नयी दिल्ली, सात सितंबर (भाषा) कांग्रेस नेता अभिषेक दत्त ने सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना के मद्देनजर दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के भवनों के सर्वेक्षण को लेकर सोमवार को आरोप लगाया कि निगम ‘‘कागजों में सर्वे’’ करता है और अगर अधिकारियों ने अपना काम ठीक से किया होता तो हादसे में बच्चों की जान नहीं जाती।
दत्त ने संवाददाताओं से कहा कि एमसीडी ने मानसून से पहले किए गए सर्वे में दिल्ली में करीब 32 लाख घरों को चिह्नित किया और इनमें केवल 19 घरों को ‘‘खतरनाक’’ श्रेणी में रखा गया।
उन्होंने कहा कि सत्य निकेतन में जो इमारत गिरी, एमसीडी के मुताबिक वह ‘‘खतरनाक’’ नहीं थी।
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि वर्ष 2023 से 2026 के बीच नगर निगम ने करीब एक करोड़ इमारतों का सर्वे किया, लेकिन इनमें केवल 103 इमारतों को ‘‘खतरनाक’’ श्रेणी में रखा गया।
उन्होंने कहा, ‘‘अगर अधिकारियों ने अपना काम ठीक से किया होता और इन भवनों को खतरनाक श्रेणी में चिह्नित करके खाली करवा लिया जाता, तो आज बच्चों की मौत नहीं होती।’’
दत्त ने आरोप लगाया कि एक ओर भाजपा सरकार गरीबों की झुग्गी-झोपड़ियों के खिलाफ ‘‘नफरत का बुलडोजर’’ चलाती है, वहीं दूसरी ओर ‘‘बड़े-बड़े बिल्डर्स को बचाने का काम करती है।’’
उन्होंने आग्रह किया कि दिल्ली सरकार दोषी अधिकारियों को ‘‘धारा 56जे के तहत तुरंत नौकरी से निकाले’’ और ‘‘धारा 466ए’’ को तत्काल बहाल करे, जिसे अवैध निर्माण को संरक्षण देने के उद्देश्य से हटा दिया गया था।
दत्त ने दिल्ली में सभी भवनों का सर्वे कराने और ‘‘खतरनाक श्रेणी’’ में आने वाली सभी इमारतों की सूची नगर निगम की वेबसाइट पर सार्वजनिक करने की भी मांग की।
भाषा हक हक सुरेश
सुरेश