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कृषि निर्यात ढांचे को मजबूत करने, फसल कटाई के बाद नुकसान कम करने की जरूरत :सीडब्ल्यूसी एमडी

नयी दिल्ली, सात सितंबर (भाषा) सार्वजनिक क्षेत्र की भंडार गृह कंपनी केंद्रीय भंडारण निगम (सीडब्ल्यूसी) के प्रबंध निदेशक संतोष सिन्हा ने सोमवार को कहा कि कंपनी कृषि निर्यातकों को ‘‘एकीकृत समाधान’’ देने के लिए अपने बड़े ‘भंडारण’ और ‘एक्जिम’ नेटवर्क का इस्तेमाल करने पर काम कर रही है। उन्होंने भारत के कृषि-निर्यात लॉजिस्टिक बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने की तत्काल आवश्यकता पर जोर दिया।

उद्योग निकाय, पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (पीएचडीसीसीआई) के साथ मिलकर आयोजित एक कार्यक्रम में सिन्हा ने कहा कि भारत हर साल लगभग 36 करोड़ टन फल और सब्जियों का उत्पादन करता है, जिसमें से अनुमानित 25-30 प्रतिशत फसल कटाई के बाद खराब भंडारण सुविधाओं, शीत श्रृंखला की कमियों और लॉजिस्टिक की दिक्कतों के कारण बर्बाद हो जाती है।

सीडब्ल्यूसी ने वर्ष 1957 में खराब भंडारण सुविधाओं के कारण किसानों को होने वाली मजबूरी में बिक्री को रोकने के लिए सिर्फ सात भंडारगृह के साथ शुरुआत की थी। आज इसका देशभर में 950 से ज्यादा भंडारगृह का नेटवर्क है।

सिन्हा ने कहा कि प्रमुख बंदरगाहों, इनलैंड कंटेनर डिपो (आईसीडी) और कंटेनर फ्रेट स्टेशनों (सीएफएस) में अपनी मौजूदगी के साथ, सीडब्ल्यूसी खुद को ‘खेत से लेकर अंतिम ग्राहक तक’ एकल खिड़की लॉजिस्टिक समाधान देने के लिए तैयार कर रहा है। इसमें सड़क, हवाई और तटीय परिवहन को जोड़कर निर्यातकों के लिए लागत कम करने की कोशिश की जा रही है।

उन्होंने कहा कि सीडब्ल्यूसी की तकनीकी विशेषज्ञता उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर का ‘फाइटो-सैनिटरी’ (स्वच्छता संबंधी) प्रमाणपत्र देने में सक्षम बनाती है, जिससे विदेशों में भारतीय खेप के अस्वीकार होने का जोखिम कम हो सकता है।

उन्होंने लागत-प्रभावी, जिंस-विशिष्ट शीत-भंडारण समाधान पर निगम के काम का भी जिक्र किया, जिसमें आईआईटी दिल्ली के साथ सहयोग और प्रमुख सुविधाओं पर डिजिटल और एआई-आधारित कंटेनर निगरानी प्रणाली की शुरुआत शामिल है।

भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के नियामकीय अनुपालन प्रकोष्ठ के उप-निदेशक, अखिलेश गुप्ता ने खाद्य व्यवसायों और निर्यातकों को नियंत्रित करने वाले नियामकीय ढांचे के बारे में बताया और उचित अनुपालन और प्रमाणन प्रक्रियाओं के महत्व पर जोर दिया।

पीएचडीसीसीआई के सहायक महासचिव, नासिर जमाल ने कहा कि भारत के बढ़ते कृषि आधार, खाद्य प्रसंस्करण क्षमता और वैश्विक मांग को देखते हुए एक ज्यादा कुशल कृषि-निर्यात लॉजिस्टिक पारिस्थिकी तंत्र बनाना जरूरी हो गया है।

भाषा राजेश राजेश अजय

अजय