(मानसी जगनी)
नयी दिल्ली, सात सितंबर (भाषा) दक्षिण पश्चिम दिल्ली के सत्य निकेतन में रविवार को इमारत ढहने के बाद अपने कमरे तक चुन चुके और किराया तय कर लेने वाले छात्र संशय में है और उस इलाके में रहने जाने पर पुनर्विचार कर रहे हैं।
दिल्ली विश्वविद्यालय में प्रवेश मिलने के बाद देश के अलग-अलग हिस्सों से शहर आए छात्रों के लिए, इस घटना ने पीजी (पेइंग गेस्ट यानी भुगतान कर निवास एवं भोजन की सुविधा) की तलाश को इस सवाल में बदल दिया है कि क्या उनके चुने हुए कमरे सुरक्षित हैं या नहीं।
रविवार को अपराह्न करीब 1.30 बजे लड़कों के पीजी के तौर संचालित दशकों पुरानी एक इमारत उस समय ढह गई, जब उसके भूमिगत तल में मरम्मत कार्य किया जा रहा था।
असम की रहने वाली और मोतीलाल नेहरू कॉलेज में प्रवेश पाने वाली पहली वर्ष छात्रा श्रेया सहारिया ने बताया कि उन्होंने उस इलाके में ₹15,000 प्रति महीने के किराए पर एक और लड़की के साथ साझा कमरा तय कर लिया था और पेशगी दे दी थी।
श्रेया इस समय द्वारका मोड़ इलाके में अपने रिश्तेदारों के साथ रह रही हैं और इसी सप्ताहांत पीजी में स्थानांतरित होने वाली थी। वह रविवार को यहां आने से पहले आखिरी बार इलाके का मुआयना करने आई थीं।
श्रेया ने ‘पीटीआई-भाषा’को बताया, ‘‘मैं रहने आने से पहले उस जगह को आखिरी बार देखने आयी थी। मुझे इसी सप्ताहांत यहां रहने के लिए आना था, तभी इमारत ढहने की घटना हो गई। अब मुझे बहुत डर लग रहा है। ऐसा किसी के साथ भी हो सकता है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘ मुझे नहीं लगता कि मैं अब इस इलाके में रह पाऊंगी।’’
श्रेया ने इमारत ढहने की घटना की पृष्ठभूमि सवाल उठाया कि दिल्ली में उच्च शिक्षा के लिए आने वाले छात्रों के पास निजी आवास के अलावा इतने कम विकल्प क्यों हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘दूसरे राज्यों से आने वाले छात्रों के पास अधिक विकल्प नहीं होते। हम महाविद्यालय के नजदीक और अपने बजट में कोई जगह ढूंढते हैं और मान लेते हैं कि वह सुरक्षित होगी। लेकिन हमें कैसे पता चलेगा कि ये इमारतें ढांचे के लिहाज से सुरक्षित हैं या नहीं?’’
दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास स्थित सत्य निकेतन एक चहल-पहल वाला इलाका है और वहां 200 से अधिक पीजी संचालित किये जा रहे हैं।
गत कई सालों से यह श्री वेंकटेश्वर, आत्माराम सनातन धर्म, मैत्रेयी और जीसस एंड मैरी महाविद्यालयों छात्रों के रहने का पसंदीदा स्थान रहा है।
इन महाविद्यालयों और दुर्गाबाई देशमुख साउथ कैंपस मेट्रो स्टेशन के पास होना इसके दो सबसे बड़े फ़ायदे हैं। हालांकि, छात्रों की इतनी बड़ी संख्या के कारण यहां किराए भी बहुत बढ़ गए हैं और छात्र तंग कमरों में एक बिस्तर के लिए 12,000 रुपये तक चुका रहे हैं।
श्री वेंकटेश्वर कॉलेज में बीएससी भौतिकी की पढ़ाई कर रही और सत्य निकेतन में रह रही एक अन्य छात्रा ने बताया कि छात्रावास की बहुत अधिक कमी है। उसने दावा किया कि इस पाठ्यक्रम में दाखिला लेने वाले लगभग 300 छात्रों में से केवल दो को ही महाविद्यालय के छात्रावास में रहने की जगह मिली।
उन्होंने कहा, ‘‘महाविद्यालयों की इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए। पीजी में रहने की जगहें बिल्कुल भी सुरक्षित नहीं हैं और छात्रों के पास बहुत कम विकल्प हैं।’’
छात्रा ने कहा, ‘‘महाविद्यालयों को अपने छात्रावास अवसरंचना को बढ़ाना चाहिए और छात्रों को रहने की सुविधा देनी चाहिए। पीजी के मुकाबले छात्रावास अधिक सुरक्षित होते हैं। एक छात्रा होने के नाते, सुरक्षा को लेकर अतिरिक्त चिंता भी होती है।’’
आस-पास रहने वाले छात्रों को इन पीजी इमारतों की ढांचागत मजबूती के अलावा और भी चिंताएं हैं।
सत्य निकेतन के पीजी में पूर्व में रह चुके लोगों का कहना है कि मकान-मालिक अक्सर अधिक किराएदार रखने के लिए इमारतों में बदलाव करते हैं, जैसे कि लकड़ी के पटरों से बड़े कमरों को विभाजित करना। उन्होंने कहा कि पानी की खराब गुणवत्ता और साफ-सफाई के बिना बने खाने को लेकर भी बहुत शिकायतें हैं।
मैत्रेयी कॉलेज की पूर्व छात्रा गीतांजलि ने कहा कि उस इलाके में रहने वाले छात्र अक्सर बीमार पड़ जाते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘हर दूसरे छात्र को टाइफाइड और पीलिया होता है। मैं पिछले 20 दिनों से टाइफाइड और पीलिया से जूझ रही हूं।’’
सत्यनिकेतन में रविवार को हुए हादसे ने लंबे समय से लंबित इन चिंताओं को सामने ला दिया है।
इमारत के ढहने से कुछ ही पल पहले नम्रता गुप्ता उसी सड़क पर खड़ी होकर अपनी बेटी के कॉफी लेकर लौटने का इंतजार कर रही थीं।
उन्होंने बताया, ‘‘ इमारत ढह गई। मुझे लगा कि भूकंप आया है। अचानक पूरी सड़क धूल से भर गई। नज़ारा प्रलय जैसा लग रहा था। बाद में महसूस हुआ कि मैं बाल-बाल बची हूं।’’
बेटी के लिए पीजी देखने सत्य निकेतन आई गुप्ता ने कहा, ‘‘अगर मैं वहां दो मिनट और रुकी होती, तो इमारत मुझ पर गिर जाती।’’
ढही इमारत के बगल में मौजूद सिर्फ लड़कियों के पीजी में रहने वाली छात्राओं को में रहने वालों को आत्माराम सनातन धर्म महाविद्यालय पहुंचाया गया।
श्रेया ने कहा कि जो कमरा उन्होंने पसंद किया था वह नए शहर में आने और कॉलेज शुरू करने के बाद एक अनिश्चितता को कम करने वाला कदम होना चाहिए था। लेकिन अब फिर नए सिरे से तलाश शुरू करनी होगी।
उन्होंने कहा, ‘‘मैं बस ऐसी जगह चाहती हूं जहां मैं सुरक्षित महसूस कर सकूं। छात्रों को कॉलेज के पास रहने और सुरक्षित रहने के बीच चुनाव नहीं करना पड़ना चाहिए।’’
इस बीच, सत्य निकेतन हादसे मे मरने वालों की संख्या सोमवार को बढ़कर सात हो गई। वहीं अबतक 12 लोगों को बचाया गया है। पुलिस ने मकान के मालिक और अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है और मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिये गए हैं।
भाषा धीरज रंजन
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