चंडीगढ़, सात सितंबर (भाषा) संयुक्त किसान मोर्चा (एसकेएम) ने सोमवार को चंडीगढ़-मोहाली बॉर्डर पर अपना धरना खत्म कर दिया। यह कदम पंजाब सरकार के उस आश्वासन के बाद उठाया गया, जिसमें कहा गया है कि सरकार नदी के पानी और खेती से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के लिए एक महीने के भीतर राज्य विधानसभा का सत्र बुलाएगी।
कृषि मंत्री गुरमीत सिंह खुड्डियां ने प्रदर्शन स्थल का दौरा किया और एसकेएम की मांगों के संबंध में आश्वासन दिया।
एसकेएम के बैनर तले किसानों ने अपनी विभिन्न मांगों के समर्थन में एक सितंबर को प्रदर्शन शुरू किया था।
राज्य भर से किसान अपने ट्रैक्टर-ट्रॉली और अन्य गाड़ियों में सवार होकर चंडीगढ़-मोहाली बॉर्डर पर प्रदर्शन के लिए इकट्ठा हुए थे।
किसानों को दिए गए लिखित आश्वासन में खुड्डियां ने कहा कि राज्य सरकार एक महीने के भीतर विधानसभा का सत्र बुलाएगी। इसमें पुराने जल समझौतों पर फिर से विचार करने, पंजाब पुनर्गठन अधिनियम के कुछ प्रावधानों को रद्द करने और बीज विधेयक, 2025 को वापस लेने जैसे मुद्दों पर प्रस्ताव पारित किए जाएंगे।
खुड्डियां ने कहा कि विधानसभा एक प्रस्ताव पारित करेगी, जिसमें केंद्र से पंजाब के जल से संबंधित उन समझौतों पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया जाएगा, जिन्हें असंवैधानिक माना जाता है।
प्रदर्शन स्थल पर लिखित बयान पढ़ते हुए खुड्डियां ने कहा कि 25 साल से अधिक पुराने समझौतों को भी रद्द किया जाना चाहिए और उन पर नए सिरे से विचार किया जाना चाहिए।
बयान के अनुसार, सरकार पंजाब पुनर्गठन अधिनियम की कुछ धाराओं को रद्द करने के लिए एक प्रस्ताव लाएगी और उसे केंद्र को भेजेगी, जबकि एक अन्य प्रस्ताव में बांध सुरक्षा अधिनियम को रद्द करने का अनुरोध किया जाएगा।
बयान में कहा गया है कि विधानसभा 2025 के बीज विधेयक को वापस लेने की मांग संबंधी प्रस्ताव भी पारित करेगी और इसे केंद्र सरकार को भेजा जाएगा।
किसानों की कर्ज से जुड़ी मांगों पर सहकारी बैंकों और ऋण समितियों से लिए गए कर्ज के पुनर्भुगतान के लिए एकमुश्त निपटान (ओटीएस) नीति बनाई जाएगी।
बयान के अनुसार, यह नीति पंजाब विधानसभा में सभी राजनीतिक दलों के साथ विचार-विमर्श के बाद तैयार की जाएगी।
इस मुद्दे की जांच करने और अपनी सिफारिशें सौंपने के लिए एक समिति का गठन किया जाएगा, जिसके बाद उसकी रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
गन्ने से जुड़े मुद्दों पर यह आश्वासन दिया गया कि निजी चीनी मिलों के बकाया भुगतान को एक निश्चित समय-सीमा में पूरा किया जाएगा।
इसके अलावा, बयान के अनुसार, सहकारी चीनी मिलों में अपनाई जाने वाली ‘एक खिड़की, एक भुगतान’ प्रणाली को निजी चीनी मिलों में भी लागू किया जाएगा।
सरकार ने कहा कि किसानों की अन्य सभी लंबित मांगों की जांच के लिए एक समिति का गठन किया जाएगा।
किसान नेता समिति के लिए अपने प्रतिनिधियों को नामित करेंगे, जबकि सरकार वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल करेगी।
भाषा सुरभि दिलीप
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