अहमदाबाद, सात सितंबर (भाषा) गुजरात पुलिस ने उच्च न्यायालय और सूरत सत्र न्यायालय को बम से उड़ाने की धमकी वाले ई-मेल भेजने के आरोप में चेन्नई से दो लोगों को गिरफ्तार किया। अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि इनमें से एक आरोपी पैरोल पर बाहर आने के बाद सुनवाई की कार्यवाही रोकने के लिए यह साजिश रच रहा था।
अधिकारियों के अनुसार, अहमदाबाद शहर की साइबर अपराध शाखा और सूरत अपराध शाखा ने ई-मेल से जुड़ी तकनीकी जानकारी का विश्लेषण करने के बाद चेन्नई आतंकवाद निरोधक दस्ते (एटीएस) की मदद से 48 घंटे के भीतर आरोपियों का पता लगा लिया।
अहमदाबाद के पुलिस आयुक्त अनुपम सिंह गहलोत ने बताया कि सूरत निवासी मोहम्मद अश्फाक अंसारी (28) और उसके साथी राजेश उर्फ राज मुनिया (33) ने कथित तौर पर एक फर्जी ई-मेल आईडी बनाई और शनिवार पूर्वाह्न 11 बजकर 57 मिनट और 11 बजकर 59 मिनट पर गुजरात उच्च न्यायालय को दो धमकी भरे ई-मेल भेजे।
साइबर अपराध शाखा ने बताया कि इन ई-मेल में ‘बम आरडीएक्स अहमदाबाद एवं सूरत अदालत’ जैसे संदेश लिखे थे और अदालत परिसरों को उड़ाने की धमकी दी गई थी।
गहलोत ने बताया कि सूरत अपराध शाखा ने इससे पहले अश्फाक को मादक पदार्थों के एक मामले में गिरफ्तार किया था और बाद में उसे पैरोल पर छोड़ा गया था लेकिन पैरोल की अवधि समाप्त होने के बाद वह जेल वापस नहीं लौटा और पिछले 10 महीने से फरार था।
उन्होंने बताया कि दोनों आरोपी पहले सूरत की लाजपोर जेल में एक साथ बंद थे और रिहाई के बाद भी उनके बीच संपर्क बना रहा।
अधिकारी ने बताया कि इसके बाद वे गांजा तस्करों की तलाश में चेन्नई गए थे। गहलोत ने बताया, “चेन्नई जाने का मुख्य उद्देश्य ‘हाइब्रिड गांजे’ की खेप लेना और उसे यहां लाकर बेचना था।”
पुलिस के अनुसार, बम धमकी का उद्देश्य कानूनी कार्रवाई से बचना था।
अश्फाक की सूरत सत्र न्यायालय में पांच सितंबर को मामले की सुनवाई थी, लेकिन वह पेश नहीं हुआ और उसी दिन धमकी भरा ई-मेल भेजा गया था।
गहलोत ने बताया, “बार-बार जमानत नहीं मिलने से अश्फाक परेशान था और वह अदालत की कार्यवाही बाधित करना चाहता था, ताकि पांच सितंबर को उसके खिलाफ सुनवाई न हो सके।”
उन्होंने बताया कि आरोपी शुरुआत में मुंबई में थे और 27 अगस्त को ट्रेन से चेन्नई जाते समय उन्होंने फर्जी ई-मेल आईडी बनाई थी।
पुलिस आयुक्त ने बताया, “जब ट्रेन पुणे के पास थी, तब उन्होंने धमकी भरा ई-मेल लिखकर उसे रख लिया। चेन्नई पहुंचने के बाद वे अलग-अलग होटलों में ठहरे और अपनी जगह बदलते रहे। इसके बाद शनिवार को उन्होंने यह ई-मेल भेजा था।”
भाषा जितेंद्र माधव
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