कानपुर, सात सितंबर (भाषा) उत्तर प्रदेश के कानपुर में हिंदू आध्यात्मिक एवं सेवा मेले के आयोजन की तैयारियां शुरू हो गई हैं। यह मेला 26 से 30 नवंबर तक बेनाझाबर स्थित बृजेन्द्र स्वरूप पार्क में आयोजित किया जाएगा। आयोजकों के अनुसार, इसमें देशभर के हिंदू आध्यात्मिक और सेवा संगठनों का समूह जुटेगा।
सूत्रों के अनुसार, उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले होने वाले इस आयोजन के राजनीतिक निहितार्थ भी निकाले जा रहे हैं। राज्य में अगले वर्ष की शुरुआत में 403 विधानसभा सीटों के लिए चुनाव होने हैं और इस मेले को चुनावी तैयारियों से जोड़कर भी देखा जा रहा है।
हालांकि, हिंदू आध्यात्मिक एवं सेवा मेला, कानपुर के अध्यक्ष संजीव दीक्षित और सचिव नवेन्दु ने जारी बयान में कहा कि यह आयोजन सेवाभावी संस्थाओं के लिए एक महत्वपूर्ण मंच है, जहां वे अपने निस्वार्थ कार्यों को समाज के सामने रखने के साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिला सकेंगी।
उन्होंने कहा कि पूरी प्रक्रिया को सहभागी और गैर-व्यावसायिक रखा गया है, ताकि सेवा का मूल भाव बना रहे।
आयोजकों के अनुसार, मेले में 400 से अधिक सेवा संगठनों की प्रदर्शनी लगाई जाएगी। इसका उद्देश्य हिंदू धार्मिक संस्थाओं द्वारा किए जा रहे सेवा कार्यों को दुनिया के सामने प्रस्तुत करना है। आयोजकों का कहना है कि ‘‘हिंदू संस्थाएं सेवा नहीं करतीं’’ जैसी धारणा को बदलना मेले का मुख्य लक्ष्य है।
बयान के अनुसार, विद्यालयों और महाविद्यालयों के विद्यार्थियों के लिए विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। इसके अलावा स्वामी विवेकानंद रथ यात्रा, शारदीय नवरात्र में पंचमी, षष्ठी और सप्तमी के अवसर पर दुर्गा पूजा पंडालों में नारी सम्मान बढ़ाने के उद्देश्य से कन्या वंदन कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
आयोजकों ने बताया कि 31 अक्टूबर को विद्यालयों और महाविद्यालयों के एक लाख से अधिक विद्यार्थियों तथा हजारों नागरिकों की भागीदारी से ‘वंदे मातरम’ का सामूहिक गायन प्रस्तावित है।
उन्होंने बताया कि देशभर में अब तक 36 से अधिक हिंदू आध्यात्मिक एवं सेवा मेले आयोजित किए जा चुके हैं, जिनमें 4,000 से अधिक संस्थाओं ने भाग लिया और करीब डेढ़ करोड़ से अधिक लोग पहुंचे। इस बार के मेले में शिक्षा, चिकित्सा, पर्यावरण और पशु-पक्षी सेवा सहित सेवा के विभिन्न क्षेत्रों को प्रदर्शित किया जाएगा। परिवार, नारी सम्मान, संस्कार और राष्ट्रभाव को भी मेले की प्रमुख विषयवस्तु बनाया गया है।
कानपुर में हुई तैयारी बैठक में राष्ट्रवादी चिंतक और भारतीय रिजर्व बैंक के पूर्व निदेशक एस. गुरुमूर्ति के साथ स्थानीय प्रांत संघचालक और प्रांत प्रचारक भी मौजूद रहे। गुरुमूर्ति ने कहा कि हिंदू समाज को केवल एकजुट करने की नहीं, बल्कि उसे समरस बनाने की आवश्यकता है।
आयोजकों के अनुसार, मेले में शंकराचार्यों, श्री श्री रविशंकर, माता अमृतानंदमयी और स्वामी अवधेशानंद जैसे संतों की भागीदारी की संभावना है। उन्होंने दावा किया कि मुख्य मेले को राजनीति से दूर रखा जाएगा, हालांकि इससे जुड़े पूर्व कार्यक्रमों में राजनीतिक हस्तियों को शामिल किया जा सकता है।
मेले में विभिन्न जातीय संगठन भी हिस्सा लेंगे और अपने इतिहास, नायकों, परंपराओं तथा सेवा कार्यों से संबंधित स्टॉल लगाएंगे। शहरों में वातावरण बनाने के लिए विवेकानंद रथ यात्राएं भी निकाली जाएंगी।
आयोजन से पहले 31 अक्टूबर को प्रस्तावित ‘वंदे मातरम’ कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के शामिल होने की उम्मीद जताई जा रही है। उल्लेखनीय है कि इससे पहले के आयोजनों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी शामिल हो चुके हैं।
भाषा
आनन्द,मनीष रवि कांत