(श्रुति भारद्वाज)
नयी दिल्ली, सात सितंबर (भाषा) दिल्ली के सत्य निकेतन स्थित पीजी की इमारत में रहने वाले नितेश चिब (19) इसके गिरने के ठीक पहले का मंजर याद करते हुए बताते हैं कि दोपहर के भोजन के दौरान उन्हें नल से तेजी से बहते पानी जैसी एक अजीब आवाज सुनाई दी। इसके बाद वह और उनका दोस्त सीढ़ियों की तरफ भागे तथा इसके कुछ ही सेकंड बाद इमारत ढह गई। इस हादसे में सात लोगों की मौत हो गई।
डीयू में बी.कॉम द्वितीय वर्ष के छात्र जम्मू के रहने वाले चिब इस हादसे में घायल हो गए। बाद में उन्हें मलबे से निकालकर इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया।
उनके भाई के अनुसार, चिब दोपहर का खाना खा रहे थे, तभी उन्हें नल से तेजी से बहते पानी जैसी आवाज सुनाई दी और वह अपने दोस्त नीरज के कमरे की ओर गए।
उन्होंने चिब द्वारा बताए गए घटनाक्रम को याद करते हुए कहा, “उसने अपने दोस्त से उस आवाज के बारे में पूछा, लेकिन आवाज और तेज हो गई। फिर वे तेजी से सीढ़ियों की ओर भागे। इससे पहले कि वे नीचे उतर पाते, इमारत ढह गई।”
भाई ने बताया कि चिब का तीन महीने का किराया चुका दिया गया था। उसके पिता सूखे मेवे बेचने का काम करते हैं। उन्होंने कहा, “अगर उसे कुछ हो जाता, तो उनके परिवार पर क्या गुजरती?”
दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास यह इमारत रविवार अपराह्न करीब 1.30 बजे उस समय ढह गई जब इसमें मरम्मत का काम हो रहा था। दशकों पुरानी इस संरचना से 12 लोगों को बाहर निकाला गया है, जिनमें से सात लोगों की मौत हो गई, जबकि कई घायल हो गए।
घायलों में एनएसयूआई के सदस्य नीरज बावा भी शामिल हैं, जो पठानकोट के रहने वाले हैं।
नकुल नाम के उनके एक दोस्त ने बताया कि बावा इमारत गिरने से सिर्फ एक दिन पहले ही पीजी में रहने पहुंचे थे। उससे पहले, वह एक महीने से ज्यादा समय तक एक दोस्त के घर पर रहकर प्रचार संबंधी गतिविधियों से जुड़े कामों में व्यस्त थे।
उन्होंने बताया कि बावा की हालत गंभीर है।
संबंधित दोस्त ने कहा, “...अगर हमें जारा भी पता होता कि ऐसा कुछ होने वाला है, तो हम उसे कभी वहां नहीं जाने देते।”
उन्होंने कहा कि बावा एनएसयूआई से जुड़े एक अन्य छात्र के साथ रह रहे थे।
घटना वाली जगह पर एक और परिवार बेचैनी से कुछ जवाब ढूंढ़ रहा था। एक महिला अपने पति परमलाल अनुरागी को ढूंढते हुए वहां आई थी; वे रविवार सुबह करीब 8:30 बजे वेल्डर का काम करने के लिए घर से निकले थे, लेकिन वापस नहीं लौटे थे। महिला ने कहा, “वह काम पर जा रहे थे। उन्होंने मुझसे अपना खाना पैक करने के लिए कहा था। वह एक ग्राहक के घर वेल्डिंग का काम करने गए थे।”
हादसे के बारे में पता चलने पर उन्होंने उन्हें फोन करने की कोशिश की और घटनास्थल पर पहुंचीं, लेकिन उन्हें अभी तक कोई जानकारी नहीं मिली है।
उन्होंने कहा, “कल सुबह से ही मैं उन्हें ढूंढ़ नहीं पा रही हूं। मुझे नहीं पता कि उनके साथ क्या हुआ।”
इसी इलाके में रहने वाले राहुल ने बताया कि उन्होंने इमारत को गिरते हुए देखा और जो कुछ भी देखा, उससे वह अब भी सदमे में हैं। उन्होंने कहा, “मैंने पूरी घटना देखी और मैं बुरी तरह हिल गया। मैं पास ही एक पीजी में रहता हूं और अब मैं यह देखने की कोशिश कर रहा हूं कि क्या मैं कुछ छात्रों की मदद कर सकता हूं।”
राहुल ने कहा कि इस घटना के बाद वह इस इलाके को छोड़ने के बारे में भी सोच रहे हैं। उन्होंने कहा, “ऐसी घटना देखने के बाद मैं यहां नहीं रह पाऊंगा।” उन्होंने यह भी बताया कि इमारत गिरने के बाद वे रहने के लिए दूसरी जगह भी तलाश रहे हैं।
उत्तर प्रदेश के रहने वाले और बी.कॉम द्वितीय वर्ष के छात्र आदित्य कुमार के दोस्त अमन ने बताया कि आदित्य गंभीर रूप से घायल हो गए हैं और उनका परिवार दिल्ली आ रहा है।
उन्होंने कहा, “वह घर में सबसे बड़े बेटे हैं और उनकी एक बहन भी है। अगर उन्हें कुछ हो गया, तो उनका परिवार कैसे गुजारा करेगा?”
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प्रशांत नेत्रपाल
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