चंडीगढ़, सात सितंबर (भाषा) न्यायमूर्ति अश्वनी कुमार मिश्रा ने सोमवार को यहां पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश पद की शपथ ली। इससे एक दिन पहले, पंजाब की भगवंत मान सरकार ने उनकी नियुक्ति पर आपत्ति जताई थी और केंद्र से शपथ ग्रहण समारोह रोकने का आग्रह किया था।
न्यायमूर्ति मिश्रा (57) जून से उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के रूप में कार्यरत थे। उन्हें यहां लोक भवन में पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने पद की शपथ दिलाई।
शपथ ग्रहण समारोह में हरियाणा के राज्यपाल असीम कुमार घोष, हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी, हरियाणा विधानसभा के अध्यक्ष हरविन्दर कल्याण, शिरोमणि अकाली दल की विधायक गनीव कौर मजीठिया और पंजाब के मुख्य सचिव के. ए. पी. सिन्हा उपस्थित थे।
हालांकि, पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान शपथ ग्रहण समारोह में उपस्थित नहीं हुए।
पिछले साल जुलाई में, न्यायमूर्ति मिश्रा का तबादला इलाहाबाद उच्च न्यायालय से पंजाब और हरियाणा उच्च न्यायालय कर दिया गया था। न्यायमूर्ति शील नागू का उच्चतम न्यायालय में पदोन्नति होने के बाद, उन्होंने इस साल एक जून को यहां उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश के तौर पर पदभार संभाला था।
उच्चतम न्यायालय कॉलेजियम की ओर से न्यायमूर्ति मिश्रा को पदोन्नत करने की सिफारिश किए जाने के करीब एक माह बाद केंद्र सरकार ने शनिवार को उनकी नियुक्ति के संबंध में अधिसूचना जारी की।
पंजाब मंत्रिमंडल ने रविवार शाम एक प्रस्ताव पारित कर केंद्र से आग्रह किया कि जब तक राज्य सरकार की चिंताओं का उचित समाधान नहीं हो जाता, न्यायमूर्ति मिश्रा के शपथ ग्रहण की प्रक्रिया को आगे न बढ़ाया जाए।
पंजाब सरकार ने दावा किया कि यह कदम राज्य सरकार की राय का इंतजार किए बिना, संवैधानिक नियमों और तय प्रक्रियाओं को दरकिनार करके उठाया गया।
पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने इस संबंध में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और पंजाब के राज्यपाल कटारिया को अलग-अलग पत्र लिखा था।
राज्य मंत्रिमंडल की बैठक के बाद एक आधिकारिक बयान में कहा गया कि इसने यह संकल्प लिया है कि पंजाब की चिंताओं पर उपयुक्त रूप से विचार किये जाने तक शपथ ग्रहण को रोक कर रखा जाए।
इस मुद्दे को लेकर राज्य सरकार और केंद्र के बीच तकरार पंजाब विधानसभा चुनाव से कुछ महीने पहले हुई है।
रविवार को भारत के अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सत्य पाल जैन ने कहा था कि नियुक्ति को लेकर पंजाब सरकार द्वारा उत्पन्न किया गया विवाद ‘‘बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और पूरी तरह से अनावश्यक’’ है। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य सरकार के पास अपनी राय भेजने के लिए पर्याप्त समय था।
भाषा सुभाष रंजन
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