नयी दिल्ली, सात सितंबर (भाषा) उच्चतम न्यायालय ने मादक पदार्थ रोधी कानून ‘एनडीपीएस’ के तहत बढ़ते मामलों पर चिंता जताते हुए इनसे निपटने के लिए सोमवार को केंद्र, राज्य सरकारों और केंद्र शासित प्रदेशों को यथाशीघ्र विशेष अदालतें गठित करने का निर्देश दिया।
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन न्यायाधीशों की पीठ को बताया कि स्वापक औषधि और मनःप्रभावी पदार्थ अधिनियम (एनडीपीएस) के तहत दर्ज मामलों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए 449 विशेष अदालतों की जरूरत हैं और इस समय 176 ऐसी अदालत कार्य कर रही हैं।
न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की सदस्यता वाली पीठ ने कहा, ‘‘हमें प्रतीत होता है कि अभी लंबित मामलों की संख्या और एनडीपीएस अधिनियम के तहत दर्ज मामलों में दुर्भाग्यपूर्ण और चिंताजनक बढ़ोतरी को देखते हुए, यह जरूरी है और न्याय के हित में भी है कि सभी आवश्यक 419 अदालतें यथाशीघ्र गठित हों।’’
न्यायालय ने संबंधित सभी प्राधिकारियों को निर्देश दिया कि वे आवश्यक कदम उठाएं और इन विशेष अदालतों के गठन के लिए जरूरी बुनियादी ढांचा उपलब्ध कराएं, और हो सके तो यह कार्य छह सप्ताह के भीतर करें।
उच्चतम न्यायालय ‘‘विशेष अदालतों के गठन’’ शीर्षक वाले एक स्वतः संज्ञान मामले की सुनवाई कर रहा था।
भाटी ने पीठ को सूचित किया कि एनडीपीएस अदालतों के अलावा, देश भर में विशेष रूप से राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) द्वारा दर्ज मामलों की सुनवाई के लिए आठ नयी अदालतें गठित की गई हैं और इसी के साथ एनआईए अदालतों की कुल संख्या बढ़कर 22 हो गई है।
न्यायालय ने आठ मई को एनआईए के औसत 10 से 15 लंबित मामलों पर एक विशेष अदालत गठित करने का निर्देश दिया था। इसने कहा कि सरकारी अधिकारियों और उच्च न्यायालयों के सहयोग से ‘‘इस आदेश का उद्देश्य काफी हद तक पूरा हो गया है’’।
अलग-अलग राज्यों और उच्च न्यायालय की ओर से पेश हुए अधिवक्ताओं ने कहा कि तय समयसीमा के भीतर एनआईए की अतिरिक्त अदालतें उचित संख्या में स्थापित की जाएंगी।
कर्नाटक और तमिलनाडु के वकीलों ने भरोसा दिलाया कि राज्य क्रमशः तीन और दो एनआईए अदालतें दो हफ्ते के अंदर स्थापित करेंगे।
केरलम के वकील ने कहा कि उनके राज्य में एक महीने में ऐसी दो अदालतें काम करना शुरू कर देंगी।
पीठ ने असम के अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि वे प्रस्तावित दो एनआईए अदालत गठित करने के कार्य को यथाशीघ्र पूरा करें और उन्हें चार हफ्ते के अंदर चालू करें। असम के वकील ने बताया कि वहां पहले से ही एनआईए की एक अदालत काम कर रही है।
इसी तरह, उच्चतम न्यायालय ने पश्चिम बंगाल के अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे पहले से मौजूद दो एनआईए अदालतों के अलावा तीन और ऐसी अदालतें स्थापित करने की दिशा में कदम उठाएं।
जम्मू-कश्मीर के वकील ने कहा कि चार अदालतों की जरूरत थी, जिनमें से एक काम कर रही थी।
उत्तराखंड के वकील ने कहा कि राज्य में एक एनआईए अदालत काम कर रही है लेकिन कोई भी मामला लंबित नहीं है।
उत्तर प्रदेश और बिहार के वकीलों ने कहा कि उनके पास लंबित मामलों को निस्तारित करने के लिए मौजूदा समय में क्रमशः एक और दो एनआईए अदालतें हैं।
उच्चतम न्यायालय ने 20 अप्रैल को मामले की सुनवाई के दौरान सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कहा था कि वे एनआईए और स्वापक नियंत्रण ब्यूरो (एनसीबी) जैसी केंद्रीय और राज्य एजेंसियों द्वारा जांच किए जा रहे आतंकवाद और मादक पदार्थ से जुड़े मामलों की जानकारी दें। यह कदम मामलों के जल्द निपटारे के लिए विशेष अदालतें गठित करनें की दिशा में उठाया गया था।
भाषा धीरज नेत्रपाल
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