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दिल्ली: सत्य निकेतन हादसे के बाद सबसे पहले निजी एम्बुलेंस और स्थानीय लोगों ने मदद के बढ़ाए हाथ

(मानसी जगनी)

नयी दिल्ली, सात सितंबर (भाषा) दक्षिण पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन में रविवार को अपराह्न जब पांच मंजिला इमारत ढही तो सबसे पहले स्थानीय लोग मदद को आगे और सेवा आपूर्ति कंपनी के ऐप से बुक की गई ब्लिंकइट एम्बुलेंस कुछ ही मिनटों में घटनास्थल पर पहुंच गई जो ऑक्सीजन सिलेंडर और चिकित्सा उपकर के साथ-साथ पैरा मेडिकल कर्मी से भी लैस थी।

दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के नजदीक की संकरी गली जल्द ही तेजी से बचाव कार्य वाली जगह में बदल गई, जहां छात्र, स्थानीय निवासी, दुकानदार और आपात सेवा घायलों को त्वरित उपचार और मलबे को हटाने में मदद कर रहे थे। कुछ लोग तो अपने हाथों से ही मलबा हटाने में जुटे थे।

साउथ कैंपस पुलिस थाना को अपराह्न 1:34 बजे इस घटना के बारे में पुलिस नियंत्रण कक्ष (पीसीआर)से जानकारी मिली।

एक स्थानीय निवासी के अनुसार, घटनास्थल पर सबसे पहले पहुंचने वाली ब्लिंकइट एम्बुलेंस के अर्द्ध चिकित्सककर्मी थे और उन्होंने अपराह्न 1:45 बजे के आसपास मोर्चा संभाल लिया था और उसके बाद बचाव कार्य में तेजी आई।

बिहार के रहने वाले और राजनीतिक विज्ञान में स्नातक पाठ्यक्रम के पहले वर्ष के छात्र ऋतिक के लिए दोपहर का नजारा एक पल में ही बदल गया, जब एक इमारत ढह गई। इससे तंग गली में धूल और धुएं का गुबार फैल गया और लोग मलबे में दबे लोगों को तलाशने के लिए दौड़ पड़े।

ऋतिक ने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘इस अफरातफरी के बीच, मैंने अपराह्न करीब 1:30 बजे ब्लिंकइट एम्बुलेंस बुलाई और वह कुछ ही मिनटों में मौके पर पहुंच गई। उसके अर्द्ध चिकित्सककर्मी ने घायलों का इलाज शुरू कर दिया। उन्होंने ज़रूरतमंद लोगों को ऑक्सीजन दी और घायलों को प्राथमिक उपचार दिया।’’

पहली एम्बुलेंस के साथ जल्द ही और एम्बुलेंस भी जुड़ गईं, क्योंकि इस मामले में शामिल ब्लिंकइट के एक कर्मचारी ने दिल्ली में अलग-अलग जगहों पर तैनात एम्बुलेंस को सूचना दी और उन्हें सत्य निकेतन की ओर आने के लिए कहा।

ब्लिंकइट के एक कर्मी ने बताया, ‘‘जैसे ही हमारी पहली एम्बुलेंस पहुंची, हमने दूसरी एम्बुलेंस को बुलाना शुरू कर दिया। दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों में हमारी एम्बुलेंस मौजूद हैं, इसलिए हमने उन्हें एक-एक करके वहां बुलाया।’’

उन्होंने बताया कि अगले डेढ़ घंटे में लगभग नौ और ब्लिंकइट एम्बुलेंस घटनास्थल पर पहुंचीं और कुल मिलाकर लगभग 27 कर्मचारी इस काम में शामिल हुए।

ब्लिंकइट दिल्ली-एनसीआर के चुनिंदा इलाकों में मुफ्त आपात एम्बुलेंस सेवा देती है। लेकिन एम्बुलेंस बचाव अभियान का एक पहलु था।

इमारत और उसमें फंसे लोग मलबे के नीचे दब गए थे, इसलिए आस-पड़ोस के लोगों ने अपने हाथों से ही मलबा हटाना शुरू कर दिया। छात्रों और स्थानीय लोगों ने मलबे को हटाने के लिए एक मानव-श्रृंखला बनाई, जबकि अन्य लोगों ने घायलों को ले जाने में मदद की और लोगों को गिरी हुई इमारत के खतरनाक हिस्सों से दूर रखा।

जब चिकित्सा उपकरणों से मदद नहीं मिल पाई, तो ब्लिंकिट की टीम भी इस कोशिश में शामिल हो गई।

एक और अन्य कर्मी ने बताया, ‘‘हमारे पास जो लोग थे, उनसे हमने जो कुछ भी हो सकता था, वह किया। हम हाथों से स्लैब हटा रहे थे, मलबे की जांच कर रहे थे और देख रहे थे कि कहीं कोई उसके नीचे तो नहीं है। स्थानीय लोग भी यही कर रहे थे। हर कोई मदद करने की कोशिश कर रहा था।’’

उन्होंने इस बचाव कार्य को अलग-अलग कौशल और संसाधनों वाले लोगों की सामूहिक कोशिश बताया।

कर्मी ने बताया, ‘‘हर कोई अपने-अपने तरीके से मदद कर रहा था। हमारे पास चिकित्सा उपकरण और लोग थे, स्थानीय लोगों को जगह की जानकारी थी और वे पहले से ही वहां मौजूद थे, और बचाव एजेंसियों के पास गहन अभिशयान के लिए आवश्यक उपकरण थे। हर किसी की अपनी भूमिका थी।’’

एम्बुलेंस के साथ आए अर्द्ध चिकित्सककर्मियों की टीम ने इमारत गिरने की जगह और उसके आस-पास घायल हुए कई लोगों का इलाज किया। जिन लोगों को अस्पताल में भर्ती करने की ज़रूरत थी, उन्हें अस्पतालों में भेजा गया जबकि बाकी लोगों को शुरुआती इलाज के बाद सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया गया।

ब्लिंकइट के एक अन्य कर्मी ने बताया, ‘‘एक फल विक्रेता के पैर में चोट लगी थी, और पास खड़े कुछ दुकानदार भी घायल हो गए थे। हमने उनका इलाज किया और उन्हें मलबे से दूर हटाया। कुछ लोगों को अस्पताल ले जाने की जरूरत थी, जबकि बाकियों को बस उस जगह से हटाकर सुरक्षित स्थान पर ले जाना था।’’

एंबुलेंस में अस्पताल ले जाते समय जिन्हें ज़रूरत थी, उन्हें ऑक्सीजन और अन्य बुनियादी चिकित्सा सुविधाएं दी गई।

उन्होंने कहा, ‘‘जब भी किसी को ऑक्सीजन की जरूरत पड़ी, हमने उसे ऑक्सीजन दी। हमने उनकी जांच की, जो भी बुनियादी इलाज संभव था, वह किया और फिर उन्हें अस्पताल भेज दिया। कुछ लोग बाहर लाए जाते समय जीवित थे और उन्हें तुरंत मदद की जरूरत थी।’’

जब प्रशासन के विशेष बचाव दल ने मुश्किल बचाव कार्य का जिम्मा संभाला, तब तक वह जगह अलग-अलग वजहों से आए लोगों ने अपने स्तर पर मदद की जिनमें आस-पास रहने वाले छात्र, इमारत से वाकिफ स्थानीय लोग, गली के दुकानदार और शहर भर से बुलाए गए आपात कर्मी शामिल थे।

छात्रों ने बताया कि शुरुआती कुछ घंटों में भ्रम की स्थिति थी, लेकिन साथ ही लोग मदद के लिए खुद-ब-खुद आगे भी आ रहे थे।

द्वितीय वर्ष एक छात्र ने बताया, ‘‘हर कोई बस कुछ न कुछ करने की कोशिश कर रहा था। कुछ लोग मलबा हटा रहे थे, कुछ घायलों की मदद कर रहे थे, तो कुछ लोगों को ले जा रहे थे। कोई भी बस खड़ा होकर इंतजार नहीं कर रहा था।’’

इस हादसे में मृतकों की संख्या सोमवार को बढ़कर सात हो गई है जबकि 12 अन्य लोगों को मलबे से बाहर निकाला गया है।

भाषा धीरज माधव

माधव