नयी दिल्ली, सात दिसंबर (भाषा) राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) के अध्यक्ष न्यायमूर्ति (सेवानिवृत) प्रकाश श्रीवास्तव ने सोमवार को कहा कि साफ हवा सिर्फ पर्यावरण से जुड़ी एक चाहत नहीं, बल्कि व्यावहारिक लक्ष्य है जिसे समर्पित प्रयासों, सही योजना और जमीनी स्तर पर प्रभावी कार्यान्वयन से हासिल किया जा सकता है।
वह ‘नीले आसमान के लिए स्वच्छ हवा के अंतरराष्ट्रीय दिवस’ पर यहां पर्यावरण भवन में केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा आयोजित पांचवें ‘स्वच्छ वायु सर्वेक्षण पुरस्कार’ समारोह को संबोधित कर रहे थे।
न्यायमूर्ति श्रीवास्तव ने कहा, ‘‘विकास और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे के विरोधी नहीं हैं, बल्कि नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता बनाए रखते हुए ये दोनों साथ-साथ चल सकते हैं। यह हर नागरिक की ज़िम्मेदारी है कि वह सुनिश्चित करे कि आने वाली पीढ़ियां स्वच्छ पर्यावरण में रह सकें।’’
उन्होंने कहा, ‘‘साफ़ हवा सिर्फ़ पर्यावरण से जुड़ी एक चाहत नहीं, बल्कि एक व्यावहारिक लक्ष्य है जिसे जमीनी स्तर पर समर्पित प्रयासों, सही योजना और प्रभावी अमल के ज़रिए हासिल किया जा सकता है।’’
'स्वच्छ वायु सर्वेक्षण' राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम के तहत 130 शहरों का सालाना मूल्यांकन है। इसका मकसद शहरों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना और हवा की गुणवत्ता सुधारने के उपायों को प्रोत्साहित करना है।
दस लाख से ज़्यादा आबादी वाले शहरों में उत्तर प्रदेश के लखनऊ ने 'स्वच्छ वायु सर्वेक्षण पुरस्कार' में पहला स्थान हासिल किया, जबकि मध्यप्रदेश के इंदौर और जबलपुर ने क्रमशः दूसरा और तीसरा स्थान प्राप्त किया।
इस मूल्यांकन में सड़कों की धूल, ठोस कचरा प्रबंधन, वाहनों से निकलने वाले धुएं, औद्योगिक प्रदूषण, निर्माण और तोड़-फोड़ से निकले कचरे के प्रबंधन, अन्य तरह के उत्सर्जन (जैसे डीजी सेट और वाणिज्यिक प्रतिष्ठान) और सूचना, शिक्षा और संचार गतिविधियों के लिए शहरों द्वारा उठाए गए कदमों पर विचार किया जाता है।
न्यायमूर्ति श्रीवास्तव ने कहा कि साफ़ हवा कोई विलासिता की चीज नहीं, बल्कि एक बुनियादी ज़रूरत है। उन्होंने कहा कि मुख्य मकसद यह सुनिश्चित करना होना चाहिए कि बच्चे बिना किसी डर के बाहर खेल सकें, बुज़ुर्ग सुरक्षित रूप से सुबह की सैर पर जा सकें और काम करने वाले लोग प्रदूषण से जुड़ी समस्याओं का सामना किए बिना अपना काम कर सकें।
उन्होंने कहा, ‘‘प्रौद्योगिकी और समय पर निगरानी (वायु प्रदूषण को रोकने में) अहम भूमिका निभाते हैं, लेकिन नागरिकों में व्यवहार संबंधी बदलाव और पर्यावरण के प्रति ज़्यादा जागरूकता भी उतनी ही ज़रूरी है।’’
उन्होंने कहा, ‘‘अगर हर नागरिक पर्यावरण के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी के बारे में जागरूक हो और उसके काम उस ज़िम्मेदारी के मुताबिक हों, तो और कुछ करने की ज़रूरत नहीं है। पर्यावरण अपना ख्याल खुद रख लेगा।’’
भाषा
राजकुमार अविनाश
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