अधिनियम की धारा 3 के तहत अधिसूचित किए गए हैं...।’’
भाषा सुभाष माधव
माधव