(वर्षा सागी)
नयी दिल्ली, सात सितंबर (भाषा) सत्य निकेतन में इमारत ढहने की घटना के बाद शहर की तंग और भीड़भाड़ वाली गलियों में बने पीजी में रहने वाले डीयू के छात्र चाहते हैं कि दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) चुनाव के दौरान उम्मीदवार सुरक्षित आवास का मुद्दा उठायें।
दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के साउथ कैंपस के पास स्थित दशकों पुरानी पीजी इमारत रविवार को मरम्मत कार्य के दौरान ढह गई और मलबे से 12 लोगों को निकाला गया, जिनमें से सात की मौत हो गई।
सोमवार को बचाव अभियान के दूसरे दिन घटनास्थल पर पहुंचे छात्रों ने कहा कि इस हादसे ने उन जगहों की सुरक्षा को लेकर भी बड़ी चिंताएं सामने ला दी हैं, जहां वे रहने को मजबूर हैं।
सत्य निकेतन में ऊंची-ऊंची इमारतें एक-दूसरे के काफी करीब बनी हुई हैं और संकरी गलियों में धूप, पैदल चलने वालों और आपातकालीन वाहनों के लिए बहुत कम जगह बचती है।
छात्रों ने कहा कि वे जानते हैं कि दिल्ली विश्वविद्यालय छात्र संघ (डूसू) आवास समस्या का पूरी तरह समाधान नहीं कर सकता, लेकिन वह छात्रों के लिए सुरक्षित विकल्प खोजने में मदद कर सकता है और इस मुद्दे को प्रमुखता से उठा सकता है।
बीकॉम (ऑनर्स) की छात्रा कशिश ने कहा, “अगर रहने के लिए तत्काल जगह उपलब्ध नहीं कराई जा सकती तो कम से कम हमें उन जगहों की सूची दी जाए, जिनकी सुरक्षा जांच हो चुकी है और जहां रहने की सलाह दी जा सकती है।”
छात्रों ने सुझाव दिया कि सरकारी कॉलेजों और विश्वविद्यालयों समेत सरकारी संस्थान सुरक्षा जांच के बाद छात्रावास या अन्य सुरक्षित स्थान खोजने में छात्रों की मदद कर सकते हैं।
छात्रों ने कहा कि वे इमारत ढहने की घटना के लिए डूसू या अन्य छात्र संगठनों को जिम्मेदार नहीं ठहरा रहे, लेकिन वे चाहते हैं कि उनके प्रतिनिधि दिल्ली से बाहर से आने वाले छात्रों के सामने मौजूद बड़ी आवास समस्या को उठाएं।
समाजशास्त्र के छात्र पार्थ ने कहा, “डूसू और छात्र संगठनों का इससे कोई लेना-देना नहीं है।”
छात्रों ने कहा कि छात्र संगठन कॉलेजों के आसपास सुरक्षित आवास के विकल्प खोजने में मदद कर सकते हैं। क्योंकि विश्वविद्यालय से बहुत दूर रहने जाना हमेशा व्यावहारिक नहीं होता।
उन्होंने कहा कि इससे रोजाना आने-जाने का समय बढ़ता है, यात्रा खर्च बढ़ता है और कॉलेज व पढ़ाई के लिए कम समय बचता है।
एक अन्य छात्र ने कहा, “हमें रहने के लिए इतनी दूर जाना पड़ता है और फिर लंबे समय तक यात्रा करनी पड़ती है। अगर हम शहर के बाहरी इलाकों में चले गए तो समस्या और बढ़ जाएगी।”
छात्रों ने कहा कि सीयूईटी शुरू होने के बाद दिल्ली से बाहर के राज्यों से आने वाले छात्रों की संख्या बढ़ी है, जिससे विश्वविद्यालय परिसरों के आसपास सस्ते आवास की मांग और बढ़ गई है।
अठारह सितंबर को होने वाले डूसू चुनाव से पहले छात्र चाहते हैं कि उम्मीदवार अपने चुनावी मुद्दों में आवास और सुरक्षा के मुद्दे को प्रमुखता से शामिल करें।
भाषा जोहेब रंजन
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